International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Save Tiger

DON'T LET WILD TIGERS DISAPPEAR

Lady Rosetta

Potatoes with low sugar content and longer shelf life.

अबूझमाड़ के जंगल

जहां बाघ नही नक्सली राज करते हैं

खवासा का आदमखोर

जहां कांपती थी रूह उस नरभक्षी से

जानवर भी करते हैं योग

योगाचार्य धीरज वशिष्ठ का विशेष लेख

Nov 28, 2015

नेशनल कैडेट कोर कैम्प ओयल जनपद खीरी में पर्यावरण जागरूकता कार्यशाला


जंगल बाघ और बिली
ओयल-खीरी। नेशनल कैडेट कोर कैम्प, युवराजदत्त इंटर कालेज ओयल में आयोजित पर्यावरण कार्यशाला में जिले के तमाम विद्यालयों के छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में दुधवा लाइव के संस्थापक कृष्ण कुमार मिश्र ने पारिस्थितिकी तन्त्र में सभी जीव जंतुओं के महत्त्व पर चर्चा की और दुधवा टाइगर रिजर्व व् टाइगर मैन बिली अर्जन सिंह के बारे में बताया। 
कार्यक्रम में कर्नल देशराज पाण्डेय डॉ शशि प्रभा बाजपेयी डॉ संजय कुमार  ने कैडेट्स को  देश व् मानवता के लिए एन सी सी के महत्त्व के सन्दर्भ में चर्चा की।

कार्यक्रम में बिली अर्जन सिंह द्वारा बाघ व् तेंदुओं पर किए गए प्रयोगों पर चर्चा की गयी और बाघ का जंगलों के लिए क्या महत्त्व है तथा वन्य जीवन सरंक्षण पर विस्तार से बताया। बाघ की दुनिया भर में कितनी नस्ले है और बाघ के सरंक्षण में कितने प्रयास किए जा रहे है उस पर चर्चा हुई। गाँवों में जैवविविधता कितनी प्रभावित हुई और उसके मानवता को क्या क्या नुकसान है वह भी बताये गए। 

दुधवा लाइव डेस्क

Nov 17, 2015

मैली होती पन्ना की गंगा



बुंदेलखंड  का पन्ना जिला  अतीत की यादों को संजोय ऐसा जिला है जो मध्य प्रदेश में सबसे उपेक्षित है । इसी नगर  में एक नदी बहती है किलकिला , जिसका उदगम भी इसी जिले से होता है और विलीन भी इसी जिले में होती है ।  दुनिया भर में फैले प्रणामी सम्प्रदाय के लोगों के लिए किलकिला नदी गंगा की तरह पूज्य है । कुछ माह पहले इस नदी पर समाज सेवियों का बड़ा तामझाम दिखा  नदी बचाने की मुहीम शुरू की । नदी की जलकुम्भी भी साफ़ की  फोटो भी खिचाई पर उसके बाद ना तो इसमें मिलने वाले गटर रोके गए  और ना ही गंदगी साफ़ हुई । 


पन्ना जिले के बहेरा के समीप  छापर टेक पहाड़ी   से निकलने वाली यह किलकिला नदी पन्ना टाइगर रिजर्व से होती हुई  सलैया भापत पुर के मध्य  केन नदी में विलीन हो जाती है । जिले में ४५ किमी  बहने वाली यह नदी  केन नदी  पहले (5 किमी पूर्व ) यह  अपना नाम भी बदल लेती है । वहां लोग इसे माहौर नदी  नाम से जानते हैं । एक नदी के दो नाम  प्रायः कहीं सुनने में नहीं मिलते । सदियों से बाह रही इस  नदी को लेकर तरह तरह की किवदंतियाँ भी यहां खूब प्रचलित हैं । कहते हैं की जब घोड़ा इस नदी का पानी पी लेता तो घुड़सवार , और घुड़ सवार के पीने पर घोड़ा मर जाता था । स्वामी लाल दास ने अपने एक लेख में लिखा है की किलकिला नदी को कुढ़िया नदी भी कहते हैं , क्योंकि इस जल के उपयोग करने से  कोढ़ हो जाता था ।  एक और किवदंती यह भी है की यह नदी इतनी विषैली थी की  जब कोई पक्षी इसके ऊपर से निकलता था तो वह मर जाता था । 

   

388 वर्ष पूर्व नदी का जल बना अमृत :                                             

मान्यता है की  किकिला के इस विषैले जल को अमृत बनाया  निजानन्द सम्प्रदाय के प्राणनाथ जी ने । संवत 1684 में वे इसी किलकिला नदी के तट पर आये थे । यहाँ जब उन्हें  स्नान करने की इक्षा हुई तो स्थानीय आदिवासियों ने उन्हें इससे रोका था । उनके अंगूठे के स्पर्श मात्र से यह विषाक्त जल अमृत हो गया ।  वह स्थान आज भी अमराई घाट के नाम  से जाना जाता है ।  यह  स्थान  निजानन्द  सम्प्रदाय में  पवित्र स्थल माना जाता है । प्राण नाथ  यही बस गए  उनका प्राणनाथ  मंदिर   निजानन्द सम्प्रदाय के लोगों के लिए किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है , और किलकिला नदी उनके लिए गंगा की तरह पूज्यनीय है । इस सम्प्रदाय को मानने वाले दुनिया भर में फैले लोग  इस नदी का जल ले जाते हैं  । आज भी इस सम्प्रदाय से जुड़े लोगों की मृत्यु  के बाद उनकी अस्थियो को  नदी किनारे बने मुक्ति धाम में ही दफ़नाया  जाता  हैं ।  मान्यता है की इससे जीव को मुक्ति मिलती है । 

        
पन्ना की इस  किलकिला नदी के उद्धार के लिए नगर पालिका के तत्कालीन अध्यक्ष ब्रजेंद्र सिंह बुंदेला ने प्रयास किये थे ।  उनके जाने के बाद  इस ओर कोई प्रशासनिक प्रयास नहीं हुए ।  इस वर्ष कुछ स्वयं सेवी संघठनो ने नदी को जीवंत बनाने का प्रयास अवश्य किया । नदी की जलकुम्भी साफ़ की  खूब प्रचार प्रसार भी किया  पर नदी के हाल आज भी जस के तस बने हुए हैं । नदी में आज भी नगर की गन्दी नालियों का पानी मिल रहा है ।  जगह जगह कीचड़ के कारण आज यह दम तोड़ती नदी बन कर रह गई है । पिछले दिनों हमें मिले एक स्वयं सेवी संघटन के कर्ता  धर्ता  ने जरूर बतया था की  इस नदी के कायाकल्प के लिए  राजेन्द्र सिंह आएंगे , उनके नेतृत्व में इस नदी को साफ़ सुथरा किया जाएगा । 


देश में संस्कृतियों और नगरों का विकाश भले ही सरोवरों और नदियों के तट पर हुआ हो किन्तु आज के दौर में बोतल बंद पानी की संस्कृति ने वीराने में भी नगर बसा दिए और सरोवरों और नदियों को मारने का सिलसिला शुरू कर दिया । किलकिला नदी जिसके तट पर ही पन्ना नगर  की संस्कृति रची बसी है उसे ही समाप्त करने का सिलसिला जाने अनजाने बदस्तूर जारी है । 

रवीन्द्र व्यास 
vyasmedia@gmail.com

अमेरिका में खीरी जनपद का नाम रौशन किया सतपाल सिंह ने

"नेचर'स बेस्ट फोटोग्राफी एशिया अवार्ड्स 2015"

'लैंडस्केप’ श्रेणी में मिला प्रथम पुरस्कार व स्माल वर्ल्ड कैटेगरी में "हाइली आनर्ड विनर"

छह वर्ष के फोटोग्राफी करियर में पैंतीस राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार जीत चुके हैं
देश के युवा वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर सतपाल सिंह को अमेरिका सरकार के स्मिथसोनियन नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम ने नेचर फोटोग्राफी के लिए  प्रथम पुरस्कार देकर  सम्मानित किया। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी पुरस्कारों में से एक  "नेचर'स बेस्ट फोटोग्राफी एशिया अवार्ड्स 2015" में सतपाल के द्वारा खींची तस्वीर को लैंडस्केप डिवीज़न में "प्रथम पुरुस्कार" व स्माल वर्ल्ड कैटेगरी में एक तस्वीर  को "हाइली आनर्ड विनर" के लिए पुरस्कृत किया गया है। 


सतपाल उन पांच चयनित एशियाई विजेताओं में से एक थे जिन्हे यह सम्मान १२ नवम्बर की रात स्मिथसोनियन म्यूज़ियम, वाशिंगटन में जापान के सार्वजानिक मामलो के मंत्री व एम्बेसी प्रवक्ता श्री  मसातो ओटाका के हाथो दिया गया।  इस सम्मान  में सतपाल को पुरस्कार के साथ 1000 डॉलर (करीब पैंसठ हजार) की राशि देकर सम्मानित किया जायेगा।


ज्ञात हो कि इस प्रतियोगिता का आयोजन नेचर'स बेस्ट फोटोग्राफी पत्रिका,अमेरिका व  स्मिथसोनियन नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम, वाशिंगटन डी सी , अमेरिका द्वारा किया जाता है। 
स्मिथसोनियन  नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम दुनिया का सबसे अत्याधिक भ्रमड़ किये जाने वाला नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम है।  प्रत्येक वर्ष इस म्यूजियम को देखने पूरे विश्व से करीब सात मिलियन (70 लाख) लोग पहुँचते है।


इस वर्ष सभी एशियाई देशों से पाँच वर्गों में पांच "कैटेगरी विनर्स" (प्रथम पुरस्कार) व 25 "हाइली आनर्ड विनर्स" चुने गए। इस वर्ष प्रथम पुरस्कार के लिए सतपाल सिंह व दो अन्य भारतीय सुयश केशरी तथा प्रमोद सी एल व अन्य देशों से तेत्सुजी अकिमोतो- जापान तथा मिंघु युआन -चाइना से चुने गए। भारतीय विजेताओं में सतपाल का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा क्योंकि उन्हें एक प्रथम पुरस्कार के साथ ही "हाइली आनर्ड विनर" के लिए भी चुना गया।


सतपाल की तस्वीर समेत सभी पुरस्कृत तस्वीरों को करीब एक वर्ष के लिए स्मिथसोनियन म्यूजियम में लगाया जायेगा तथा योकोहामा, जापान में अगस्त 2016 में प्रदर्शित किया जायेगा तथा भारत समेत कुछ  अन्य एशियाई देशों में भी प्रदर्शनी लगाने पर विचार किया जा रहा है।

अब तक भारत समेत अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, फ़्रांस, ग्रीस, सिंगापुर, रूस, मलेशिआ आदि देशों में करीब पैंतीस राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके सतपाल कई बार देश को गौरान्वित कर चुके हैं। कुछ माह पूर्व फ़्रांस में प्रतिष्ठित पर्यावरण फोटोग्राफी पुरस्कार "मेलवीटा नेचर इमेजेस अवार्ड्स 2014" में पूरे विश्व से 36 फोटोग्राफर्स चुने गए थे जिसमे एशिया से एक मात्र विजेता फोटोग्राफर सतपाल सिंह ही थे।
युवा फोटोग्राफर सतपाल सिंह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के अलीनगर गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता जसवंत सिंह  खेती करते हैं।

पच्चीस वर्षीय सतपाल कहते हैं यह सम्मान पाना मेरे लिए कई मायनो में खास है और मुझे यह कहते हुए बहुत ख़ुशी है की  इसे प्राप्त करके मुझे देश का गौरव बढ़ाने व नेतृत्व करने का मौका मिला। 

दुधवा लाइव डेस्क 

Nov 10, 2015

बुंदेलों ने छीन लिया सुखनई का सुख




मऊरानीपुर से वापसी के साथ ' सुखनई ' के आंसू ले आया हूँ ! सोचा आपसे साझा कर लेवे ताकि हमें अपनी नदी सभ्यता और संस्कृति  पर गर्व हो सके ! अब है तो थोथा और छिछला ही ...चलिए जैसा भी है सहेजे रखिये ताकि समय के साथ और नदियाँ नालो में तब्दील हो सके ! 

सुखनई नदी की कहानी- कहाँ गया है बुन्देली आँख का पानी ! - आशीष सागर,बाँदा 

मऊरानीपुर - चन्देल कालीन इतिहास,विशाल तालाब और पोखरों से बुलंद बुंदेलखंड कभी अपने पानीदारी के लिए जाना जाता था ! विकास की आहट हुई और अन्य की तरह बुंदेले भी जल,जंगल,नदी -पहाड़ से उबकर कंक्रीट के सोपान पर चढने के लिए हाथापाई करने लगे...जब जिसको जैसा अवसर मिला उसने निर्बाध और अविरल बह रही नदियाँ को अपने मानवीय कृत्य से शर्मसार कर दिया. इतिहास नए रूप में बदल रहा है,अब हम क्योटो और मेक इन इंडिया से लेकर डिजीटल पावर की बात कर रहे है ! ये तब और अच्छा लगता है जब मार्क जुकर बर्ग यमुना के तीरे बसे ' ताज ' को देखने-समझने में लगे है ! वह कहते है कि ताज जैसा सुन्दर कोई नही मगर वही मार्क की नगर ताजमहल के पीछे समूचे आगरा का मैला ढो रही यमुना में नही गई जो मथुरा से दिल्ली तक के सफ़र में विकास के गंडासे से बेरहमी से काटी जा रही है ! 

कुछ ऐसे ही हाल है बुंदेलखंड के जिला झाँसी की तहसील मऊरानीपुर में बहने वाली सुखनई नदी के ! राजा मधुकरशाह ने इस नगरी को बसाया था जो अब मंदिरों की नगरी मऊरानीपुर के नाम से बसी है. बुंदेलखंड का 147 वर्ष पुराना जलविहार मेला महोत्सव हर वर्ष सुखनई के किनारे ही लगता है ! भव्य विमानों से लड्डू गोपाल का जलविहार होता है,पुरे शहर में शोभा यात्रा निकलने के बाद ये जलसा अपने चरम उन्माद पर होता है जिसको देखने और आयोजित करने में स्थानीय लोकसेवक से लेकर प्रतिनिधि,आला अधिकारी तक दिनरात एक करते है....ये सुखनई नदी मध्यप्रदेश से निकली है जो आगे चलकर महोबा के धसान में मिलती है.वैसे तो यह बरसाती नदी है लेकिन कभी अपनी निर्मलता और लाल बालू के लिए इसका यौवन देखते बनता था ! 



साल में भाद्रपक्ष में यह जलविहार मेला लगता है जिसमे करीब 15 दिवसीय कार्यक्रम होते है.सूत्र बतलाते है कि अबकी साल 60 लाख रूपये इस मेले में खर्च हुए है.स्थानीय नगर पालिका की अध्यक्ष मीरा आर्या है इनके पति हरिश्चंद्र पूर्व में अध्यक्ष रह चुके है...पिछले तीन पंचवर्षीय से एक ही परिवार में नगर पालिका खेल रही है.यहाँ से विधायक सपा रश्मि आर्या के पति जयप्रकाश आर्य उर्फ पप्पू सेठ ( अपरहन ,हत्या के दर्जन भर मामले में अभ्युक्त ) का जलजला अपने शबाब पर होता है जब इलाके की सरकारी मिशनरी को अपाहिज बनाना हो ! रश्मि आर्या के देवर  हेमन्त सेठ है.ये हाल ही में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ चुके है ! ...स्थानीय नागरिक इस सांप की पूछ को पकड़ना नही चाहते क्योकि उन्हें भी इलाकाई दुश्मनी से परहेज है ! 

सुखनई नदी पर अब तक लाखो रुपया चित्रकूट की मंदाकनी सरीखे घाट तैयार करने और संरक्षण के नाम पर गर्क किया गया है लेकिन इसकी सूरत और पानी की सीरत देखकर बस जी भरकर रोने को मन करता है ! ये गुमान उस पल छलनी हो जाता है कि नदी हमारी माँ है,हा नदी सभ्यता के अगुआ रहे है ! आज सुखनई गटर से बत्तर हाल में सिसक रही है.हलके के पत्रकार की कलम चुप है क्योकि उन्हें अपनी रोजमर्रा की घटनाए भी उकेरनी है ! एक स्थानीय दैनिक समाचार पत्र से जुड़े संवाददाता कहते है कि बीते सितम्बर के जलविहार मेले में नदी में इतना पानी नही था की लड्डू गोपाल विहार कर पाते ! एक तरफ हमारा सुबह का निर्मल भारत था और दूसरी तरफ नगर पालिका के सेवक सूअर विचरण कर रहे थे यह अलग बात है कि धरम के ठेकेदार इस दंभ में थे कि वे हिन्दू है और भगवान कृष्ण की लीला उनका मोक्ष अवश्य करेगी !

गौरोठा से सपा विधायक दीपनारायण ने नदी की हत्या करने को दिन -रात बालू उलीची जिससे नदी में आज काई,सिल्ट और गंदगी की सत्ता है ! खैर ये जो भी है ये कुछ वैसा ही जब हम माँ गंगा को निर्मल करने के अभियान में काशी की सड़के चिकनी कर रहे है,मगहर के घाट शव से दूर कर रहे है लेकिन सुखनई जैसी छोटी नदियों को जो वास्तव में आज भी गंगा से बेहतर विकल्प है किसान के लिए सींच के साधन का को अनदेखा करते जा रहे है....सुखनई रहेगी या नही कालांतर में ये विकास पर छोड़ देना आखिर हमें भी तो अगली सभ्यता को कुछ विरासत में देना है ...ये मैला ढोने वाली नदियाँ जिसका पानी अब आचमन के मुकाबिल भी नही रह गया है !

आशीष सागर 
सामाजिक कार्यकर्ता 
जिला-बांदा, बुंदेलखंड 
भारत 
ashish.sagar@bundelkhand.in

Nov 7, 2015

ग्रीनपीस इंडिया का रजिस्ट्रेशन रद्द

ग्रीनपीस इंडिया का रजिस्ट्रेशन रद्द, असहमति जताने के लिए गृह मंत्रालय का असहिष्णु प्रदर्शन

6 नवंबर, 2015। ग्रीनपीस इंडिया सोसाइटी को तमिलनाडु रजिस्टार ऑफ सोसाइटी ने एक नोटिस देकर बताया  गया है कि उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है। इस वर्ष युनाइटेड नेशन के महासचिव सहित, दुनिया के अनेक गणमान्य लोगों ने कहा है कि सिविल सोसाइटी लोकतंत्र के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है; लेकिन यह नोटिस भारत सरकार द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के अभियान का एक और सबसे हालिया उदाहरण है। पिछले कई महीनों से ग्रीनपीस इंडिया सोसाइटी ने सरकार के विभिन्न महकमें द्वारा लगातार हमले सहे हैं और पुनः कानूनी विकल्प अपनाने पर मजबूर है।

रजिस्ट्रेशन के निरस्तीकरण के बारे में ग्रीनपीस इंडिया की अंतरिम निदेशक विनुता गोपाल का कहना है, “ यह स्पष्ट है कि तमिलनाडु रजिस्ट्रार सोसाइटी पूरी तरह दिल्ली में बैठे गृह मंत्रालय के निर्देश पर काम कर रहा है जो काफी समय से ग्रीनपीस इंडिया को बंद कराने पर तुली हुई है। गृह मंत्रालय द्वारा अभिव्यक्ति की आजादी और असहमति की आवाज को दबाने के यह अदक्ष प्रयास सरकार के लिए न सिर्फ देश में बल्कि विश्व स्तर पर शर्मिंदगी का सबसे बड़ा कारण बन गया है। यह इस बात को दर्शाता है कि सरकार किसी दूसरों की आवाज सुनने को तैयार नहीं है और असहमति के प्रति बहुत ही असिहिष्णु है।”

विनुता ने आगे कहा, “रजिस्ट्रार ने यह फैसला ग्रीनपीस का पक्ष सुने बगैर ही ले लिया। रजिस्ट्रार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को भी नहीं माना है जिसमें उसे आदेश दिया गया था कि वो ग्रीनपीस द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और बिंदुओं पर गौर करे। यह कानूनी प्रक्रिया के उल्लधंन का बहुत ही निंदनीय प्रयास है, जिससे कानून के प्रति उनका निरादर प्रतीत होता है। हमारे पास मजबूत कानूनी आधार है जिसे हम मद्रास हाई कोर्ट को अवगत कराएगें, और इस नोटिस पर स्टे करने की मांग करेगें। हमें पूरा विश्वास है कि हमें कोर्ट से एक बार फिर न्याय मिलेगा।”

अविनाश कुमार,ग्रीनपीस
avinash.kumar@greenpeace.org

Nov 4, 2015

हांथियों को बचाने विदेशी जोड़ों की आटो रैली



इंग्लैण्ड व स्काटलैण्ड के 90 प्रतिभागी हुए शामिल 
कान्हा के लिए पन्ना से आज शुरू हुआ यह अनूठा सफर 
पन्ना, 3 नवम्बर का. 
बाघ संरक्षण के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो चुके म.प्र. के पन्ना जिले से हांथियों के संरक्षण हेतु अभिनव पहल शुरू हुई है. प्रकृति प्रेमी विदेशी जोडों द्वारा हाथियों को बचाने के लिए पन्ना से कान्हा तक आटो रैली निकाली गई है. इस रैली के माध्यम से हांथियों के संरक्षण हेतु फण्ड भी जुटाया जायेगा. इस अनूठी यात्रा में इंग्लैण्ड व स्काटलैण्ड के 90 प्रतिभागी आटो रिक्सा द्वारा पन्ना से बांधवगढ़ होते हुए कान्हा तक का सफर तय करेंगे. रैली में स्काटलैण्ड राजपरिवार के प्रिन्स मार्क व अन्य सदस्य भी शामिल हैं. पन्ना स्थित मोहननिवास कोठी से यह आटो रैली आज सुबह कान्हा के लिए रवाना हुई. 

पन्ना राजघराने की सदस्य श्रीमती दिव्यारानी सिंह व केशव प्रताप सिंह ने बताया कि यह अनूठी आटो रैली मार्कस सेण्ड की याद में निकाली गई है जो इंग्लैण्ड के राजकुमार प्रिंस चाल्र्स के साले हैं. इन्होंने वर्ष 1980 में तारा नाम की हथिनी में सवार होकर भारत का भ्रमण किया था और ऐलीफैन्ट कॉरीडोर की पहचान की थी. पिछले साल मार्कस सेण्ड का निधन हो गया, इसलिए हांथियों के प्रति उनके प्यार को देखते हुए यह जागरूता रैली उनकी स्मृति में निकाली गई है. विशेष बात यह है कि तारा हथिनी जिसमें सवार होकर उन्होंने कई वर्षांे तक भारत का भ्रमण किया था, वह हथिनी आज भी जीवित है. सुप्रसिद्ध पर्यावरण विद विलिन्डा राइट के कान्हा स्थित किपलिंग कंैप में यह हथिनी आज भी मौजूद है. 

इस आटो रैली के शुभारंभ अवसर पर मौजूद वाइल्ड लाइफ इन्स्टीट्यूट ऑफ इण्डिया के प्रमुख विवेक मैनन ने बताया कि हांथियों की तेजी से घट रही संख्या को देखते हुए असम के हांथियों को बचाने तथा उनके संरक्षण के लिए यह अनूठी यात्रा शुरू हुई है, जिसके माध्यम से फण्ड भी एकत्रित किया जायेगा. इस फण्ड का उपयोग हांथियों के संरक्षण में होगा. यह आटो रैली पन्ना से चलकर कल बांधवगढ़ पहुंचेगी तदुपरान्त कान्हा में 6 या 7 नवम्बर को इस रैली का समापन होगा. 

चार्टर्ड प्लेन से आये हैं यात्री 
आटो रैली में शामिल प्रतिभागी चार्टर्ड प्लेन से खजुराहो आये थे. वहां से बस द्वारा आज पन्ना के मोहननिवास कोठी पहुंचे. इनके लिए 45 आटो रिक्सा भोपाल से मंगाये गये थे, जिनमें सवार होकर विदेशी मेहमान कान्हा के लिए रवाना हुए. इनमें से कई प्रतिभागी ऐसे भी थे जो पहली बार आटो में सवार हुए, इसलिए उनका उत्साह देखते ही बन रहा था. 

चिकित्सा व सुरक्षा की है पूरी व्यवस्था 
आटो रैली में निकले विदेशी जोडों की सुरक्षा व चिकित्सा के खास इन्तजाम किये गये हैं. पूरी यात्रा में उनके निजी सुरक्षा गार्ड भी साथ - साथ चल रहे हैं. चूंकि यात्रा में कई प्रमुख हस्तियां व राजपरिवार के सदस्य शामिल हैं, इसलिए सभी जिलों के अधिकारियों को भी इस आटो रैली के संबंध में सूचना दे दी गई है. 

अरुण सिंह 
पन्ना, मध्य प्रदेश
भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

Nov 3, 2015

बाघ और जंगल बचेंगे तभी मानव बचेगा-सुश्री मेहदेले



मंत्री सुश्री कुसुम सिंह महदेले ने किया ’’ बाघों की वापसी’’ पुस्तक का विमोचन
बाघ पुर्नस्थापना की छठवीं वर्षगांठ पर होगा भव्य समारोह 
पन्ना, 2 नवम्बर 
पन्ना में बाघ पुर्नस्थापन परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। विश्व में अपने तरह की इस अनूठी परियोजना को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पन्ना टाईगर रिजर्व के तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर. श्रीनिवास मूर्ति ने अपने अनुभवों को हमारे बाघों की वापसी पुस्तक में संजोया है। प्रदेश के स्थापना दिवस पर इस पुस्तक का समारोहपूर्वक विमोचन सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले मंत्री पशुपालन, पीएचई, ग्रामोद्योग, मछली पालन, विधि एवं विधायी कार्य ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पन्ना टाईगर रिजर्व तथा यहां के बाघ पन्ना की पहचान हैं। बाघ और जंगल बचेंगे तभी मानव का जीवन बचेगा। बाघ पुर्नस्थापन योजना की सफलता ने पन्ना को विश्वभर में चर्चित कर दिया है। इसके अनुभवों से जुडी पुस्तक पन्ना में बाघ संरक्षण का ऐतिहासिक दस्तावेज है।

मंत्री सुश्री मेहदेले ने कहा कि बाघ पुर्नस्थापन परियोजना की सफलता किसी चमत्कार से कम नही है। आमजनता के सहयोग तथा वन विभाग के अधिकारियों तथा कर्मचारियों के अथक प्रयासों से यह संभव हुआ है। इसका श्रेय श्रीनिवास मूर्ति जी को है। उन्होंने कहा कि पन्ना टाईगर रिजर्व आमजनता के सहयोग से बाघ संरक्षण का कार्य कर रहा है। इसके आसपास के गांव में रोजगार के पर्याप्त अवसर सृजित करने का भी प्रयास करें। पन्ना में बाघ बढे-पर्यटन बढे तथा लोगों को भरपूर रोजगार मिले ऐसी कार्ययोजना बनाए। उन्होंने बाघ संरक्षण का विस्तृत दस्तावेज तैयार करने तथा जंगल बुक की तरह सीरियल अथवा फिल्म बनाने का सुझाव दिया।

समारोह में सीसीएफ आर. श्रीनिवास मूर्ति ने कहा कि बाघ पुर्नस्थापना की सफलता के फलस्वरूप आज पन्ना में 32 बाघ हैं। इसकी सफलता को पुस्तक के रूप में पियूष सेकसरिया तथा सुश्री विद्या ने संजोया है। इसके प्रकाशन में आ रही कठिनाईयों को सतना के तत्कालीन कलेक्टर तथा वर्तमान में संचालक कृषि मोहनलाल मीणा ने दूर कराया। उनकी पहल पर सतना की एक सीमेन्ट फैक्ट्री के सहयोग से पुस्तक का प्रकाशन किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में 16 अप्रैल को बाघ पुर्नस्थापना की 6वीं वर्षगांठ पर शानदार समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें देश ही नही विदेशों के भी प्रतिनिधि शामिल होंगे। तब तक बाघ संरक्षण एवं पन्ना की ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि में तैयार किए जा रहे ग्रंथ का पहला भाग प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने बाघ संरक्षण की सफलता में सहयोग देने के लिए जिले के राजनैतिक नेतृत्व, अधिकारियों, समाज सेवियों तथा आमजनता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने वन्य जीवों के शिकार पर आजीविका चलाने वाले पारधी समुदाय को अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल करने तथा इनके बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार की उचित सुविधा देने का अनुरोध किया।

समारोह में संचालक कृषि मोहनलाल मीणा ने कहा कि पन्ना टाईगर रिजर्व के आसपास के गांव के किसानों की फसलों को वन्य प्राणियों से सुरक्षा देने के लिए शीघ्र ही खेतों में चेनलिंक फेसिंग करायी जाएगी। इसके लिए किसानों को शत प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। समारोह में पूर्व सांसद लोकेन्द्र सिंह ने केन वेतवा लिंक परियोजना से घट रहे नेशनल पार्क के 80 वर्ग किलो मीटर के क्षेत्र की प्रतिपूर्ति का सुझाव दिया। समारोह में जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री ए.के. पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक आई.पी. अरजरिया, श्रीमती दिव्यारानी सिंह, सतानन्द गौतम, वन मण्डलाधिकारी संजय श्रीवास्तव तथा पत्रकार अरूण सिंह ने बाघ संरक्षण तथा पन्ना में बाघ पुर्नस्थापना की सफलता एवं पर्यटन विकास पर अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में पुस्तक के लेखक पियूष तथा विद्या ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष रविराज सिंह यादव, नगरपालिका अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा, सीजेएम बी.आर यादव, महारानी दिलहर कुमारी, पर्यावरण विद, समाज सेवी तथा वन विभाग के अधिकारी एवं नेचर केम्प से जुडे सैकडों विद्यार्थी उपस्थित रहे। 

अरुण सिंह 
पन्ना टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश, भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

Nov 1, 2015

जब धरती थर्राई.....


नेपाल में आये हालिया भूकंप की एक बानगी....

सर्वे   भवन्तु   सुखिन:   सर्वे   सन्तु  निरामया: 
           सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दु:ख भाग्भवेत् 

अर्थात सभी सुखी होंसभी निरोगी होंसभी को शुभ दर्शन हों और कोई दु:ख से ग्रसित न हो, ऐसी भावना के साथ आप सभी को उस त्रासदी की कुछ तस्वीरें दिखा रहा हूँ, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त युवा फोटोग्राफर सतपाल सिंह ने नेपाल में आये भूकंप की विनाश लीला को अपने कैमरे में कैद किया, उनकी इस साहसिक यात्रा की हम प्रशंसा करते हैं, क्योंकि दुनिया इस शाश्वत सत्य को समझे और यह भी महसूस करे की भूकंप जाति धर्म और देश की सीमाओं से परे है, मानवता ही नहीं सभी जीव जंतु इस भयंकर त्रासदी को झेलते हैं यहाँ तक की निर्जीव वस्तुएं भी अपना स्वरूप बदल देती हैं, ये तस्वीरें त्रासदी के इतने दिनों बाद साझा करने का सिर्फ एक ही मकसद है हमारा, की हम अपने अतीत से सीखें और धरती की इस तकलीफ को भी समझ सकें जिसे हम अपने कृत्यों से उत्पन्न करते हैं, मानवजनित कारण जैसे सुरंग परियोजनाएं, नदियों को बाँधना यानी पुलों का निर्माण, परमाणु विस्फोट और पानी के लिए जमीन में लगातार होते सुराग, ये सब वजहें तो हैं ही इससे इतर भी तमाम इंसानी गतिविधियाँ धरती को थर्राने पर मजबूर कर देती हैं, नतीजतन इंसानों के अलावा न जाने कितने बेक़सूर जीव जंतु मारे जाते हैं हमारी कथित विकास योजनाओं की बलि बेदी पर.....धरती के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का एक एहसास चाहिए सभी से, ताकि जो धरती हमारा घर है वह सुन्दर और सहज रहे..आमेन 
---सम्पादक 



















सतपाल सिंह ( ख्याति प्राप्त वन्य जीव फोटोग्राफर, कई राष्ट्रीय व् अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित,  लखीमपुर खीरी जनपद के मोहम्मदी तहसील में निवास, मौजूदा वक्त में दिल्ली में एक प्रतिष्ठित फोटोग्राफी संस्थान में अध्यापन, इनसे satpalsinghwlcn@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं)


विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था