मेरी धरती मेरी माँ

मेरी धरती मेरी माँ

इस जिन्दा खूबसूरती को नष्ट न करे..तस्वीर पर क्लिक करे

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Apr 23, 2014

गंगा

Photo Courtesy: The UnReal Times



गंगा तुम क्या हो?

मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी

कैसी कथा हो...

जो चिरकाल से

हमें पाल रही हो?


माई, तुम्हें नहीं पता

कौन आर्य है, कौन द्रविड़,

कौन बौद्ध है, कौन मुसलमाँ,

कौन सिक्ख है, कौन जैन,

पारसी या ईसाई भी तुम्हें नहीं पता............


शांत, अविचल, धवल,

श्वेत चन्द्र रेखा सी...

अनवरत सभ्यताओं को जन्म देती

माई तुम कौन हो?

कितने इतिहास समेटे हो?


सुना है,,,

यहाँ के जंगली, धर्महीन साधु

तुम्हें माँ कहते थे........

तुम्हारे पानी को अमृत समझते थे.........

कहते थे तुममें सारे पाप धुल जाते हैं......

संसार की सबसे विस्तृत जैव श्रंखला

की तुम पोषक थीं......

योगी शिव ने तो तुम्हें सर्वोच्च शिखर

पर माना था


पर,

गंगा,

हम नवीन, वैज्ञानिक व धार्मिक मानव

भला इन गाथाओं को सच क्यों माने?


आखिर तुम एक नदी ही तो हो......

निर्जीव, हाइड्रोजन व आक्सीजन का संयोग

जो पहाड़ से निकलता है और सागर में समाता है....


हाँ

और नहीं तो क्या,,,

सर्वविलयक, घुलनशील,

शरीर के सत्तर फीसदी हिस्से की तरह बहने वाली..

तुम भी संसार चक्र की एक इकाई ही तो हो।


लेकिन माँ.....

तुम्हारे अंदर अद्भुत बैक्टरियोफैज कहाँ से आए?

जो विषाणुओं और किटाणुओं को देखते ही

आश्चर्यजनक गुणन करके उन्हे खत्म कर देते हैं....

सम्पूर्ण विश्व में सिर्फ तुम ही ऐसी नदी क्यों हो?

कैसे इतना कचरा ढोते हुए भी

तुम कुछ किलोमीटर के प्रवाह से ही

सर्वाधिक आक्सीजन पा लेती हो?


माँ,

सारे संसार की सबसे उपजाऊ जमीन

तुमने कैसे तैयार की?

तेरी जमीन पर पहुँच कर

सर्वभक्षी मानव अहिंसक क्यों हो जाता है?

माँ तुम्हारा कौन सा गुण था

जिसने अब तक तुम्हारी पोषक धरा को महामारियों से बचाया?


विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा बनाने वाली

तुम तो शुरू से अंत तक

साथ कुछ भी नहीं ले जाती....


पर्वतों का अपरदन करके लायी मिट्टी भी

सुंदरवन में छोड़ जाती हो....

जहां हर कण मे एक नया जीवन

जम्हाई लेता है..............


धन्य हो माँ॥


माँ,,,

तुम्हारे पानी में ऐसा क्या था

जो अकबर का उद्दीग्न मन शांत करता था???

उसे धर्मों से दूर ले जाकर आत्मखोज की प्रेरणा देता था.....

क्या था ऐसा जो कबीर और तुलसीदास को

अमर बना गया??

सूफी-साधु कैसे तुम्हारे आगोश में दुनिया से विरक्त हो जाते थे??

क्यों अंग्रेज़ तुम्हारे पानी को विलायत ले जाते थे?

तुम्हारे पानी में कुष्ठ क्यों नहीं पनपता,

क्यों कैंसर नहीं होता?

अबूझ गुण बता दो जिससे तुम्हारा पानी कभी खराब नहीं होता?


माँ

तुम अध्यात्म की देवी क्यों हो.....

जो जंगल संसार को डराते हैं,,,,

वो तुम्हारी धरा में क्यों जीव को बचाते हैं?

कैसे तुम्हारे आँचल में हिंसक जीव भी हमारे साथ खेल लेते थे?


बांधों के बनने से पहले

क्यों तुम्हारे इतिहास में भीषण बाढ़ नहीं है?

क्यों कोई अकाल नहीं है?


लेकिन माँ,,,

कौतूहलवश बाहर से आए आक्रांताओं ने,,

तुम्हारे जंगलियों को मार दिया....

जंगलों,,, और उसमें बसने वाले जीवों को निगल लिया...


मानव को जिंदा रखने वाली माँ,,,,

तुम तिल तिल कर, अब प्राण याचना कर रही हो...


टिहरी बांध से बंध कर...

नरौरा में परमाणु कचरा समेटती...

कानपुर के क्रोमियम से जूझती...

मिर्जापुर से लेकर बांग्लादेश तक

आर्सेनिक जैसे न जाने कितने खनिजों के जहर से लड़ती...

हर घाट में बने मंदिरों की गंदगी,,,

और हमारी लाशों को ढोती.....

हम मूर्ख मानवों की बनाई

रासायनिक मूर्तियों के प्रवाह से विदीर्ण होती।


घरों से निकलता जहरीला झाग और मल-मूत्र....

खेतों से बहकर आता डी०डी०टी० और पेस्टिसाइड.....

गाड़ियाँ धोते, तेल से भरे बदबू मारते नाले.....

फैक्ट्रियों से बहता हमारा रंगीन विकास...

मरी मछलियों से भरा उतराता रसायन.......


आह..... सब सहती हो।


अब तो तुम्हें भूमि से काटती,,,

तुम्हारे मूक जानवरों को दबाती,,,,,

हमारी लंबी और चौड़ी सड़कें भी दौड़ेंगी......


निगमानंद के प्राण लेने वाले

व्यवसायियों से....


आखिर कब तक जिंदा रह सकोगी माँ?
*******

राम सिंह यादव (लेखक पर्यावरण सरंक्षरण की मुहिम में स्वयं को समर्पित किए हुए है, इनकी कवितायें जल जंगल जमीन के प्राकृतिक स्वरूप को बनाये रखने के लिए समाज को एक सुन्दर सन्देश देती है, कानपुर में निवास, इनसे yadav.rsingh@gmail.com पर संपर्क कर सकते है. )


महान जंगल को बचाने के लिए शपथ लिया



शहरी युवा एकजुट होकर सिंगरौली के महान जंगल को बचाने के लिए समर्थन में आए

22 अप्रैल,2014नई दिल्ली। अर्थ डे के अवसर पर नई दिल्ली, मुंबई और बंगलोर के युवा स्वंयसेवक महान जंगल को बचाने के लिए एक साथ आए। ये स्वंयसेवक सिंगरौली, मध्यप्रदेश में स्थित महान जंगल को बचाने के लिए ग्रीनपीस इंडिया की तरफ से आयोजित एकजुटता कार्यक्रम का हिस्सा बने। दिल्ली में यह कार्यक्रम प्रेस इनक्लेव साकेत में आय़ोजित किया गया। अर्थडे के अवसर पर ग्रीनपीस ने बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार में एक विज्ञापन देकर राजनीतिक दलों से नये सरकार में सत्ता में आने के बाद महान जंगल को दिए गए अंतिम चरण के पर्यावरण मंजूरी को वापस लेने की मांग की। इस कार्यक्रम में मुंबई में प्रहल्लाद कक्कर और किटु गिडवानी ने तथा बंगलोर में मनोविराज खोसला, सुरेश हेबीलकर और प्रकाश बेलवाडी जैसे सितारों ने हिस्सा लिया।

 इस साल फरवरी में पर्यावरण और वन मंत्री वीरप्पा मोईली ने 50,000 वनवासियों की आशा और आकांक्षाओं को कुचलते हुए महान को मंजूरी दिया था। सदियों से इन वनवासियों की जीविका महान जंगल पर निर्भर है, जिसे महान कोल ब्लॉक को कोयला खदान के लिए देना प्रस्तावित है। ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई ने कहा कि, अभी हाल ही में रत्ना फील्ड मामले में सामने आये सबूतों ने मोईली की एस्सार के साथ दोस्ती को साबित किया है। इसी क्रम में महान कोल ब्लॉक को मिले स्पीडी क्लियरेंस को भी समझा जा सकता है जबकि मोईली के पूर्ववर्ती दो मंत्रियों ने मंजूरी के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। यह एक सरकारी कॉर्पोरेट गठजोड़ को इंगित करता है

युवाओं की आवाज
ग्रीन सिटी  के थीम पर तीन शहर के युवाओं ने मांग किया कि उन्हें वनवासियों की जीविका को नष्ट करके और जैवविविधता को खत्म करके विकास नहीं चाहिए।

महुआ चुनना
अप्रैल के महीने में शहरी युवाओं ने महान को बचाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। 11 अप्रैल को पूरे देश से 26 स्वंयसेवकों ने महान पहुंच कर 15 दिनों तक वनवासियों के साथ जंगल में महुआ चुनने में हिस्सा लिया। मार्च और अप्रैल के महीने में महुआ का फल चुना जाता है जिसका उपयोग कई तरह की दवाईयों के लिए होता है। ग्रामीणों की कमाई का बड़ा हिस्सा महुआ फल को बेचकर आता है।
महान संघर्ष समिति की कार्यकर्ता और बुधेर गांव की निवासी अनिता कुशवाहा कहती हैं, हम शहर से महुआ चुनने आए इन स्वंयसेवकों का आभारी हैं। जो हर रोज सुबह उठकर हमारे साथ महुआ चुनने जंगल जाते हैं। यह एक आसान काम नहीं है लेकिन स्वयंसेवकों का समर्पण बहुत उत्साहजनक है। यह हमें हम महन को बचाने के लिए लड़ाई में अकेले नहीं हैं कि उम्मीद और आश्वासनदेता है

ग्रीनपीस का अखबार में विज्ञापन

अर्थडे के दिन लोगों के चंदे से जमा किए गए पैसे से बिजनेस स्टैंडर्ड में विज्ञापन दिया गया लेकिन पिछले सप्ताह एस्सार ने ग्रीनपीस इंडिया को कानूनी नोटिस भेजकर इसे रोकने का प्रयास किया था। प्रिया पिल्लई ने कहा कि, निषेधाज्ञा के बावजूद, ग्रीनपीस इंडिया विज्ञापन के साथ आगे जा रहा है और महान संघर्ष समिति का समर्थन करने के लिए शहरों में और महान जंगल मेंएकजुटता का प्रदर्शन करके साहसिक कदम उठाया है

ग्रीनपीस इंडिया पर एस्सार लगातार गलत आरोप लगा रहा है। एस्सार के मुंबई स्थित मुख्यालय पर प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध में प्रदर्शन करने पर कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में ग्रीनपीस इंडिया और गांव के लोगों पर 500 करोड़ की मानहानि और चुप रहने का मुकदमा किया है।

ग्रीनपीस इंडिया मांग करती है कि पर्यावरण मंजूरी पर फिर से विचार करके एक स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय आना चाहिए और तबतक के लिए मंजूरी को अमान्य माना चाहिए।

साभार: अविनाश कुमार
ग्रीनपीस इण्डिया 
avinash.kumar@greanpeace.org

एस्सार का फ्लाई एश डैम टूटने से पानी खेतों और घरों तक पहुंचा, स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा



15 अप्रैल, 2014। सिंगरौली। एस्सार द्वारा बड़े पैमाने पर लापरवाही का एक और उदाहरण सामने आया है। खैराही स्थित एस्सार पावर प्लांट के फ्लाई एश डेम के मिट्टी की दीवार टूटने से राखयुक्त पानी गांव में फैल गया है। ग्रीनपीस ने मांग किया है कि एस्सार को तुंरत इसकी जिम्मेवारी लेकर अपने प्लांट को बंद करना चाहिए।
कुछ ही महीनों में यह दूसरा उदाहरण है। पिछले साल सिंतम्बर में, मध्यप्रेदश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रिय कार्यालय (सिंगरौली) ने फ्लाई एश की एक बड़ी मात्रा पास के नदी और आसपास के क्षेत्र में फैलने की सूचना दी थी। इस साल जनवरी में प्रदुषण बोर्ड ने इस ओवरफ्लो की वजह से प्लांट को बंद करने का आदेश दिया था लेकिन कंपनी किसी सुरक्षा उपायों को पूरा किए बिना प्लांट को चालू करने में कामयाब रही थी।

 ग्रीनपीस की अभियानकर्ता ऐश्वर्या मदिनेनी ने बताया कि, कोयला विद्युत संयंत्रों से फ्लाई ऐश सिंगरौली के निवासियों के लिए एक बारहमासी समस्या हो गई है और हाल ही में एस्सार पावर प्लांट से विषाक्त फ्लाई एश का रिसाव स्वीकार नहीं किया जा सकता है। फ्लाई एश में भारी धातु जैसे आर्सेनिक, पारा होते हैं जिससे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को सीधा नुकसान पहुंच सकता है

वह आगे कहती हैं कि, सिंगरौली के निवासी अस्थमा, तपेदिक, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसी बिमारियों से नियमित रुप से पीड़ित हैं। स्थानीय डाक्टर इसकी वजह सीधे तौर पर औद्योगिक प्रदुषण को मानते हैं। अब समय आ गया है कि सरकार इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए कदम उठाये
कोयले के जलने से फ्लाई एश उत्पादित होता है और इसके वातावरण में जाने से यह पानी और वायु दोनों को दूषित करता है। बीच गांव में फ्लाई एश के लिए तालाब होने से वहां के लोगों पर बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
मंथन अध्य्यन केन्द्र के संस्थापक श्रीपद धर्माधिकारी के अनुसार, फ्लाई एश का पानी के साथ मिलना जल प्रदुषण का सबसे बुरा रुप है। फ्लाई एश डैम के टूटने से वहां के भूमिगत जल स्रोत भी प्रभावित हो सकते हैं। यह प्रदुषित पानी कुएँ और दूसरे जल स्रोतों में मिलकर खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर सकता है

हाल ही में आयी रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में जहरीले पारा के बढ़ने के संकेत मिल चुके हैं। आदमी और मछली दोनों के खून जांच में उच्च स्तर का पारा पाया गया था। पारा नियुरोओक्सिसिटी के साथ जुड़ा एक भारी धातु है और यह फ्लाई ऐश के गठन की प्रमुख घटकों में से एक है।

 जहां एस्सार का नया एश पॉण्ड अभी निर्माणाधीन है। धर्माधिकारी बताते हैं कि, इस तरह की घटना से बचने के लिए फ्लाई एश पॉण्ड को लेकर दिशा-निर्देश बनाये गए हैं लेकिन दुर्भाग्य से शायद ही, पावर प्लांट्स इस नियम का पालन करते हैं

भारी धातु के अलावा फ्लाई एश में रेडियोएक्टिव गुणों के होने का भी संदेह होता है जो आनुवांशिक परिवर्तन पैदा कर सकता है। फ्लाई एश के इस अनिश्चित निपटान से आसपास के लोगों की जिन्दगी और जीविका खतरे में है। धर्माधिकारी के अनुसार पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (एमओईएफ) के विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने भारी धातुओं और रेडियोधर्मी तत्वों की वजह से फ्लाई ऐश के उपयोग के खिलाफ मजबूत तर्क  व्यक्त किया है
सिंगरौली में, स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा फ्लाई एश प्रदुषण के खिलाफ शिकायत के बावजूद  सरकार और कंपनी इस मुद्दे को हल करने में कोई रुचि नहीं दिखाती। ग्रीनपीस की मांग है कि एस्सार इस पूरे घटना की जिम्मेवारी लेते हुए अपने सभी कार्यों को बंद करे जबतक कि प्रदुषण नियंत्रण संबंधी सभी नियमों को पूरा नहीं कर लिया जाता।

साभार: अविनाश कुमार ग्रीनपीस इंडिया 
avinash.kumar@greenpeace.org

Notes to the Editor:
A Case study on Mercury Poisoning in Singrauli:
Contact:
Aiswarya Madineni: Campaigner, Greenpeace India; +91 8884875744; aishwarya.madineni@greenpeace.org
Avinash Chanchal: +91 8359826363; avkumar@greenpeace.org

Mar 13, 2014

जंगल का राजा सरकारी गिरफ्त में....



कब्जे में आए 'बिगड़ैल नवाब दुधवा में होगी मुलाकात

ढाई माह से इलाके में थी मौजूदगी, डिमरौल गांव की घटना के बाद बढ़ी थी दहशत

बिजुआ। अपने घर 'जंगल से खफा होकर निकले 'बिगड़ैल नवाब बाघ को सोमवार को पकड़े जाने के साथ इलाके के लोगों के दिलों से दहशत भी बिदा हो गई। बाघ पकड़ जाने की खबर सुनते ही लोगों का मजमा लग गया, हर कोई डिमरौल गांव के उस 'गुनाहगार को देख लेना चाहता था, जिसके सिर पर एक इंसानी कत्ल का इल्जाम था।

दिसंबर की २९-३० तारीख को सौनाखुर्द गांव में सुअर व उसके १० बच्चों को एक बाघ मार कर खा गया था। तीन दिन बाद एक बार फिर  गांव में बने पशुबाड़े से बाघ एक सुअर को घसीट ले गया। पहले तो वन विभाग इसे गुलदार बताता रहा, बाद में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रोजेक्ट आफीसर दबीर हसन ने गांव का दौरा कर पगमार्क देखे और बाघ की पुष्टि की। इसके बाद बहादुरनगर गांव के प्रधान के कुत्ते का शिकार हो जाने पर लोगों ने कहा कि बाघ ने ही मारा है। इस दौरान बाघ महेशापुर, गुलाबटांडा, रामालक्ष्ना, बहादुरनगर, अमरपुर, नौरंगाबाद, अंबारा में बाघ बकरी व कुत्तों को मारता रहा। इसी बीच लोगों ने गन्नों में नीलगाय के शिकार भी देखे। सौनाखुर्द में पहली आमद के बाद से महकमा मानता रहा कि बाघ जंगल चला गया। २०-२१ फरवरी की रात में डिमरौल गांव में शौच कर रहे छैलबिहारी को जब बाघ ने अपना शिकार बनाया तो महकमे बाघ की मौजूदगी मानी। 




....अब दुधवा में होगी इनसे मुलाकात

बिजुआ। भीरा रेंज के बहादुरनगर से पकड़ा गया बाघ देर शाम को दुधवा नेशनल पार्क के वान खेड़ा एरिया में बाघ को पिंजरे से रिलीज कर दिया गया। डब्ल्यूटीआई टीम के डा. देवेंद्र चौहान, डा. सौरभ सिंघई के अलावा पार्क प्रशासन के कर्मचारी, व वन महकमे के अफसर मौजूद रहे। टीम ने बताया कि करीब ४.३० बजे शाम को जैसे ही पिंजरे से बाघ छोड़ा गया, वह फुर्ती से दुधवा के खूबसूरत जंगल में चला गया।
सलीम



बाघ के खौफ में बंद रहे थे १७ स्कूल

बिजुआ। खीरी जिले में पहली बार हुआ था कि बाघ के खौफ में एक साथ १७ स्कूल बंद किए गए हों। 
जी हां, डिमरौल गांव की घटना के बाद बाघ के खौफ के चलते बच्चे व अध्यापक स्कूल आने से कतराने लगे, क्यों कि इस इलाके में बाघ की जहां मौजूदगी मिल रही थी, वहां के स्कूल गांव से बाहर खेतों में व जंगल के नजदीक बने हुए थे। 
सलीम

आपरेशन की कामयाबी में रहे सबके अहम रोल

बिजुआ। बाघ को बा-हिफाजत पकड़कर जंगल तक ले जाने में हर एक ने अहम किरदार निभाए। दुधवा नेशनल पार्क के कर्मचारी के अलावा हाथियों के दल, डब्ल्यूटीआई की टीम, वन विभाग के डीएफओ, एसडीओ व रेंजर के अलावा कर्मचारी, भीरा पुलिस, खाबड़ लगाने वाले दल के साथ लखनऊ चिडिय़ाघर से आए डा. उत्कर्ष शुक्ला समेत सभी का अहम रोल रहा। 

डब्ल्यूटीआई की टीम ने संभाली बड़ी जिम्मेदारी

बिजुआ। डब्ल्यूटीआई दुधवा नेशनल पार्क में एअरसेल के सहयोग से दो साल से बाघ-मानव संघर्ष को कम करने के प्रोजेक्ट के अलावा बाघ संरक्षण पर काम कर रही है। फरवरी २०१३ में साउथ खीरी रेंज में एक बाघ के लोहे फंदे में फंस गया था, तब इसी टीम ने बाघ को ट्रैंक्यूलाइज कर छुड़ाया था, अब वह बाघ लखनऊ के चिडिय़ाघर में है। सोमवार को एक बार फिर टीम को कामयाबी मिली।


.....एक शॉट और हो गया काम, शाबास-डा. उत्कर्ष
बिजुआ। जिले के आलाअफसरों की राय के बाद रविवार को लखनऊ से पहुंचे डा. उत्कर्ष शुक्ला ने कमान संभाली। सोमवार को करीब ११.४० मिनट पर हाथियों के दल ने बाघ को पछाड़ा,.... हाथी पर सवार डा. उत्कर्ष ने एक ट्रैंक्युलाइज शॉट मारा और टीम को संकेत दिया कि काम हो गया। उसके बाद टीम के लोग एक दूसरे को बधाई देने लगे। 



अब्दुल सलीम खान की शानदार रिपोर्ट भीरा-खीरी के जंगलों से, एक बाघ की मानव आबादी में मौजूदगी, घटनाएं और सरकारी कवायदों को बड़ी खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है, जंगल और जानवरों और इसानों के मध्य संघर्ष का एक बेहतरीन दस्तावेज। 
salimreporter.lmp@gmail.com




सभी फोटो अब्दुल सलीम खान 

Mar 10, 2014

मशहूर हो चुका दुधवा का बाघ आखिरकार पकड़ा गया !


फोटो साभार: सीज़र सेनगुप्त 
आखिरकार पकड़ा ही लिया गया उस बाघ को.

लखीमपुर खीरी/दुधवा टाइगर रिजर्व. महीने भर से लखीमपुर खीरी जनपद के भीरा-बिजुआ इलाके में एक बाघ की मौजूदगी ने लोगों में कौतूहल का विषय बनी हुई हुई थी. वह जिस गाँव में देखा जाता वहां मेले सा माहौल पैदा हो जाता लोग बाग़ पिकनिक मनाने आ जाते, मीडियाकर्मियों के चमकते फ्लैश लाईटों और वनविभाग के कर्मियों की संगीनों, हाथियों और कार जीपों के मध्य ग्रामीण जनता जिनके लिए यह तमाशे से ज्यादा कुछ नहीं...

इस बाघ पर एक मानव ह्त्या और एक व्यक्ति पर हमला करने का आरोप भी है, जंगल के राजा पर इंसानी हुकूमत अपने क़ानून का परचम लहराने की कोशिश में है, आबादी में बाघ क्यों आया इसके पीछे की वजहें मालूम करने के बजाए बस सरकारी मज़मा मौजूद होता है उस जगह पर जैसे कोइ बहुत बड़ा अपराधी वहां मौजूद हो, चूंकि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में जानवरों को मतदान का अधिकार नहीं है इस लिए उन्हें कोइ सरकारी रियायत...

दुधवा लाइव के पास मौजूद है एक्सक्लूसिव वीडियो जिसमे बाघ को खाबड़ लगाकर पकड़ने की नाकाम कोशिश कर रहा है वन विभाग.....

सूत्रों के मुताबिक़ भीरा इलाके में इसी बाघ को वन विभाग द्वारा गन्ने के खेत में खाबड़ (जाल ) लगाकर उसे पकड़ने की कोशिश की गयी, जैसे वह बाघ न होकर कोइ खरगोश व् हिरन है, सरकारी व्यवस्था जब शिकारियों के तरीके इस्तेमाल करने लगे तो सोचिए....खाबड़ में फंसा और फिर उसे तोड़कर निकले बाघ की मनोदशा कैसी होगी वह घायल भी हो सकता है, और घायल अवस्था में वह आदमखोर की प्रवत्ति को भी अपना सकता है मजबूरन...आने वाले वक्त में अपने इन अनुभवों के चलते आदमी के लिए खतरनाक हो सकता है, ये गैर वैज्ञानिक तरीके बाघ और इंसान के बीच संघर्ष को और बढ़ावा देगी.

सूत्रों के मुताबिक़ अभी अभी किशनपुर वन्य जीव विहार के निकट सिख टांडा में बाघ को पकड़ लिया गया है. देखी उसे चिड़ियाघर की उम्र कैद नसीब होती है या खीरी के जंगलों में आज़ादी .......


दुधवा लाइव डेस्क 








Mar 1, 2014

एस्सार महान छोड़ो

महानवासियों ने शुरु किया वन सत्याग्रह
महान जंगल बचाओ जनसम्मेलन में किया एलान- एस्सार महान छोड़ो


सिंगरौली। मध्यप्रेदश। महान क्षेत्र के 12-14 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने महान जंगल में प्रस्तावित खदान के विरोध में अमिलिया में आयोजित महान जंगल बचाओ जनसम्मेलन में हिस्सा लिया। जनसम्मेलन में ग्रामीणों ने वन सत्याग्रह का एलान किया।


पर्यावरण मंत्री वीरप्पा मोईली द्वारा महान कोल लिमिटेड को दिए गए दूसरे चरण के क्लियरेंस के बाद आयोजित इस जनसम्मेलन में ग्रामीणों ने इस क्लियरेंस को अमान्य करार दिया। उन्होंने उस विशेष ग्राम सभा में वनाधिकार कानून पर पारित प्रस्ताव के फर्जी होने के सबूत दिए जिसके आधार पर दूसरे चरण का क्लियरेंस दिया गया है।


2012 में महान कोल ब्लॉक को 36 शर्तों के साथ पहले चरण का क्लियरेंस दिया गया था,जिसमें वनाधिकार कानून को लागू करवाना भी शामिल था। इसमें गांवों में निष्पक्ष और स्वतंत्र ग्राम सभा का आयोजन करवाना था जहां ग्रामीण यह निर्णय लेते कि उन्हें खदान चाहिए या नहीं। 6 मार्च 2013 को अमिलिया गांव में वनाधिकार कानून को लेकर विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इसमें 184 लोगों ने भाग लिया था लेकिन प्रस्ताव पर1,125 लोगों के हस्ताक्षर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इनमें ज्यादातर फर्जी हैं। इन हस्ताक्षरकर्ताओं में लोग सालों पहले मर चुके हैं। इसके अलावा अमिलिया के 27 ग्रामीणों ने  लिखित गवाही दी है कि वे लोग ग्राम सभा में उपस्थित नहीं थे लेकिन उनका भी हस्ताक्षर प्रस्ताव में है।


महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता जगनारायण साह ने लगातार इस मामले में  कलेक्टर तथा केन्द्रीय जनजातीय मंत्री  को संलग्न करने के प्रयास के बाद फर्जी ग्राम सभा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करायी है। जनसम्मेलन को संबोधित करते हुए जगनारायण साह ने कहा कि, विरोधी पक्ष के द्वारा जान से मारने और बदनाम करने की धमकी के बावजूद हमलोग ग्राम सभा की वैधता और इसके आधार पर दिए गए पर्यावरण क्लियरेंस के खिलाफ एफआईआर करने को लेकर दृढ़ संकल्पित हैं। महान संघर्ष समिति के सदस्य और उनके बढ़ते समर्थक खदान का जोरदार विरोध कर रहे हैं।


जनसम्मेलन में ग्रामीणों और महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने अपनी ताकत को दिखाते हुए एकजुट होकर एस्सार महान छोड़ो’ का संदेश दिया। महान में खनन से जंगल खत्म हो जायेंगे जिसमें हजारों लोगों की जीविका के साथ-साथ कई तरह के जानवरों और 164 पौधों की प्रजातियां का निवास स्थल है।


महान जंगल में चल रहे जमीनी लड़ाई को दूसरे संगठनों से भी काफी समर्थन मिल रहा है। महान संघर्ष समिति की कार्यकर्ता तथा ग्रीनपीस की सीनियर अभियानकर्ता प्रिया पिल्लई ने जनसम्मेलन में कहा कि, इस आंदोलन को सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों से पूरे भारत में लाखों लोगों का समर्थन मिल रहा है। साथ हीजनसंघर्ष मोर्चाआदिवासी मुक्ति संगठनछत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन जैसे जनआंदोलन के नेताओं द्वारा भी महान की लड़ाई को समर्थन मिल रहा है। शहरी तथा ग्रामीण भारत की यह एकता बेमिसाल है


22 जनवरी 2014 को महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने शहरी युवाओं के साथ मिलकर एस्सार के मुंबई स्थित मुख्यालय पर प्रदर्शन किया थाजहां महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने मुख्यालय के सामने धरना दिया था वहीं ग्रीनपीस कार्यकर्ताओं ने एस्सार मुख्यालय पर बैनर लहरा कर दुनिया को बताया था कि एस्सार जंगलों के साथ क्या करती है।
जनसम्मेलन को सामाजिक कार्यकर्ता शमीम मोदी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि
गरीबों और आम आदमी की संख्या और अन्याय के प्रति लड़ने की इच्छाशक्ति ही इस लड़ाई की ताकत है। सबको एक होकर लड़ना होगा। अपने देश में सारी नीतियां बाजार तय कर रही हैं। इसी बाजारवादी व्यवस्था के दबाव में महान और दूसरे प्रोजेक्ट को क्लियरेंस दिया जा रहा है। सारी सरकारों के पीछे कॉर्पोरेट शक्तियां काम कर रही हैं। असली सरकार कॉर्पोरेट चला रहे हैं। आज जरुरत है ऐसे नेताओं की जो जनता की तरफ से आवाज उठा सके

इस बात के सबूत हैं कि महान कोल ब्लॉक को अपारदर्शी तरीके से आवंटित किया गया। खुद मोईली के पूर्ववर्ती मंत्रियों ने महान में खदान का विरोध किया था। इन सबके बावजूद25 फरवरी 2014 को अंतर-मंत्रालयी समूह जो खदान शुरु न होने वाले कोल ब्लॉक के आवंटन को रद्द करने  पर विचार कर रही है ने महान कोल ब्लॉक को दूसरे चरण के क्लियरेंस के आधार पर क्लिन चिट दे दिया है।

महान संघर्ष समिति ने मांग किया है कि दूसरे चरण का क्लियरेंस तुरंत प्रभाव से हटाया जाय। जबतक जंगल में प्रस्तावित खदान को वापस नहीं लिया जाता है तबतक वन सत्याग्रह जारी रहेगा।

सौजन्य: अविनाश कुमार, ग्रीनपीस 
avinash.kumar@greenpeace.org



हर किसी के लिए मुस्कराकर राज दिल का बताना बुरा है

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग: