डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Weaver Ants

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Mar 1, 2015

उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी सारस की रहस्यमयी मौतें


मैलानी के निकट एक गाँव में एक दर्जन से अधिक सारस मृत पाये गए 

अन्य स्थानीय व् प्रवासी पक्षियों की भी हुई मौत 

अप्रमाणित व् नकली जहरीले  कीट-नाशक  हो सकते है  मौत की वजह 


मैलानी से मनोज शर्मा की रिपोर्ट 

मैलानी-खीरी: मैलानी से कुछ दूर स्थित नारायणपुर गाँव के तालाब में जहर से १७ सारस और सैकड़ो परिंदों की मौत २७ जनवरी २०१५ को हो गयी, जाहिर है सारस उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी है,  और वर्तमान में इसकी तादाद कृषि के बदलते स्वरूप, पेस्टीसाइड के अंधाधुंध इस्तेमाल, और शिकार के चलते काफी घटी है,  गौरतलब है की एक माह पूर्व घटी यह घटना जिसमे देशी विदेशी पक्षियों की मौत इतनी तादाद में हो गयी और वन विभाग व् ग्रामीण चुप रहे, इन मृत पक्षियों के मृत शरीरों को चुपचाप ठिकाने लगाने के भी प्रयास किए गए, 


सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी है की इन पक्षियों के मृत शरीर एक जगह गढ्ढे में दबाये गए, जो व्यक्ति तस्वीर में दिख रहा है, उसे वन विभाग का वॉचर बताया जा रहा है, एक तरफ भारत सरकार, और अंतर्राष्ट्रीय संस्थान पक्षियों को बचाने और उनके आवासों को सुरक्षित रखने में करोड़ों रुपये खर्च कर रहे है, तो दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं घट रही है, और इन्हे छुपाने की कोशिश की जा रही है.

उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी की इतनी संख्या में मौत के कारणों की जांच सुनिश्चित होना जरूरी है, ताकि यह पता लगाया जा सके की किस प्रकार के जहर से उनकी मौत हुई, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए की जनपद में पेस्टीसाइड की दुकानों पर कौन से ऐसे जहर है जो इस विशाल पक्षी की भी मौत का कारण बन सकते है, नकली व् अप्रमाणित कीटनाशकों का जनपद में जो धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है वह कीट पतंगों पशु पक्षियों के अलावा मानव के लिए भी बहुत हानिकारक हो सकता है.



ग्रामीण भी इतनी संख्या में मृत परिंदों के कारण सहमे हुए है और जिम्मेदार विभाग ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है.

सारस राज्य पक्षी होने के अतिरिक्त रेड डाटा बुक में वल्नरेबल श्रेणी में रखा गया है, भारतीय पक्षी वैज्ञानिक और सरकार इसके सरंक्षण पर जोर देते आ रहे है.



मनोज शर्मा (पत्रकार) 
मैलानी-खीरी 
9839393921                                                                                                                                        

Feb 28, 2015

भाषागिरी ने ईज़ाद किया शुद्ध हिन्दी लिखने का आसान तरीका


www.bhashagiri.com






हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा और भारत की मातृभाषा होते हुए भी कंप्यूटर तकनीकी Computer Technology) में अपना स्थान बनाने के लिये संघर्षरत है, बड़ी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां भी अब हिन्दी के लिये सुविधाएं प्रदान कर रही है । जिससे सामान्य जन के लिये कंप्यूटर पर हिन्दी में काम करना आसान हुआ है । मगर हिन्दी लिखते समय होने वाली वर्तनी (स्पेलिंग) अशुद्धियां अभी भी एक बड़ी समस्या है । इसका आसान और सुलभ तकनीकी समाधान ना होने के कारण अशुद्ध हिन्दी काफी प्रचलन में आ गयी हैं । कई गलत शब्द इतने प्रयोग में आ गये हैं कि युवा पीढ़ी उन्हें ही सही समझने लगी हैं ।

पूरा लेख मेन्युअली पढ़कर वर्तनी अशुद्धियां सुधारने में काफी समय बर्बाद होता है। इन्हीं सब समस्याओं का सामना करना पड़ा बेंगलोर में रहने वाले अर्पित और श्वेता पालीवाल को जब वो एक आध्यात्मिक हिन्दी मासिक पत्रिका के डिजिटिलाइजेशन प्रोजेक्ट में अपना समयदान कर रहे थे । यहीं से शुरूआत हुई भाषागिरी की । हिन्दी भाषा पर काफी शोध करने के बाद एक विशेष तकनीक ईजाद की और Spell Guru सॉफ्टवेयर बनाया । इस नयी तकनीक के लिये उन्होंने पेटेंट भी फाइल किया है । इस सॉफ्टवेयर में आप आसानी से हिन्दी लिख सकते है । गलत शब्द लिखते ही यह आपको सूचित कर देगा और शब्द की वर्तनी सुधारने के लिए सुझाव भी देगा । यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित हिन्दी मानकीकरण पर आधारित है । Spell Guru इस प्रकार का पहला सॉफ्टवेयर है जो मंगल, कृतिदेव और चाणक्य फाॅण्ट में काम करता है । भाषागिरी शीघ्र ही नया सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध कराने वाली है जो कि सीधे MS Word में काम करेगा ।

श्वेता 
भाषागिरी 
support@bhashagiri.com

अन्य जानकारी के लिये देखे www.bhashagiri.com

वन्य जीवन व् पर्यावरण  पर आधारित दुनिया की पहली दुधवा लाइव  डिजिटल मैगज़ीन  की ज़ानिब से  हिन्दी  लिखने के लिए किये गए इस  सुन्दर कार्य  के लिए भाषागिरी  के आविष्कारकों  को शुभकामनाएं। . 

दुधवा लाइव डेस्क 

Feb 21, 2015

लखीमपुर खीरी में तोतों की खरीद फ़रोख्त...





कभी खीरी जिला मशहूर था तोतों की भारी तादाद में 

बाग़ बगीचों के कटान और फसलों में आई तब्दीली ने संकट उत्पन्न किया इस प्रजाति पर 



हमारे आस-पास आमतौर पर दिखने वाले तोतों में रोज रिंग्ड पेराकीट आसानी से मिल जाता था । यहाँ तक कि हर सुबह-शाम ये आस-पास के पेडों पर शोर मचाते, मस्ती करते दिख जाते थे। तोता पक्षियों के सिटैसी (Psittaci) गण के सिटैसिडी (Psittacidae) कुल का पक्षी है, जो गरम देशों का निवासी है। तोता! इसका प्रचलित नाम है लेकिन इसका अंग्रेजी नाम रोज रिंग्ड पेराकीट है और वैज्ञानिक नाम सिटाक्यूला क्रेमरी है। 



आज अधाधुंध वनो की कटाई और इनके घटते शरण स्थलों की कमी के चलते इनकी संख्या प्रभावित हुई है .....कई हफ्तों से लखीमपुर खीरी शहर इन बेजुबानों की खरीद फरोख्त का गढ़ बनता चला जा रहा है .....शहर की मुख्य रेलवे क्रासिंग पर उपर्गामी सेतु के नीचे और बाजपेयी कालोनी का मुख्य द्वार इसका प्रमुख अड्डा बन चुका है सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि बाजपेयी कालोनी का यह खरीद फरोख्त स्थल नगर पालिका परिषद से महज चंद क़दमों की दूरी पर है 

.......समझ नहीं आता की शहर के वन्य जीव प्रमियों/ वन्य जीव संरक्षकों/ दुधवा नेशनल पार्क के अधिकारियों को यह दिखता नहीं या अधिकारीगण अपने कार्य को सिर्फ कागजों पर ही अंजाम देते है .......साथ ही मुझे लगता है की आपने आप को शहर के वन्य जीव प्रमी / वन्य जीव संरक्षक कहलाने वाले गणमान्य व्यक्ति सिर्फ सस्ती लोकप्रियता बटोरने के कारण ही इस मुहीम से जुड़ने का दम भरते है वास्तविकता से दूर दूर तक इनका कोई सम्बन्ध नहीं है !!!


अमित वर्मा 
https://www.facebook.com/avermaaa

Feb 20, 2015

गौरैया की घर वापसी- दुधवा लाइव का एक अभियान



पांच वर्षों से गौरैया सरंक्षण की लगातार मुहिम

दुधवा लाइव के द्वारा मनाए गए गौरैया दिवस व् गौरैया वर्ष 

पक्षी सरंक्षण में भारत की तराई से खीरी जनपद सबसे अग्रणी 

सन २०१० में दुधवा लाइव द्वारा शुरू किए गए गौरैया बचाओ अभियान ने तराई जनपदों के अतिरिक्त पूरे भारत व् दुनिया में अपना जागरूकता सन्देश पहुंचाया, विगत पांच वर्षों के सतत प्रयासों ने मानव सवेंद्नाओं को प्रभावित किया पशु पक्षियों के सरंक्षण के लिये, नतीजतन अब खीरी जनपद में ही नहीं अन्य जगहों में गौरैया की संख्या में इजाफा हुआ है, इस वर्ष मार्च में गौरैया दिवस के साथ गौरैया सरंक्षण की मुहिम दुधवा लाइव द्वारा फिर शुरू की जा रही है, जिसमे जनपद की वन्य जीवन से जुड़ी संस्थाओं व् लोगों से साथ आने की अपील है की विगत पांच वर्षों में जिस तरह खीरी जनपद के लोगों ने हमारे इस अभियान को पूरी दुनिया में पहुंचाने में मदद की है इस  बार भी यह सन्देश दूर दूर तक जाए और हमारे घरों का यह खूबसूरत चिड़िया फिर से घर वापसी कर सके.

दुधवा लाइव द्वारा गौरैया वर्ष एवं गौरैया दिवस की जो शुरूवात की गयी उसने पक्षियों के सरंक्षण में अभूतपूर्व योगदान मिला, लोग घरों में इस चिड़िया के लिए पानी दाना रखते है और संवेदनाएं भी.

सन २०१५ की इस शुरूवात में जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार व् उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित दुधवा लाइव प्रोजेक्ट ने जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में गौरैया सरंक्षण के लिए लोगों के साथ बैठके प्रारम्भ कर दी है, आज मोहम्मदी तहसील के बेलहा फ़ार्म में वन्य जीव प्रेमियों व् समाज के विभिन्न वर्गों के साथ दुधवा लाइव के संस्थापक ने एक बैठक का आयोजन किया जिसमे मोहम्मद रईस अहमद सतपाल सिंह, तारिक, विक्रम तिवारी, पुष्पेन्द्र वर्मा, शौकत अली, ने भाग लिया, और मोहम्मदी तहसील में गौरैया बचाओ अभियान की रूपरेखा तैयार की गयी.

आने वाले समय में जिले भर में ये गोष्ठियां आयोजित की जायेंगी और गौरैया की घर वापसी के वो सारे प्रयास किए जायेंगे ताकि हमारे घरों के पारिस्थितिकी तंत्र  का यह टाइगर जो हमारे घरों के आसपास की जैव विविधता के स्वस्थ्य होने का संकेत है को दुबारा बुलाया जा सके अपने गाँव व् घरों में (कृष्ण कुमार मिश्र, संस्थापक दुधवा लाइव)

दुधवा लाइव कराएगा पक्षियों की गणना

दुधवा लाइव इस बार मोहम्मदी बर्ड काउंट के सह-आयोजक के तौर पर गोमती नदी के किनारों पर मौजूद जैव विविधता का अध्ययन कराएगा, नदियों के प्रदूषण व् नदियों के किनारों पर हो रहे अतिक्रमण के कारणों का अध्ययन होगा ताकि भविष्य में खीरी की नदियों और उनमे मौजूद जलीय जैव विवधिता का सरंक्षण किया जा सके.

दुधवा लाइव डेस्क 

Feb 19, 2015

मध्य भारत के बचे हुए साल फारेस्ट को बचाने की मुहिम में प्रिया पिल्लई

प्रिया पिल्लई ने सरकार के प्रतिबंध प्रस्ताव की निंदा की
कोर्ट कल तक के लिये स्थगित किया गया

नई दिल्ली। 18 फरवरी 2015। ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई ने आज सरकार के'प्रतिबंधप्रस्ताव को नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर एक कलंक करार दिया। सरकार ने पेशकश की थी कि प्रिया यात्रा करने के लिये स्वतंत्र है यदि वो एक शपथ पत्र प्रस्तुत करे कि वह विदेशों में इस तरह की प्रस्तुतियां नहीं करेगी। प्रिया ने कहा, मैं ऐसे किसी भी प्रतिबंध प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करुंगी। मैं अपनेमौलिक अधिकारों के तहत काम कर रही थी और यह मेरे ही नहीं बल्कि देश के हरनागरिक  के अधिकार के बारे में है दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई के दौरान उपस्थित प्रिया ने कहा, यदि मैं इस प्रस्ताव को स्वीकार करती हूं कि सरकार मुझे बतायेगी कि मैं क्या बोल सकती हूं और क्या नहीं बोल सकती तो इसका मतलब होगाअभिव्यक्ति की आजादी को खो देना जो मुझे एक भारतीय नागरिक के बतौर मिला है।इसलिए मैं इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकती


.प्रिया ने आगे कहा, मेरे खिलाफ सरकार का तथाकथित केस खतरनाक है। इसमें कहा गया है कि ब्रिटिश पंजीकृत कंपनी द्वारा सिंगरौली में किये जा रहे गतिविधियों को ब्रिटिश सासंदों को बताना राष्ट्रीय हित के खिलाफ है। महान, सिंगरौली, मध्यप्रदेश में भारतीय कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। ऐसे में एक कोयला खदान को फायदा पहुंचाने के लिये हजारों लोगों के हित को खतरे में डालने के खिलाफ जागरुकता पैदा करना राष्ट्रीय हित के खिलाफ कैसे हो गया? मुझे भारतीय होने पर गर्व है और मैं चुप नहीं रह सकती।

कोर्ट में प्रिया पिल्लई की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा, मैं सरकार के हित को राष्ट्र के हितों के साथ मिलाने को लेकर चकित हूं। मैं मानती हूं कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकार से इंकार करना है। मैं अपने मुवक्किल को एएसजी के  उस सुझाव से सहमत होने की सलाह नहीं दूंगी जिसमें उसे एक शपथ पत्र देने को कहा गया है कि वो विदेश जाकर अपनी बात नहीं रखेगी तभी उसे यात्रा करने की स्वतंत्रता दी जाएगी। यह सेंसरशिप नहीं, पूर्व सेंसरशिप है

अविनाश कुमार 
ग्रीनपीस भारत 
avinash.kumar@greenpeace.org

Feb 18, 2015

आसमान के बादशाह गिद्धों की संख्या में हो रही वृद्धि



पन्ना टाइगर रिजर्व बना इन पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना 
गणना में नौ प्रजाति के 1676 गिद्ध पाये गये 
पन्ना, मध्य प्रदेश, विलुप्त होने की कगार में पहुंच चुके आसमान के बादशाह कहे जाने वाले मांसाहारी पक्षी गिद्धों की संया पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगल में तेजी से बढ़ रही है. यहां की प्राकृतिक आबोहवा व अनुकूल रहवास स्थानीय गिद्धों के अलावा प्रवासी गिद्धों को भी रास आ रही है. आकाश में ऊंची उड़ाने भरते गिद्ध यहां सहज ही नजर आते हैं, जो पर्यावरण व पक्षी प्रेमियों के लिए एक सुखद समाचार है. पन्ना टाइगर रिजर्व में 5 से 8 फरवरी तक हुई गिद्धों की गणना में विभिन्न प्रजाति के कुल 1676 गिद्ध पाये गये हैं जो बीते वर्ष हुई गणना 910 की तुलना में काफी अधिक है. 

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व आर.श्रीनिवास मूर्ति ने जानकारी देते हुए आज बताया कि इस वर्ष हुई गिद्ध गणना में एस.ओ.पी. तकनीक का उपयोग किया गया है, जबकि इसके पूर्व वर्ष 2011 से 2014 तक पी.पी.पी. पद्धति से गिद्धों की गणना की जाती रही है. श्री मूर्ति ने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व के 28 गिद्ध गणना स्थलों में 12 राज्यों के 68 प्रतिभागियों सहित 12 स्थानीय गाइडों ने गिद्धों की गणना में सहभागिता निभाई. प्रतिभागियों द्वारा एकत्रित की गई जानकारी की विश्वसनीयता को कायम रखने के लिए मौके पर जी.पी.एस. का अभिलेखन भी किया गया. गणना की इस प्रक्रिया में टेलिस्कोप का भी उपयोग हुआ है. गिद्धों की संया के साथ - साथ गिद्धों के घोसलों की भी गिनती एस.ओ.पी. के माध्यम से बेहतर संभव हो सकी है. इस पूरी प्रक्रिया को विकसित करने में हैदराबाद के अरूण वासि रेड्डी एवं कीर्ति कुमार अनुमूला व उनके सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. 

गिद्धों की हुई गणना के आंकडों से स्पष्ट होता है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में लांग विल्ड वल्चर की संया उत्साह जनक रूप से बढ़ी है. इनकी संया 1191 पाई गई है तथा लांग विल्ड वल्चर के 398 जीवित घोसले भी पाये गये हैं जो एक शुभ संकेत है. गणना में व्हाइट बैक्ड वल्चर 45, इजिप्सियन वल्चर 12 तथा रेड हेडेड वल्चर 20 पाये गये हैं. प्रवासी गिद्धों में यूरेसियन ग्रिफन वल्चर 139, हिमालयन ग्रिफन 144 तथा सेनरस वल्चर की संया 1 पाई गई है. गणना में जिन गिद्धों की पहचान नहीं की जा सकी है उनकी संया 124 है. आंकड़ों में व्हाइट बैक्ड वल्चरों की संख्या विगत वर्षां की तुलना में कम है जो चिंता की बात है. इस वर्ष इनकी संया 45 आंकी गई है, जबकि 2013 में 146 तथा 2014 में 54 थी. बताया गया है कि व्हाइट बैक्ड वल्चर के घोसले फरवरी के बाद बनाये जाते हैं, अत: इनके बारे में अलग से अध्ययन करने की योजना है. पन्ना टाइगर रिजर्व में सपन्न हुई इस वर्ष की गणना में 1260 से अधिक स्थानीय गिद्ध एवं 260 से अधिक प्रवासी गिद्ध चिन्हित किये गये हैं. उल्लेखनीय बात यह है कि इस वर्ष भी 18 की संख्या में पेरीग्रीन फलकन पिक पाये गये हैं. 

सबसे तेज रफ़्तार पक्षी पेरीग्रीन फलकन भी मिले 
पन्ना टाइगर रिजर्व में चार दिनों तक चली गिद्धों की गणना के दौरान दुनिया के सबसे तेज रफ़्तार पक्षी पेरीग्रीन फलकन पिक भी पाये गये हैं. इन मांसाहारी पक्षियों की संया यहां पर 18 है जो निश्चित ही उल्लेखनीय और आश्चयजनक बात है. उप संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व अनुपम सहाय इस अनूठे पक्षी के बारे में बताया कि पेरीग्रीन फलकन पिक 320 किमी. प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ान भरता है जो दुनिया के तेज रफ़्तार पक्षियों में सबसे ज्यादा है. इस पक्षी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उड़ान भरते हुए जीवित पक्षियों को ही पकड़कर खाता है. यह पक्षी चिडिय़ों का शिकार करके जिन्दा रहता है. श्री सहाय ने बताया कि इस बार पन्ना टाइगर रिजर्व के अलावा पवई में भी गिद्धों की गणना कराई गई जहां विभिन्न प्रजाति के 235 गिद्ध पाये गये हैं. 


अरुण सिंह 
पन्ना, मध्य प्रदेश भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग: