डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Nov 7, 2015

ग्रीनपीस इंडिया का रजिस्ट्रेशन रद्द

ग्रीनपीस इंडिया का रजिस्ट्रेशन रद्द, असहमति जताने के लिए गृह मंत्रालय का असहिष्णु प्रदर्शन

6 नवंबर, 2015। ग्रीनपीस इंडिया सोसाइटी को तमिलनाडु रजिस्टार ऑफ सोसाइटी ने एक नोटिस देकर बताया  गया है कि उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया है। इस वर्ष युनाइटेड नेशन के महासचिव सहित, दुनिया के अनेक गणमान्य लोगों ने कहा है कि सिविल सोसाइटी लोकतंत्र के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है; लेकिन यह नोटिस भारत सरकार द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के अभियान का एक और सबसे हालिया उदाहरण है। पिछले कई महीनों से ग्रीनपीस इंडिया सोसाइटी ने सरकार के विभिन्न महकमें द्वारा लगातार हमले सहे हैं और पुनः कानूनी विकल्प अपनाने पर मजबूर है।

रजिस्ट्रेशन के निरस्तीकरण के बारे में ग्रीनपीस इंडिया की अंतरिम निदेशक विनुता गोपाल का कहना है, “ यह स्पष्ट है कि तमिलनाडु रजिस्ट्रार सोसाइटी पूरी तरह दिल्ली में बैठे गृह मंत्रालय के निर्देश पर काम कर रहा है जो काफी समय से ग्रीनपीस इंडिया को बंद कराने पर तुली हुई है। गृह मंत्रालय द्वारा अभिव्यक्ति की आजादी और असहमति की आवाज को दबाने के यह अदक्ष प्रयास सरकार के लिए न सिर्फ देश में बल्कि विश्व स्तर पर शर्मिंदगी का सबसे बड़ा कारण बन गया है। यह इस बात को दर्शाता है कि सरकार किसी दूसरों की आवाज सुनने को तैयार नहीं है और असहमति के प्रति बहुत ही असिहिष्णु है।”

विनुता ने आगे कहा, “रजिस्ट्रार ने यह फैसला ग्रीनपीस का पक्ष सुने बगैर ही ले लिया। रजिस्ट्रार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को भी नहीं माना है जिसमें उसे आदेश दिया गया था कि वो ग्रीनपीस द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और बिंदुओं पर गौर करे। यह कानूनी प्रक्रिया के उल्लधंन का बहुत ही निंदनीय प्रयास है, जिससे कानून के प्रति उनका निरादर प्रतीत होता है। हमारे पास मजबूत कानूनी आधार है जिसे हम मद्रास हाई कोर्ट को अवगत कराएगें, और इस नोटिस पर स्टे करने की मांग करेगें। हमें पूरा विश्वास है कि हमें कोर्ट से एक बार फिर न्याय मिलेगा।”

अविनाश कुमार,ग्रीनपीस
avinash.kumar@greenpeace.org

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