"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Aug 1, 2010

दुधवा में शिकार बदस्तूर जारी है!

गंगेश उपाध्याय* दुधवा टाइगर रिजर्व बना शिकारियों का अड्डा:

Jul 31, 2010

किशनपुर वन्य जीव विहार में एक तेन्दुए के शिकार की कोशिश!

दुधवा लाइव डेस्क* दुधवा टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत किशनपुर वन्य जीव विहार में शिकारियों ने एक तेन्दुए का शिकार करने की कोशिश की, किशनपुर रेन्ज के निकट गन्ने के खेत में लगभग तीन वर्ष का नर तेन्दुआ शिकारियों द्वारा लगाये गये खुड़के में फंसा पाया गया। 

सूत्रों के हवाले से पता चला, कि इस बात की सूचना वन-विभाग  को ग्रामीणों द्वारा पहुंचाई गयी, जब उन्हें खुड़का (आइरन क्लैम्प) में फ़ंसे तेन्दुए की  चीख सुनाई दी।, तब दुधवा प्रशासन हरकत में आया। दुधवा टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक संजय पाठक, किशन्पुर रेन्ज व भीरा रेन्ज के रेन्जर्स सहित वन-विभाग का अमला घटना स्थल पर पहुंचा, जहाँ वाइल्ड लाइफ़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया के डा० मुस्ताक ने तेन्दुए को ट्रन्कुलाइज़ किया। फ़िलहाल तेन्दुए को पिजड़े में कैद कर दुधवा नेशनल पार्क लाया गया है, जहां उसके इलाज का इन्तजाम किया जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेन्दुए का पंजा आइरन जा(खड़का) में फ़से रहने से उसका अगला बायां पैर बुरी तरह से घायल हो चुका है, यदि ग्रामीणों को इसकी खबर न चलती तो तेन्दुए का बचना मुश्किल होता!
इन दिनों बारिश की वजह से दुधवा टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए बन्द किया गया है, और मानसून गस्त आदि की कवायदें जारी है, बावजूद इसके वन्य-प्राणियों का शिकार बदस्तूर जारी है! यह पहली घटना नही है, किशनपुर वन्य-जीव विहार में पिछले कुछ वर्षों में बाघ व तेन्दुए के शिकार के मामले प्रकाश में आये,जहाँ खीरी जनपद में तेन्दुओं की बहुतायात थी वही अब खीरी जनपद में स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में मात्र सात तेन्दुए बचे हुए हैं(वन्य-जीव गणना के अनुसार)।  जिसमें दो वर्ष पूर्व दो तेन्दुए के बच्चे जंगल में पाये गये, उनकी माँ का इन्तजार करने के बाद प्रशासन ने उन्हे लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया जो बड़े हो चुके है और शारदा व सुहेली (दुधवा वन क्षेत्र में पड़ने वाली नदियों के नाम हैं) के नाम से जाने जाते है।
तेन्दुओं की इतनी कम सख्या इस विशाल आरक्षित वन क्षेत्र में चिन्ताजनक है, क्योंकि सन १९८८ से यहां टाइगर प्रोजेक्ट के तहत इन जीवों को सरंक्षण प्राप्त है।
किशनपुर वन्य जीव विहार के अन्दर  व आस-पास तमाम गाँवों के चलते वन्य-जीवों व उनके आवासों पर भारी दबाव है, लेकिन वोट और गोट की राजिनीति में इन गाँवों को विस्थापित नही किया जा रहा है, बावजूद इसके कि तमाम गांवों के लोग इस जगह की दुरूहता से आजिज है, और वह कहीं और बसना चाहते है, बशर्ते सरकार उनकी बुनियादी जरूरतों को देखते हुए उचित मुआबजा दे।
यदि जल्द ही शिकार पर अंकुश न लगा तो तेन्दुआ दुधवा टाइगर रिजर्व समेत पूरे खीरी जनपद में विलुप्त हो जायेगा!

Jul 30, 2010

नही रहा सुमित!

सुमित हा्थी और महावत
दुधवा लाइव डेस्क* नही रहा सुमित! हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ

Jul 25, 2010

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!

Photo Courtesy: outlookindia.com
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

Jul 24, 2010

हम दूसरों के कदमों पर कदम रखना कब छोड़ेगें!

Photo.1 footprints
धरती के सीने पर अरबों मानव पद चिन्ह:

Jul 23, 2010

इस लड़ाई का सिला भुगत रहे हैं-वन और वन्य जीव!

जवान
कथित वर्ग संघर्ष और महात्वाकांक्षाओं ने वनों और वन्य-जीवों को दरकिनार किया:

Jul 22, 2010

सब कुछ बदल देगी ये नव-मानवता!

मानवता के जमींदोज होते ही सब खत्म हो जायेगा:गिद्ध तो मात्र एक उदाहरण हैं!

आसमानी बादशाहों का नष्ट होता वंश!

अम्बर के बादशाहों की बादशाहियत खतरे में
हम बात कर रहे हैं, गिद्धों की जो आसमान के फ़लक

Jul 18, 2010

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह

टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू: 

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विविधा

हमारे बारे में
दुधवा लाइव पत्रिका का सृजन उन कारणों की परिणित है, जिन्हे सरकारें व समाज़ के जिम्मेदार लोग नज़र्-ए-अन्दाज करते है। हम अपनी राष्ट्रीय प्राकृतिक संपदा के संरक्षण व संवर्धन की इस मुहिम में आप सभी को आमंत्रित करते है, जो अपने चारों तरफ़ की उन सभी गतिविधियों को देखते है, और विचार भी करते है।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
जहाँ होती है पक्षियों की पूजा
कृष्ण कुमार मिश्र* ये भी करते हैं अपने दुख-सुख की अभिव्यक्ति: जरा नज़रिया बदल कर तो देखिये। लखीमपुर-खीरी, (उत्तर प्रदेश) के एक गाँव कोठिया में गिद्धों के जोड़े की पूजा-अर्चना की जाती हैं।
कुछ इस तरह नष्ट किये जा रहे हैं गिद्धों के आवास
आदित्य रॉय* अहमदाबाद में आखिर क्या है, गिद्धों का भविष्य: आई आई एम के नज़दीक मौजूद नीम-चमेली (Indian Cork: Millingtonia hortensis) के वृक्ष, जो गिद्धों के आवास हैं।

विशेष

दुधवा टाइगर रिजर्व
* दुधवा लाइव डेस्क दुधवा टाइगर रिजर्व भारत का एक राज्य जो नेपाल की सरहदों को छूता है,
एक विलुप्त हो रही प्रजाति को बचाने की मुहमि
डा० प्रमोद पाटिल *ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का आवास प्रबंधन:- "ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सेंक्चुरी,
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड
कृष्ण कुमार मिश्र* अंग्रेजों से हमारे लोगों ने तमाम तरह की विद्यायें सीख लीं

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

खीरी में हुआ बाघ का शिकार शव बरामद
* देवेन्द्र प्रकाश मिश्र, पलियाकलां-खीरी। नार्थ-खीरी फारेस्ट डिवीजन की पलिया रेंज के परसपुर के जंगल में 05 जनवरी, 2010 को एक और बाघ (टाइगर) अकाल मौत के आगोश में चला गया।

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

खासखबर

दुधवा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना पर विशेष
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* दुधवा का स्वर्णकाल अब बनकर रह गया यादगार- दुधवा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना दो फरवरी सन् 1977 में वन प्रबन्धन, वन्यजीवों के संरक्षण व संवर्द्धन के लिये की गई थी। इसके लिये बताए गए नियम तथा कानून यथार्थ में खरे नही उतर रहें हैं।

खीरी जनपद में तेंदुआ की खाल एंव हड्डियां बरामद
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पलियाकला-खीरी । सम्पूर्णानगर थाना पुलिस ने गुलदार की एक खाल बरामद करके चार अभियुक्तियों को गिरफतार किया है।

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह का निधन हुआ। इन्हों ने अपना पूरा जीवन जंगल में अकेले रहकर बाघों और उनके आवासों की सुरक्षा में लगाया।

ब्लॉग

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
जीनेश जैन* जल के लिए जंग, विश्व युद्ध के दौरान ईरान, इराक और इटली में सैनिक सेवाएं दे चुके नाथू बा उर्फ त्यागीजी मारवाड़ की धोरां धरती मे जल के लिए जंग लड़ रहे हैं।

दुधवा में मिली अदभुत व अनजानी वनस्पति
दुधवा टाइगर रिजर्व में एक अनजानी वनस्पति! - Calatropis acia- कृष्ण कुमार मिश्र*

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

दुधवा टाइगर रिजर्व में संकटग्रस्त प्रजाति की माँ ने दिया शिशु को जन्म
डेस्क* दुधवा टाइगर रिजर्व में "गैंडा प्रोजेक्ट क्षेत्र" दक्षिण सोनारी पुर में एक गैंडा माँ ने शिशु को जन्म दिया

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में, इस सन्दर्भ में पंडित जवाहर लाल नेहरू का एक कथन प्रासंगिक है "चिडियों को दूर से देख लेना और आनंद का अनुभव करना ही काफ़ी नही है।

इस्लाम में वृक्षों तथा जीवों का महत्व
मशहूद हुसैन सिद्दीकी* हज़रत अनस रज़ी अल्लाह अनूह से रवायत। मोहम्मद साहब से सुनी बातें जो कही गयी हैं, कि अल्लाह के रसूल मोहम्मद ने फ़रमाया