डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 01, January 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Jan 3, 2017

कुंवर बिली अर्जन सिंह की पुण्यतिथि पर दुधवा नेशनल पार्क में बाघ सरंक्षण पर कार्यशाला




दुधवा नेशनल पार्क। पलिया - खीरी। पद्मभूषण बिली अर्जन सिंह की पुण्यतिथि पर दुधवालाइव डॉट कॉम द्वारा बिली की स्मृति में वन्य जीव सरंक्षण व् दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना में बिली का योगदान विषय पर दुधवा नेशनल पार्क के आडिटोरियम में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें लखीमपुर के कानपुर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की, ये सभी छात्र बेस्ट बॉयो क्लासेज़ संस्था के तहत दुधवा नेशनल पार्क और टाइगर मैन बिली अर्जन सिंह पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ वहां उपस्थित हुए, ज्यूरी द्वारा चयनित रिपोर्ट्स में नेहा वर्मा, स्नेहा वर्मा, देवेंद्र भार्गव की रिपोर्ट्स को चुना गया, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दुधवा नेशनल पार्क के बेलरायां डिवीजन के एस डी ओ नरेंद्र उपाध्याय ने हॉल में उपस्थित विद्यार्थियों व् वन्य जीव प्रेमियों को नेशनल पार्क, सैंक्चुरी, बायोस्फीयर रिजर्व में क्या फ़र्क है इस पर विस्तार से चर्चा की, साथ ही बिली द्वारा बाघ व् तेंदुओं के पुनर्वासन के प्रयोग की सराहना की। श्री उपाध्याय ने बिली की बाघिन तारा, तेंदुआ- प्रिंस, जूलिएट व् हैरिएट के बारे में भी बताया और बिली के साथ रहे, उन्होंने कहा कि इन जीवों पर बनी फिल्म नई पीढ़ी को देखना चाहिए, ताकि लोग वन्यजीवन के महत्व को समझ सके। 



कार्य शाला की अध्यक्षता कर रहे पलिया के पूर्व ब्लाक प्रमुख गुरप्रीत सिंह जॉर्जी ने कुंवर अर्जन सिंह के संस्मरणों को सुनाया जिसमे जीवों और जंगलों के प्रति उनकी दीवानगी का ज़िक्र किया, और दुधवा टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली सुहेली नदी की सिल्ट के कारण हुई दुर्दशा पर भी चिंता व्यक्त की। इस कार्यक्रम के संयोजक वन्य जीव विशेषज्ञ कृष्ण कुमार मिश्र ने बिली को श्रद्धांजलि देते हुए सभी को बताया कि बिली साहब कपूरथला स्टेट के राजकुमार थे और द्वतीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में उन्होंने हिस्सा भी लिया था, उन्हें  बाघों और तेंदुओं के सरंक्षण के लिए पद्मश्री, पद्मभूषण, व् पॉल गेटी जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चूका हैं, श्रीमती इंदिरा गांधी और बिली के मध्य खीरी के जंगलों के बाघों और उनकी सुरक्षा के लिए पत्राचार का जो सिलसिला कायम था उसी के चलते बिली के अनुभवों और उनकी मांग पर श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1977 में दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना की। 



कार्यक्रम में सभी सहभागी विद्यार्थियों के लंच की व्यवस्था वन्य जीव प्रेमी संजय नारायण की.

कार्यशाला में जीव विज्ञान प्रवक्ता बृजेंद्र प्रताप सिंह, पत्रकार प्रशांत पांडेय, अब्दुल सलीम, रोटेरियन विजय महेन्द्रा, देवेंद्र चौधरी ने बिली अर्जन को श्रद्धांजलि दी और उनके वन्य जीव सरंक्षण के कार्यों को नई पीढ़ी द्वारा आगे बढ़ाने का संदेश दिया। 


बिली अर्जन सिंह का देहावसान 94 वर्षबकी आयु में एक जनवरी 2010 को हुआ था।

कार्यक्रम के अंत में के के मिश्र ने दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन एवं स्टाफ को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कार्यशाला में सहयोग व् सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया. 

दुधवा लाइव डेस्क 

Dec 9, 2016

रूपक डे बने उत्तर प्रदेश के प्रमुख मुख्य वन सरंक्षक


बीसवीं सदी के आखिर में रूपक डे दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर के पद पर भी रहे है आसीन.

9 दिसम्बर -लखनऊ:  आई ऍफ़ एस  डॉ. रूपक डे को उत्तर प्रदेश का नया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक  बनाया गया है। जबकि उमेन्द्र शर्मा को मुख्य वन्य जीव सरंक्षक का कार्यभार दिया गया है, एक बार फिर रूपक डे को उत्तर प्रदेश के प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ़ फारेस्ट के पद की अहम् जिम्मेदारी सौंपी गयी है, विदित हो की रूपक डे उत्तर प्रदेश के दुधवा नेशनल पार्क के भी फील्ड डायरेक्टर के पद पर तैनात रहे हैं, उनकी अभिरुचियों में वन्य जीव सरंक्षण के साथ साथ लेखन और फोटोग्राफी प्रमुख  हैं .

दुधवा लाइव डेस्क 

Dec 8, 2016

भारत में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या चीन से ज्यादा

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजिज की रिपोर्ट के अनुसार 2015 में चीन से ज्यादा लोग भारत में प्रदूषण से मरे
ग्रीनपीस ने इससे निपटने के लिए तत्काल राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर पर कार्यनीति बनाने की मांग की

नई दिल्ली। 16 नवंबर 2016। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजिज प्रोजेक्ट के एक विश्लेषण में चिंताजनक नतीजे सामने आये हैं। इसके अनुसार, 2015 में बाहरी वायु प्रदूषण से सबसे अधिक मौत भारत में हुई है जो चीन से भी अधिक है। इस अध्ययन से पता चलता है कि 1990 से अबतक लगातार भारत में होने वाले असामायिक मौत की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि 2015 में भारत में 1640 लोगों की प्रतिदिन असामयिक मौत हुई जबकि इसकी तुलना में चीन में 1620 लोगों की मौत हुई थी।

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजिज (जी बी डी) एक क्षेत्रीय और वैश्विक शोध कार्यक्रम है जो गंभीर बीमारियों, चोटों और जोखिम कारकों से होने वाले मौत और विकलांगता का आकलन करता है। जीबीडी की यह रिपोर्ट ग्रीनपीस के इस साल की शुरुआत में जारी की गयी उस रिपोर्ट को पुख्ता करती है जिसमें बताया गया था कि इस शताब्दी में पहली बार भारतीय नागरिकों को चीन के नागरिकों की तुलना में औसत रूप से अधिक कण (पार्टिकुलर मैटर) या वायु प्रदूषण का दंश झेलना पड़ा है। ग्रीनपीस के कैंपेनर सुनील दहिया कहते हैं, “चीन एक उदाहरण है जहां सरकार द्वारा मजबूत नियम लागू करके लोगों के हित में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सका है। जबकि भारत में साल दर साल लगातार वायु प्रदूषण बढ़ता ही गया है। हमें इस अध्ययन को गंभीरता से लेने की जरुरत है। यह इस बात को भी दर्शाता है कि हमारी हवा कितनी प्रदूषित हो गयी है। सरकार को इससे निपटने के लिये तत्काल कदम उठाने ही होंगे।”


इस अध्ययन का विश्लेषण करते हुए सुनील ने आगे कहा, “चीन में जिवाश्म ईंधन पर जरुरत से अधिक बढ़ते निर्भरता की वजह से हवा की स्थिति बहुत खराब हो गयी थी। 2005 से 2011 के बीच, पार्टिकुलेट प्रदूषण स्तर 20 प्रतिशत तक बढ़ गया था। 2011 में चीन में सबसे ज्यादा बाहरी वायु प्रदूषण रिकॉर्ड किया गया, लेकिन उसके बाद 2015 तक आते-आते चीन के वायु प्रदूषण में सुधार होता गया। जबकि भारत की हवा लगातार खराब होती गयी और वर्ष 2015 का साल सबसे अधिक वायु प्रदूषित साल रिकॉर्ड किया गया। अगर बढ़ते प्रदूषण स्तर को बढ़ते असामायिक मृत्यु की संख्या से मिलाकर देखा जाये तो स्पष्ट है कि चीन से उलट भारत ने कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया है जिससे कि वायु प्रदूषण के स्तर में सुधार लाया जा सके।”

ऐसे समय में, भारत का कोयला पावर प्लांट के उत्सर्जन मानकों को लागू करने के लिये तय समयसीमा में छूट देने की योजना चौंकाने वाली है। बहुत सारे ऐसे वैज्ञानिक अध्ययन मौजूद हैं जो बताते हैं कि वायु प्रदूषण में थर्मल पावर प्लांट का भी योगदान है। लेकिन सरकार बड़े आराम से लोगों के स्वास्थ्य की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है और प्रदूषण फैलानेवाले मानकों में छूट दिये जा रहे हैं। दुनिया का सबसे प्रदूषित देश होने के बावजूद चीन ने 2011 में थर्मल पावर प्लांट के उत्सर्जन मानकों को कठोर बनाया और 2013 में एक एकीकृत योजना बनाकर लागू किया जिससे प्रदूषण स्तर में कमी आयी और परिणामस्वरूप मृत्यु दर में कमी भी आई है।

अंत में सुनिल ने कहा, “हाल ही में यूनिसेफ ने वायु प्रदूषण से होने वाले असमायिक मृत्यु और बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव की तरफ ध्यान दिलाया था। अब ग्लोबल बर्डन के आंकड़े बता रहे हैं कि स्थिति चिंताजनक है और भारत को समय-सीमा तय करके वायु प्रदूषण स्तर को कम करने का लक्ष्य रखना होगा, कठोर कदम नीतियों को लागू करते हुए जिवाश्म ईंधन की खपत को कम करने की नीति बनानी होगी और एक एकीकृत राष्ट्रीय-क्षेत्रीय कार्ययोजना बनानी होगी।”

अविनाश कुमार 
ग्रीनपीस भारत 
 avinash.kumar@greenpeace.org



Nov 1, 2016

हम ठहरे लक्ष्‍मीपति की छाती पर श्रीवत्‍सचिह्न देने वाले महर्षि भृगु की संतान

कृषि और कृष्‍ण की प्रकृति एक है...

तो राजलक्ष्‍मी को अगर सौ बार गरज है‍ कि अपने आने का संदेश उसे इन वधिरों तक, इन अंधों तक भी पहुँचाना है और वे अगर यह समझती हैं कि बिना इन तक संदेश पहुँचे उनके आने का कोई महत्‍व नहीं है, तो मैं कहता हूँ कि उन्‍हें उसी रूप में आना होगा, जो इनकी कल्‍पना में सरलता से उतर सके। ये डॉलर-क्षेत्र नहीं जानते, ये पौंड-पावना से सरोकार नहीं रखते, इन्‍हें मुद्रास्फीति का अर्थ नहीं मालूम, पर इतना समझते हैं कि कागदों का अंबार राजलक्ष्‍मी का शयन-कक्ष नहीं बना सकता। इनकी लक्ष्‍मी गेहूँ-जौ के नवांकुरों पर ओस के रूप में उतरती है, इनकी लक्ष्‍मी धान की बालियों के सुनहले झुमकों में झूमती है और इनकी लक्ष्‍मी गऊ के गोबर में लोट-पोट करती है उस लक्ष्‍मी के लिए वन-महोत्‍सव से अधिक कृषि-महोत्‍सव की आवश्‍कता है, कृषि महत्‍सव से अधिक कृषि-प्रयत्‍न की तथा कृषि-प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
जब तक इन देहातियों की लक्ष्‍मी नहीं आती, तब तक हमको भी इस लक्ष्‍मी से कुछ लेना-देना नहीं है। हमारे ऊपर वैसे ही अकृपा बनी रहती हैं, हम ठहरे लक्ष्‍मीपति की छाती पर श्रीवत्‍सचिह्न देने वाले महर्षि भृगु की संतान, समुद्रपायी अगस्‍त्‍य के वंशज और लक्ष्‍मी के धरती के निवास बेल की डाली छिनगाने वाले परम शैव, हम लक्ष्‍मी की सपत्‍नी के सगे पुत्र, हमें उनसे दुलार की, पुचकार की आशा नहीं, आकांक्षा नहीं। पर विमाता होते हुए भी माता तो हैं ही वे, कौशल्‍या से कैकेयी का पद बड़ा हुआ, तो थोड़ी देर के लिए इनका पद भी सरस्‍वती से बड़ा मान ही लेता हूँ, सो भी आज के दिन तो इनका महत्‍व है ही, ये भले ही उस महत्‍व को न समझें। इसलिए मैं अपना कर्तव्‍य समझता हूँ कि मैं अपनी इस विमाता को चेताऊँ कि जिनके चरणों की वे दासी हैं, उनकी सबसे बड़ी मर्यादा है, निष्किंचनता। सुनिए उन्‍हीं के मुख से और लक्ष्‍मी को ही संबोधित करके कही गई इस मर्यादा को… "निष्किचना वयं शश्र्वन्निष्किंचनजनप्रिया तस्‍मात्‍प्रायेण न ह्याढ्या मां भजन्ति सुमध्‍यमे" (हम सदा से ही अकिंचन हैं और अकिंचन जन ही हमें प्रिय हैं, इसलिए धनी लोग प्राय: हमें नहीं भजते)।
निष्किंचन को चाहे आप 'हैव-नाट' कहिए चाहे खेतिहर किसान, परंतु कृषि और कृष्‍ण की प्रकृति एक है, प्रत्‍ययमात्र भिन्‍न है भगवान और कर्म से भारत के भगवान कृषिमय हैं, इसमें कोई संदेह नहीं। इसलिए उनकी राजलक्ष्‍मी को उनका अनुगमन करना आवश्‍यक ही नहीं परमावश्‍यक है।
आज जो दिया टिमटिमा रहा है वह उसी लक्ष्‍मी की स्‍मृति में, उसी लक्ष्‍मी की प्रतीक्षा में और उसी लक्ष्‍मी की अतृप्‍य लालसा में। इस दिए की लहक में सरसों के वसंती परिधान की आभा है, कोल्‍हू की स्थिर चरमर ध्‍वनि की मंद लहरी है, कपास के फूलों की विहँस है, चिकनी मिट्टी की सोंधी उसाँस है,कुम्‍हार के चक्‍के का लुभावना विभ्रम है और कुम्‍हार के नन्‍हें-नन्‍हें शिशुओं की नन्‍हीं हथेलियों की गढ़न। इसमें मानव-श्रम का सौंदर्य है उसके शोषण की विरूपता नहीं। इसी में घट-घट व्‍यापी परब्रह्म की पराज्‍योति है, तथा स्‍वार्थ और परमार्थ की स्‍व और पर की, पार्थिव और अपार्थिव की, ताप और शीत की, नश्‍वर और अनश्‍वर की, नाश और अमरता की मिलन-भूमि एवं उनकी परम अद्वैत-सिद्धि है। भारतीय दर्शन जीवन का आभरण नहीं है, वह तो उसका प्राण है, आदि-स्रोत है और है अनंत महासागर, मानो इसी सत्‍य को जगाने के लिए ही दिया टिमटिमा रहा है।

(विद्यानिवास मिश्र के निबन्ध संग्रह से साभार- जहां दीया टिमटिमा रहा है का एक अंश)

दीपोत्सव की तमाम शुभकामनाएं
दुधवा लाइव डेस्क।

Oct 9, 2016

सैक्रेड हार्ट डिग्री कालेज में मनाया गया वन्य प्राणी सप्ताह



सीतापुर (उत्तर प्रदेश ) सैक्रेड हार्ट डिग्री कॉलेज, सृष्टि नेचर क्लब एवं वन विभाग (सामाजिक वानिकी) सीतापुर द्वारा आयोजित वन्य जीव सप्ताह मनाया गया, सैक्रेड हार्ट डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल डेनी मैथ्यू, सैक्रेड हार्ट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एन्ड टेक्नालॉजी के प्रिंसिपल रेवरेंड साबू, जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफ़ेसर डॉ अरुण त्रिपाठी, रिसोर्स पर्सन वाइल्ड लाइफ कृष्ण कुमार मिश्र, उप प्रभागीय वनाधिकारी अमर बहादुर सिंगरौर, रेंजर आर सी यादव बिसवां, रेंजर आर सी वर्मा हरगांव, एवं सैकड़ों छात्र छात्राओं ने सहभागिता की।

अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में सात दिनों तक सेक्रेड हार्ट डिग्री कालेज एवं सैक्रेड हार्ट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एवं टेक्नोलॉजी के छात्र छात्राओं ने सीतापुर वन विभाग के सहयोग से आयोजित नेचर कैम्प, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिता में सहभागिता की, सात अक्तूबर को महाविद्यालय में सृष्टि नेचर क्लब व् सैक्रेड हार्ट डिग्री कालेज द्वारा  वन्य जीव सरंक्षण पर एक कार्यशाला का आयोजन हुआ, पर्यावरण एव वन्य जीवन पर ये जागरूकता कार्यक्रम का संचालन जंतु विज्ञान के प्रवक्ता डॉ अरुण कुमार त्रिपाठी तथा उनके विभागीय सहयोगियों ने किया.

वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन की इस कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन वाइल्ड लाइफ के तौर पर वन्य जीव विशेषग्य एवं दुधवा लाइव जर्नल के संस्थापक सम्पादक ने अपने व्याख्यान में जैव विविधिता के सरंक्षण पर जोर देते हुए कहा की एक बरगद और पीपल जैसे विशाल वृक्ष अपने आप में एक इकोसिस्टम होते है जहाँ न जाने कितनी प्रजातियाँ अपना जीवन चक्र संचालित करती हैं, उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित छात छात्राओं को श्रीमती इंदिरा गांधी के बारें में प्रमुखता से बताया, की उन्होंने कैसे १९७२ में वाइल्ड लाइफ एक्ट बनाया, १९७३ में प्रोजेक्ट टाइगर, इमरजेंसी जैसी हलचल के समय भी वह प्रधानमंत्री होते हुए भी प्रकृति प्रेम को नही भूली और १९७६ में वन एवं पर्यावरण से सम्बंधित एक फेडरल डिपार्टमेंट की स्थापना की जो बाद में सन १९८५ में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के तौर पर स्थापित हुआ, साथ ही उत्तर प्रदेश में  एक फरवरी सन १९७७ को दुधवा राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना करवाई, और इसी लिए श्रीमती इंदिरा गांधी को तब के अखबार लिखते थे की "ओनली वन मैन इन हर कैबिनेट", श्री मिश्र ने छात्र -छात्राओं को कहाँ की ऐसे महान व्यक्तित्व से प्रेरणा लें और जीवन में आगे बड़े ताकि देश और देश की माटी सदैव शस्य श्यामल रहे. 



कार्यक्रम में उप प्रभागीय वनाधिकारी अमरबहादुर सिंगरौर ने अपने वन्य जीवन के अनुभव साझा किए और इंदिरा गांधी के द्वारा ही लाये गए १९८० के फारेस्ट एक्ट की तारीफ़ की.

सैक्रेड हार्ट इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एवं टेक्नोलॉजी के प्रिंसिपल रेवरेंड साबू ने छात्र छात्राओं को कल के वैज्ञानिक कहकर संबोधित किया, और उन्हें पर्यावरण के हित में कार्य करने की प्रेरणा दी.

सैक्रेड हार्ट डिग्री कोलेज के प्रिंसिपल डेनी मैथ्यू ने कार्यशाला में आये हुए अतिथियों को प्रतीक चिन्ह देकर समानित किया.

वन्य जीवन के सरंक्षण और संवर्धन के विषय पर छात्र छात्राओं ने अपने अपने वक्तव्य दिए और एक डिबेट का सुन्दर संचालन हुआ, विजई प्रतिभागियों को आयोजक समिति ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.

रेडियो दुधवा लाइव डेस्क 

Sep 20, 2016

खुल गए गाँव के नैन...





अद्भुत सौंदर्य 

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खुल गई भोर की खिड़की 
फैला ऊपर  वितान  नीला, 
झरने लगीं  सुनहरी किरणें 
खुल गए गाँव के नैन अधखुले। 
        पीपल, बरगद की छाँव तले 
        आना  जाना  दिन  रैन  चले, 
        हरी दूब पर बिखरे ओस के मोती 
        घूम- घूम  पगडंडी  के  पाँव चले। 
उगे फ़सलों की चंचल काया 
झूमा  रही  पेड़ों  की  छाया , 
पंछी चहके शोर सजा शाखों पर 
सोई  दुनिया उनींदी  जाग  उठी। 
         कमल   खिला  तालाब   में 
         फूल   खिले  क्यारी  क्यारी, 
         अद्भुत   सौंदर्य  ठहरे- ठहरे 
         लगते मनभावन सुबह सबेरे। 
खुल गई भोर की खिड़की 
फैला  ऊपर  वितान नीला, 
झरने  लगीं  सुनहरी  किरणें 
खुल गए गाँव के नैन अधखुले। 

                     
- सुजाता प्रसाद
स्वतंत्र रचनाकार, शिक्षिका (सनराइज एकेडमी) - दिल्ली
sansriti.sujata@gmail.com

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

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क्षमा करो गौरैया...

Image Courtesy: Sue Van Coppenhagen  संस्मरण गौरैया और मैं -- (3) ....डा0 शशि प्रभा बाजपेयी बात उस समय की है जब घर के नाम पर ...

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!