International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Jul 18, 2010

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह

टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू: 
जब आप कंम्प्यूटर पर बैठते हैं और और इंटरनेट को खंगालते हैं तो आप ये बिल्कुल नहीं जान पाते कि ये वर्चुअल ट्रिप आपको वास्तविक जिंदगी में कहा ले जाएगी।

आप दुनियां भर के लोगों के साथ दोस्ती करते हैं, विचारों और जीवनमूल्यों का आदानप्रदान करते हैं...आप विभिन्न सांस्कृतिक मसलों पर बात करते हैं और नई-2 चीजों सीखते हैं। जहांतक मेरा सवाल है मैं सिर्फ वन्यजीवन के बारे में सीखने की कोशिश करता हूं खासकर बाघों के बारे में।

और संरक्षण के मुद्दे की वजह से... बाघ के मुद्दे की वजह से...मैं ऐसा करता हूं...क्योंकि मेरा मानना है कि बाघ मानवभक्षी नहीं है।
उत्तरप्रदेश में दुधवा के निकट खीरी के रहनेवाले मेरे दोस्त केके मिश्रा ने मुझे एक प्रख्यात बाघ संरक्षक और वन्यजीव प्रेमी के बारे में बताया...जिन्होंने सही अर्थों में इस मुद्दे को लेकर अपनी पूरी जिंदगी लगा दी। उन्होंने मुझे उनके(द्वार लिखित) किताबों के बारे में बताया और सबसे बड़ी बात ये कि वे अभी तक जिवीत है।

मुझे ये जानकर बड़ा ताज्जुब हुआ कि बाघों के बारे में शायद अन्य जीवों की तुलना में ज्यादा ही लिखा गया है। ( बिली साहब ने इसे लिखा)

 फिर मैंने सोचा कि मुझे इस इंसान से मिलना चाहिए। मैंने उन्हें ब्राजील से कुछ ग्रीटिंग्स भेजे और फिर मैं साल 2007 में दुधवा उनसे मिलने आया/आयी। लेकिन चुनाव का वक्त होने की वजह से मैं उनसे मिल नहीं पाई।  फिर मैं भीरा फार्म गई और मुझे उनके परिवार का हिस्सा बनने में कामयाबी मिल गई। इसमें भी के के मिश्रा के चाचा का अहम योगदान था...अब भीरा में मेरा एक परिवार भी था...

16 नवंबर 2009 की बात है। दिन के 4 बजे थे। दिपावली का वक्त था। हमें विली साहब से मिलने जाना था।  हम टाईगर हेवेन की तरफ जा रहे थे...बाईक से जाने में हमें 25 मिनट लगा...मैं अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पा रही थी...

टेबल के सामने एक इंसान बैठा था...उस टेबल पर कागजात, पांडुलिपियां और किताबें भरी हुई थी...पूरी तरह व्यवस्थित...जी हां..ये बिली साहब थे। वहीं बिली साहब जो किंवदंती बन चुके थे...सामान्य पाजामे में बैठा हुआ एक बुजुर्ग...उनके साथ उनके दो नौकर भी थे।
मैंने नमस्ते और सतश्रीअकाल के साथ उनका अभिवादन किया और कहा कि मेरा नाम मैरी(मारिया) है  और मैं ब्राजील से हूं। दूर देश में भी मैं आपके कामों की काफी बड़ी प्रशंसिका हूं और आपसे मिलने की बड़ी तम्मना थी। आपसे मुलाकात मेरे लिए वाकई एक सौभाग्य की बात है...क्या मैं कुछ देर आपसे बात कर सकती हूं....

वो मुस्कुराए। मैंने उन्हें वक्त देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने मेरे नमस्ते का जवाब दिया। वे कुछ लेने के लिए उठे....उन्होंने बेंत का सहारा लेना चाहा....मैंने उन्हे हाथ से सहारा दिया। उन्होंने कहा कि गर्मी बहुत है, क्या वे मेरे थर्मस से कुछ पानी ले सकते हैं....मैंने कहा-हां क्यों नहीं...
वो फिर मुस्कराए...उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं यहां क्या कर रही हूं...मेरा पेशा क्या है...और मैं यहां क्यों आई हूं...वे एक रिपोर्टर की तरह मुझसे सवाल कर रहे थे...
मैंने बताया कि मैं एक डा़क्टर हूं और एक सरकारी अस्पताल में काम कर रही हूं...इसके आलावा मैं एक एनिमल लवर भी हूं...मैं हिंदुस्तान घूमने आई हूं..खासकर यहां के जंगलों को देखने...और बाघों में मेरी खासी दिलचस्पी है...मैंने उन्हे बताया कि मेरे देश ब्राजील में भी भारत की तरह ही वन्यजीव के हालात बहुत खराब हैं...खासकर वन्यजीवों की तस्करी, पोचिंग...अफसरशाही...और भ्रष्टाचार...आमेजन घाटी में जगलों का भारी पैमाने पर विनाश किया गया है और अटलाटिंक क्षेत्र में भी यहीं हालत है... हमारा देश एक बड़ा देश है लेकिन बहुत कम लोग ऐसे हैं जो जमीनी स्तर पर काम करना चाहते हैं...उनके पास इच्छाशक्ति की कमी नहीं है...लेकिन इतना काफी नहीं...उनके पास सही दृष्टि की कमी है...
बिली साहब फिर मुस्कराए...मुझे उनकी मुस्कुराहट में एक जादूई एहसास सा हुआ...ओह..गॉड पूरी दुनिया एक ही तरह क्यों मुस्कराती है...! (मैंने पढ़ा था कि वन्यजीव संरक्षण में इस आदमी ने कितनी जद्दोजहद के साथ लड़ाई की है..और हमेशा जंगल विभाग के साथ मोर्चा लिया है।) मैं उनकी मुस्कराहाट से ये समझ सकती थी कि वे मेरे शब्दों को कैसे ले रहे हैं...
मैं जारी रही...मैने कहा कि इसके बावजूद कुछ सरकारी लोग इसके लिए लड़ाई जारी रखे हुए हैं...हलांकि वे कोई बड़ा काम नहीं कर पाते...लेकिन हम कुछ परिवर्तन तो देख ही सकते हैं...ब्राजील में हमारे पास बहुत जानवर नहीं बचे हैं...और बहुत सारे तो विलुप्तप्राय हो गए हैं...
फिर मैंने उनके हिंदुस्तान में बाघों के बारे में पूछा...कि वे इस मुद्दे को कैसे देखते हैं...वे कैसा महसूस करते हैं...मैंने उनके द्वारा लिखे एक वाक्य की ओर उनका ध्यान दिलाया जिसमें उन्होंने कहा था...कि समय नजदीक आता जा रहा है...क्योंकि प्रतीकों के रुप में बाघ हमारे बीच से जा रहे हैं...आनेवाले वक्तों में दूसरों की भी बारी आएगी....

वे बहुत खुश नहीं थे...उन्होंने कहा कि वे डिप्रेस्ड हो गए हैं...और निराश भी। उन्होंने कहा कि लोगों को ज्यादा से ज्यादा पढ़ना चाहिए...हलांकि वे बाघों के बारे में फिर भी निराशावादी ही लगे...उन्होंने अपने वक्त की बात की...अपने जीवन के बचेखुचे दिनों के बारे में चर्चा की...और कहा कि वे अपना सारा वक्त आजकल पढ़ाई लिखाई में ही लगा रहे हैं...वे अपनी जीवनी के छपने की प्रतीक्षा कर रहे थे जिसे उन्होंने हाल ही में लिखा था....और जो कुछ ही महीनों में रिलीज होनेवाला था...( ये अक्टूबर 2009 की बात है)...जयराज सिंह ने मुझे बतया कि कुछ महीनों में ये किताब दिल्ली और बांबे से लांच हो जाएगी...

अपने भतीजे जयराज सिंह को देखकर उनके आंखों में थोड़ी चमक आई...वे थोड़े उत्साहित लगे...जयराज सिंह ने टाईगर हेवैन प्रोजेक्ट के बारे में बताना शुरु किया...उनका कहना था कि यहां एक वाईल्ड लाईफ सेंटर बनेगा....( मुझे ये जोड़ने में खुशी हो रही है कि एक वेबसाईट का काम भी पूरा हो रहा है जो लगभग अंतिम चरण में है... tigerhavensociety.org.)

फिर मैंने पूछा कि क्या इस प्रोजेक्ट में उनके निजी अनुभवों को भी शामिल किया जाएगा...जिसमें एक तेंदुआ और एक बाघिन के मिलन से तारा का जन्म हुआ था...वन्यजीवों के इतिहास में शायद पहली बार...एक ऐसा जानवर जो जंगल में उनके घर उसी तरह रहता था जैसे एक इंसान...

वे मुस्कराए और कहा- नहीं....

उन्होंने फिर मुझसे पूछा कि मैं उनके बारे में और उनके काम के बारे में कैसे जानता हूं....मैने कहा....कि के के मिश्रा की वजह से मैं उन्हे जानती हूं...मिश्रा उन्हे अपने गुरु की तरह मानते हैं...और उन्होंने उनके बारे में काफी कुछ बताया है...बिली साहब ने बताया कि हां वे इस लड़के को जानते हैं और वो जानवरों से काफी प्यार करता है...

बिली साहब ने मानो फिर कुछ याद किया और कहा कि ये लड़का लखीमपुर से है न...मैंने कहां-हां....
फिर बिली साहब ने मुझे अपने लाईब्रेरी दिखाया और कहा कि मैं उसमें से एक किताब चुन लूं....मैंने उसमें से' The legend of the man eater "....चुन लिया...मैं महसूस कर रही थी कि बिली साहब काफी थके हुए लग रहे थे...दीपावली का समय था...मैंने उन्हे एक मोमबत्ती भेंट की...और दुआ की कि वे स्वस्थ और सानंद रहें...वे अपना बाकी वक्त सुकून के साथ बिताएं...90 साल की उमर में भी वे काफी मोहक व्यक्तित्व के स्वामी लग रहे थे...लेकिन उम्र का असर साफ दिखने लगा था...मैं एक गारियाट्रिक डॉक्टर भी हूं...मैं उन्हे इस उमर में ऐसा देखकर बहुत खुश हुई...हमारी बातचीत काफी अच्छी रही...उन्होंने मुझे वहां आने के लिए धन्यवाद दिया लेकिन फिर भी वे जिंदगी की बहुतेरी बातों पर चर्चा करते रहे...उन्होंने मुझे उनके नौकर से बात करने के लिए कहा जो लंग की किसी बीमारी से पीड़ित था...मैंने देखा कि उनका सेवक बड़ी तन्मयता के साथ उनकी सेवा कर रहा था...वो भला आदमी लगा...मैंने उनके साथ वो चंद लम्हे बड़े सुकून के साथ बिताए..मुझे लगा कि मैं उनसे कुछ ठिठोली भी कर सकती हूं...मैने उनसे पूछा कि क्या उन्हे किसी सक्रेटरी की जरुरत है...क्योंकि काफी पेपर वर्क और पत्राचार भी उन्हे करना होता है....उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा...कि हां उन्हे जरुरत तो है..मैंने हंसते हुए कहा कि मैं अगले साल आ जाऊंगी...! फिर मैंने कहा कि बिली साहब...मैं जरुर आऊंगी...! लेकिन दुर्भाग्यवश...मेरी पिछली यात्रा के बाद से मैं सिर्फ किताबों के माध्यम से ही उनके संपर्क में रही...और मैं समझती हूं कि हिंदुस्तान जैसे देश को इस इंसान का सदा के लिए आभारी होना चाहिए...उस दृष्टिकोण के लिए जो दुधवा नेशनल पार्क के रुप में उन्होंने इस मुल्क को दिया...मैं समझती हूं कि बिली साहब के लिए कोई भी मेडल इससे बड़ा तोहफा नहीं हो सकता ...थैंक यू बिली अर्जन सिंह....! (अनुवाद: सुशान्त झा)
 डॉ० मैरी मुलर (Marie Muller ) (लेखिका साओ-पालो ब्राजील में रहती हैं, पेशे से डॉक्टर, वन्य जीवन व विशेष कर भारतीय बाघों में दिलचस्पी।, पुर्तगाली, स्पैनिश, फ़्रैंच भाषाओं के अलावा कई देशों की संस्कृतियों की अदभुत जानकारी।  तमाम देशों की यात्रायें, इनके पिता नाज़ी जर्मनी में मिलेट्री अफ़सर,एडोल्फ़ हिटलर के नेतृत्व में द्वितीय विश्व युद्ध में बहादुर सैनिक की भूमिका, इन्हें स्वास्तिक चिन्ह वाला मैंडल जिसे एडोल्फ़ हिटलर ने  स्वयं प्रदत्त किया। लेखिका से muller2ster@gmail पर संपर्क कर सकते हैं।)

18 comments:

  1. thank u so much sushant ji for the excellent translation in english!!
    it was life time experience to me indeed,and sometimes words cannot explain.
    u have done so great ..thanks!!!
    and i wanna thank also dr jaswant kalair singh to make this interview possible!

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  2. excellent i wish i could meet him with u MARIA i missed it

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  3. thanx for saying us ur family maria i m so happy to read this

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  4. मारियाजी, धन्यवाद...दरअसल वन्यजीव के प्रति मेरा बहुत रुझान नहीं था...ये के के मिश्राजी की बदौलत ही थोड़ा बहुत संभव हुआ है। उन्होंने जब मुझे बिली साहब पर आपके संस्मरण के अनुवाद का आग्रह किया तो इसे मैंने अपना सौभाग्य समझा। अब थोड़ा बहुत मैं भी वन्यजीवों के बारे में पढ़ने लगा हूं। आपको एक बार फिर से धन्यवाद कि आपने अपना इतना बेहतरीन और अमूल्य संस्मरण हमलोगों से साझा किया।

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  5. kk bhai,bahut din ke baad dudhwalive per mere test ka koi lekh mila...bahut achcha laga....hame chahte hain ki dudhwalive tarkki kare....bibl sahab fir yaad aaye...hame lagta hai ki aap unhe bhulne nahi denge....aapka ka vivek

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  6. my point sharing this experience was
    to promote billy arjan singh s work !!!!!

    we must never forget what he have done for tigers in India!!!!

    make people more interested and READ HIS BOOKS

    that are:

    -tiger haven
    -tara , a tigress
    -prince of cats
    -Eelie and the big cats
    -the legend of maneater
    -tiger! tiger!

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  7. It is always nice to promote a good work done anywhere.It is a great job, KKM jee.kudos to you.

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  8. Dear Maria, You have excellent writing skill. It makes you good biographer.....! You have ability to observe human psycho & humanity ...which express in you sentence... he smiled..(i dont know if was a smile like,,oh god all world is the same...yea i think it was this kind of smile...)

    Thanks for memorable contribution to dudhwalive

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  9. thank u kk mishra ji..and all ...

    comments make me very happy..it was a angel..on earth..name "billy"...

    now i know ure going not goood times in dudhwa...because monsoon..some villages are bad situation..and i know that "billy" also worked on that ,,in past times...

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  10. now im going on a research
    nepal rivers
    what s going on
    that results in bad monsoon in dudhwa

    maybe theres a connection
    ill try to find out ..


    u. .. dudhwalive readers ....
    do u know something about this ....

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  11. é muito bom saber que tem gente como você que visita um pais diferente do nosso e que faz um artigo como esse,assim pode mostrar um pouco da cultura da india para os brasileiros que não conhece ou ainda não teve oportunidade de visitar a india.

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  12. congratulations dear beautiful interview. your lucky, pretty cool its initiative

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  13. mishra ji
    theres some movement to change dudhwa tiger reserves name na...

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  14. yea ..brazilian friends are posting comments..thank u dear brazilian friends!!
    and new indian friends also!
    its about BILLY ARJAN SINGH
    a great man..he had a idea and make happen!!!

    im so happy to say that i can help telling them
    that india is not only about taj mahal!!!!
    or ravi shankar...
    .or criket.
    or colourful bags..spices...incense stiks.....hahah
    great men....
    also wanna say happy independence day...
    independence its a state of mind and heart...

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  15. hi Marie,it incredible,you know better then me,you already visit all state,my country people crazy for money, corruption,and religion,people never get free from this things then how they can think about country,nature, they never think like you,and my u.p state is a back word aria,goverment never take-care, illiterate people, Maoist mostly make bad think for animal,,but anyway i am also from up,, ,my grand father Sardar Inder singh (vaslipur,grant nomber 2)he die already 10 year ago ,may be arjun singh know him,he help a lot to poor peoples and animal,thank you very much to help dudhwa and best of luck,may be i also with you in this mission,namste to all people who think for nature-for india-for nature property,

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  16. यह ज़िंदगी भी बड़ी अजीब चीज़ है। इंटरनेट के माध्यम से गतवर्ष मै डॉ. मेरी मूलर के संपर्क मे आया। मुद्दा एक ही था Tiger Conservation॰ वह मेरे विचारों से काफी प्रभावित हूई और हमारी मित्रता हो गई। इनेटर्नेट और फेस्बूक के माध्यम से हम बातचीत करते रहे। पिछले अक्टूबर 2011 मे मेरा ब्राज़ील जाना हुआ और हमारी मुलाकात साओ पालो यूनिवरसिटि मे हूई। उनहूने वादा किया के अगली बार जब वो भारत आएँगी तो मेरी मेहमान रहेंगी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कैंसर से साहसपूर्वक लड़ते वह 23 फरवरी 2012 को यह संसार छोड़ गईं। बह निश्चित ही एक पवित्र आत्मा थीं। उनको मेरी हार्दिक श्रद्दांजली। बातें और भी हैं, फिर कभी ॥ तारिक बदर, नई दिल्ली

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  17. A nice chit chat between Bill and Marry Muller....

    It becomes A Nice message for us...
    Billy You are a great man dear...

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विविधा

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