International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Save Tiger

DON'T LET WILD TIGERS DISAPPEAR

Lady Rosetta

Potatoes with low sugar content and longer shelf life.

अबूझमाड़ के जंगल

जहां बाघ नही नक्सली राज करते हैं

खवासा का आदमखोर

जहां कांपती थी रूह उस नरभक्षी से

जानवर भी करते हैं योग

योगाचार्य धीरज वशिष्ठ का विशेष लेख

Sep 24, 2015

सरकार से ‘स्वच्छ हवा, जन्मसिद्ध अधिकार’ के वादे को पूरा करने की मांग


ग्रीनपीस ने स्वच्छ वायु के लिए शुरू किया राष्ट्रीय अभियान

नई दिल्ली। 23 सिंतबर 2015। ग्रीनपीस ने आज स्वच्छ वायु के लिये एक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की है। पर्यावरण समूह ने सरकार से उसके स्वच्छ वायु जन्मसिद्ध अधिकार के वादे को पूरा करने के लिये पहले कदम के रूप में तत्काल राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (एनएक्यूआई) में सुधार करने की मांग की है। ग्रीनपीस के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक के वर्तमान रूप में कई गंभीर खांमियां हैं: इसका दायरा बहुत ही सीमित हैइसमें पारदर्शिता का अभाव हैव इसके गुणवत्ता आंकड़ों को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने या उपयोगी बनाने के लिये कोई ठोस योजना भी नहीं है।

ग्रीनपीस इंडिया के कैंपेनर नंदीकेश शिवलिंगम के अनुसारराष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांकया एनएक्यूआईको अगर ठीक से लागू किया जाये तो यह एक अत्यंत शक्तिशाली औजार बन सकता है। सटीक जानकारी स्वच्छ हवा के अभियान में पहला महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन हवा की गुणवत्ता के बारे में विश्वसनीय और पारदर्शी जानकारी प्रदान करने से पहले एनएक्यूआई को तत्काल ठीक करने की जरुरत है। सूचकांक से प्राप्त जानकारी के आधार पर जहां एक तरफ लोगों को अधिक सक्रियता से वायु प्रदुषण से बचने के लिये एहतियाती उपाय बताए जाने की जरुरत हैवहीं दूसरी तरफ प्रशासन द्वारा वायु प्रदुषण के मूल कारणों पर विचार भी किया जाना चाहिए।

हाल ही में ग्रीनपीस ने ताजा स्थिति की जांच के दौरान पाया कि एनएक्यूआई को लागू करने के निवेशव बुनियादी ढांचे में काफी अन्तर है। सूचकांक के आकड़ों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिये केवल दिल्ली में 10 निगरानी स्टेशन हैंवहीं चेन्नईबेंगलूर और लखनऊ में तीन-तीन स्टेशन हैंजबकि हैदराबाद में दो स्टेशन हैं और अन्य दस शहरों में केवल एक-एक स्टेशन ही हैं। यही नहीं,दिल्ली में भी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के आकड़े निरर्थक हैं क्योंकि आंकड़ों के प्रसार के लिये कोई व्यवस्था नहीं हैस्थानीय प्रशासन द्वारा सबसे अधिक वायु प्रदुषण वाले दिन से निपटने के लिये कोई साझी योजना नहीं हैऔर न ही इन आकड़ों के आधार पर लोगों को प्रदुषण से निपटने के लिये कोई सूचना दी जाती है।

नंदीकेश का कहना हैराष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक को पूरे देश में लागू करना अच्छा हैबल्कि यह हमारी मांगों में से एक है। लेकिन सबसे जरुरी है कि पहले इस सिस्टम को उचित बुनियादी ढांचे और स्पष्ट कार्य योजना के साथ लागू किया जाय। वर्तमान रूप में राष्ट्रीय वायु सूचकांक एक मौन अलार्म घड़ी की तरह है: चाहे वो सही समय दिखाये या नहींयदि उसकी आवाज ही ना सुनाई दे तो उसका क्या उपयोग है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में दुनिया के 20 सबसे बुरे प्रदुषित शहरों की सूची जारी की हैजिनमें से 13 शहर भारत में है। यह स्पष्ट संकेत है कि वायु प्रदुषण से निपटने के लिये आवश्यक कदम उठाना जरुरी है। ग्रीनपीस ने बंगलोर के चार प्रमुख जगहोंजिनमें क्रिस्ट कॉलेजहौजुर रोडआरबीआई और नरुपथुंगा रोड शामिल हैंपर किये गए वायु गुणवत्ता की निगरानी सर्वेक्षण में चौंकाने वाले परिणाम पाया:  इन जगहों पर आठ घंटे के नमूना अवधि मेंऔसत वायु प्रदुषण के स्तर में पीएम 10 का स्तर भारत सरकार के सुरक्षा सीमा से 13 गुणा और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से 26 गुणा अधिक तक पाया गया। इनमें दो स्थानों पर केन्द्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के सीमा से औसत 1.3 और 2.5 गुणा अधिक पाया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदुषण के इन बढ़ते स्तरों का असर लोगों पर देखा जा रहा हैखासकर बच्चों पर। लेकसाइड अस्पताल, बंगलौर में बच्चों के फेफड़ा और श्वास संबंधित मामलों के विशेषज्ञ बाल विशेषज्ञ डॉ. एच. प्रमेश का कहना है पिछले 15 सालों मेंगर्मी में बंगलोर में 18 साल से कम के बच्चों में अस्थमा की शिकायत में 27 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई हैजबकि गंभीर अस्थमा के मामलों में से 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन बच्चों को लगातार स्टेरॉयड दिये जाते हैंवहीं उन्हें हमेशा चिकित्सक की देखभाल में रखने की जरुरत होती है। खासकरसर्दियों की सुबह जब प्रदुषण का स्तर उच्च होता हैखेलने या व्यायाम करने के क्रम में बच्चों में सांस की बीमारियों के होने के खतरे सबसे ज्यादा होते हैं

नंदीकेश कहते हैंऐसे कई अध्ययन हो रहे हैं जिससे साबित होता है कि देश में अकाल मौतों में वायु प्रदुषण की अहम भूमिका है। इसलिए बहुत जरुरी हो गया है कि लोगों को यह बताया जाए कि उनके द्वारा ली जाने वाली हवा में कितना प्रदुषण हैइसका उनके स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा और किस तरह के एहतियाती कदम उठाने की जरुरत है। स्वच्छ हवा पर हमारा अभियान एक प्रयास है जिससे लोगों को स्वच्छ वायु के अधिकार के लिये जागरुक किया जा सके। सरकार को एक पारदर्शीविश्वसनीय राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक को पूरे देश में लागू करना चाहिएजिससे समय रहते वो वायु प्रदुषण से निपटने के लिये आवश्यक कदम उठाने में सक्षम हो सके।
अविनाश कुमार 
avinash.kumar@greenpeace.org

प्रथम स्वाधीनता संग्राम के चिन्हों को मिटाने की कोशिश



१८५७ में अंग्रजों ने किया था ध्वस्त अब हमारी ही सरकार जमींदोज करने पर उतारू है मितौली गढ़ी को-

लखीमपुर-खीरी: उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में राजा लोने सिंह की गढ़ी मितौली जो जनपद में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम १८५७ का एक मात्र प्रतीक चिन्ह है, उसे जमींदोज करने की कोशिश की जा रही है, जनपद खीरी के मितौली विकास क्षेत्र में मितौली ग्राम सभा के अंतर्गत यह गढ़ी सैकड़ों वर्षों से स्थानीय जनमानस के लिए पूज्यनीय रही है, इस गढ़ी पर सात प्राचीन कुँए और एक शिव मंदिर के साथ ही सैकड़ों वर्ष पुरानी मजार स्थित है, यही वो चिन्ह है जो जंग ए आजादी की याद दिलाते है, मजार और मंदिर पर हजारों लोग बड़े श्रद्धा भाव से आते है, किन्तु २३ सितम्बर सन २०१५ को अचानक एक जे सी बी लाकर गढ़ी पर खुदाई शुरू कर दी गयी, लोग बाग़ भौचक्के थे, बाद में पता चला की खीरी जनपद की नवगठित तहसील के अधिकारियों व् कर्मचारियों के आवास बनाए जाने के लिए यहाँ भूमि का समतली करण किया जा रहा है. स्थानीय जनमानस ने यह जानकारी पाकर सैकड़ों की तादाद में राजा लोने सिंह की गढ़ी पर इकट्ठा हो गए. 


जब स्थानीय विधायक ने विरासत बचाने की पहल-

स्थानीय विधायक सुनील कुमार भार्गव "लाला" ग्रामीणों के बुलावे पर गढ़ी पहुंचे और खुदाई के कार्य को फ़ौरन रुकवा दिया ताकि यह राष्ट्रीय धरोहर हमारे बीच बनी रहे, अभी कुछ दिन पूर्व गढ़ी पर मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ साथ विधायक की अध्यक्षता में जनपद के तमाम गढ़मान्य व्यक्तियों ने यहाँ पौधरोपण किया.

विगत दिनों में प्राथमिक शिक्षक संघ मितौली, अधिवक्ता संघ तहसील मितौली, उत्तर प्रदेश राजस्व संग्रह संघ तहसील मितौली, युवा व्यापार मंडल मितौली, दुधवा लाइव संगठन के सहयोग से यहाँ विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम कराये गए  साथ ही विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपकर उनकी सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगाए गए. स्थानीय लोगों का यह प्रयास रहा है कि सरकार इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे एवं पुरातत्व विभाग इसे राष्ट्रीय धरोहर के तौर पर सरंक्षण प्रदान करे.   

सभी संगठनों और ग्रामवासियों की उत्तर प्रदेश और भारत सरकार से यही मांग है की तहसील आवास कहीं अन्यंत्र बनाए जाए ताकि यह विरासत बची रहे और साथ में ही दो धर्मों के यह प्राचीन स्थल भी.

दुधवा लाइव डेस्क  
  

Sep 11, 2015

दुधवा लाइव एवं प्राथमिक शिक्षक संघ ने लगवाये २१ ट्री- गार्ड


 १८५७ की क्रान्ति के महानायक राजा लोने सिंह की गढ़ी पर पौधरोपण 
जनमानस ने १५८ वर्ष पुराने शिव मंदिर में की पूजा- अर्चना 
सरकार से विरासत को सरंक्षित करने की मांग 

मितौली-खीरी, प्रथम स्वाधीनता दिवस के महानायक राजा लोने सिंह की गढ़ी पर दुधवा लाइव संगठन के संस्थापक सम्पादक एवं राजा लोने सिंह गढ़ी सरंक्षण समिति के संयोजक  कृष्ण कुमार मिश्र ने द्वतीय चरण में आम पीपल नीम अमरुद इमली के पौधे रोपित किए इस कार्यक्रम में पूर्व प्रधान उपेन्द्र सिंह, श्रीकृष्ण भार्गव, युवा व्यापार मंडल अद्यक्ष मितौली अमित गुप्ता, गन्ना समिति के डाइरेक्टर प्रकाश वर्मा, महबूब, नितिन पाण्डेय, मुर्तजा, रामकुमार, खेमकरन ने अपनी भागीदारी की. मितौली गढ़ी पर लोहे के २१ ट्री गार्ड लगाकर पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित की गयी.


पौधरोपण के कार्यक्रम के बाद स्थानीय जनमानस ने २०० की तादाद में आकर गढ़ी पर मौजूद १५८ वर्ष पुराने शिव मंदिर में पूजा अर्चना की , प्राचीन मन्दिर व् गढ़ी के सरंक्षण में मितौली क्षेत्रवासियों ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस महान विरासत को सरंक्षित करने की मांग की.



"गढ़ देवेश्वर महादेव के १५८ वर्ष प्राचीन मंदिर में मितौली का स्थानीय जनमानस"




दुधवा लाइव डेस्क 




Sep 4, 2015

१८५७ की क्रान्ति के महानायक राजा लोने सिंह की गढ़ी को किया जाएगा सरंक्षित



स्थानीय लोग, राजनेता व् कई संगठन विरासत बचाओ अभियान में शामिल-

"शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले 
वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा"

राजा लोने सिंह गढ़ी पर दुधवा लाइव द्वारा कराया गया पौधरोपण-
मितौली खीरी। राजा लोने सिंह गढ़ी सरंक्षण समिति एवं दुधवा लाइव संगठन द्वारा आयोजित पौध रोपण एवं विरासत बचाओं कार्यक्रम के तत्वाधान में विधायक कस्ता विधान सभा सुनील कुमार लाला की अध्यक्षता में राजालोने सिंह गढ़ी सरंक्षण समिति की बैठक आयोजित की गयी जिसमें मितौली के स्थानीय निवासी एवं शिक्षक तथा रोजगार सेवक संगठन के लोगों ने हिस्सा लिया। कस्ता विधायक सुनील कुमार लाला, पूर्व प्रमुख बलबीर सिंह, डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोशिएसन के जिला पदाधिकारी त्रिलोकी नाथ रस्तोगी, मितौली तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश मिश्र एडवोकेट पंकज बाजपेयी उत्तर प्रदेशीय शिक्षक संघ के पदाधिकारी ब्रजकिशोर शुक्ल, प्रशांत पाण्डेय, राजेन्द्र कटियार, कार्यक्रम संयोजक कृष्ण कुमार मिश्र, युवा व्यापार मंडल अध्यक्ष अमित गुप्ता, गणना समिति के डाइरेक्टर प्रकाश वर्मा, वजीउल हसन "अरसी" प्रशिक्षु शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष संदीप वर्मा, उपाध्यक्ष आयुष श्रीवास्तव एवं रोजगार सेवक संघ के प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष अवधेश पाण्डेय ब्लॉक अध्यक्ष सुधाकर पाण्डे ने गढ़ी पर बरगद कनैल इमली बेलपत्र आदि के पौधे रोंपे, कार्यक्रम में 1857 के इस प्रतीक गढ़ी को संरक्षित करने का सकंल्प लिया गया.


गढ़ी पर कस्ता विधानसभा के विधायक सुनील कुमार लाला की अध्यक्षता में हुई विशाल जनसभा-


१८५७ में अंग्रेजों द्वारा तबाह किए हुए उस किले पर राजा लोने सिंह गांधी सरंक्षण समिति की बैठक आयोजित की गयी जिसमे खीरी जनपद के तमाम हिस्सों से आये हुए लोग शामिल हुए, कार्यक्रम की शुरुवात राष्ट्रगान से हुई, इसके बाद गढ़ी पर मौजूद मजार पर विधायक सुनील कुमार भार्गव व् बलबीर सिंह ने चादर चढ़ाई, बैठक में इस ध्वस्त गढ़ी पर मौजूद ऐतिहासिक चिन्हों को बचाने पर चर्चा हुई, बैठक में गढ़ी पर मौजूद प्राचीन शिव मंदिर "गढ़ देवेश्वर महादेव" के जीर्णोद्धार के अतिरिक्त वहां पर एक नल की व्यवस्था किए जाने पर सभी सदस्यों द्वारा सहमति दी गयी, साथ ही विधायक सुनील कुमार भार्गव "लाला" ने लखीमपुर से माइकलगंज जाने वाली जनपद रोड (राजा लोने सिंह मार्ग)  पर गढ़ी के समीप एक राजा लोने सिंह स्मृति द्वार बनवाने की इच्छा भी व्यक्त की ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से देश प्रेम की शिक्षा ले सके.


जनसभा में पूर्व ब्लाक प्रमुख व् राजा लोने सिंह विद्यालय के संस्थापक बलबीर सिंह ने राजा लोने सिंह के राष्ट्र प्रेम और हिन्दू मुस्लिम एकता के साथ लड़े गए उस प्रथम स्वाधीनता संग्राम की विस्तृत व्याख्या की, साथ ही इस विरासत को बचाने में अपना योगदान देने की सहमति जताई। श्री सिंह ने राजा लोने सिंह की गढ़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की मंशा जताई ताकि लोग इतिहास के इस खूबसूरत व् गौरवशाली पहलू को देख सके.



दुधवा लाइव के संस्थापक कृष्ण कुमार मिश्र ने अपने विरासत बचाओ संकल्प में सहयोग देने के लिए आये सभी संगठनों व् स्थानीय जनमानस के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा की हम बहुत जल्द इस गढ़ी को दुनिया के नक़्शे पर नुमाया करेंगे और अपने देश के लोगों को बताएँगे की हमारी धरती पर कैसे महान बलिदानियों ने अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया, श्री मिश्र ने शिव मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ साथ गढ़ी के सबसे ऊंचे टीले पर झंडारोहण का स्थल व् एक विशाल शिलालेख का निर्माण कराए जाने की बात कही जिस पर १८५७ की क्रान्ति के महानायक राजा लोने सिंह की महान वीरगाथा को अंकित किया जाएगा.



  
दुधवा लाइव डेस्क 






नारी पूजते देश में पोर्न की पैरवी करता, अश्लील अर्थवाद है...

इस धरती को जीने योग्य कैसे बनाएँ?
"राम सिंह यादव "

अट्टहास सुन रहे हो काल का????

अबूझ गति 
खंड की 
जो क्षण का वेग है।।।।।।

अनसुलझे किस्सों में
हिन्दू - मुसलमान हैं...........
असंख्य धर्म हैं
अनंत मर्यादाएं हैं..........
सब जीवंत हैं और सब मृत भी.........

शिव के शाश्वत ब्रह्मांड में युगों से लिखी लहरियाँ हैं
राक्षसों की मौत है, देवताओं की विजय है...

रावण की ढहती सोने की लंका है,
समुद्र को लांघता सेतु है,,
बीस दिनों में लौटता विमान है,,,,,
कपि मानव हैं और विभीषण की भूख से एक सभ्यता का अवसान है...........

अगले पड़ाव में योग और मानवता की चरम गीता है,,
प्रकृति और अध्यात्म का संगम है,,,
मानव मस्तिष्क की असीम क्षमताओं का अनुसंधान है,,,,
वर्तमान विज्ञान का साम्राज्य खड़ा करने वाले भारत का 
इसी खंड में ब्रह्मास्त्र से हुआ देहांत है.............

क्षण फिर भी नहीं थमा,,,,

झेलम में गिरते सिकंदर के सवार हैं,,
अशोक की खड़ग में कलिंग की धार है,,,
गजनवी बाबर के हाथों बिखरते नर मुंड हैं,,,,
अकबर के दरबार में धर्मगुरुओं के झुंड हैं,,,
गुरु तेग बहादुर की निकाली जाती आँखें हैं,,,,
दोनों बच्चों को दीवार में चिन कर टूटती साँसे हैं,,,,,,,
औरंगजेब का खलीफ़ाराज और दारा का बहता लहू है,,,,,,
बहादुर शाह जफर के सामने कलेजे के टुकड़ों के शीश भरे थाल हैं.....

लाखों निर्दोषों के खून से बनती दीवार,
भारत के टुकड़े करता हिंदुस्तान और पाकिस्तान है,,,,
गांधी की गिरती देह और निकला शब्द हे राम है..........

आह काल,,,,

तीन पीढ़ियों में अर्श और फर्श का खेल....
शायद तेरा वक़्त फिर आ गया.....
कुछ हिंदुस्तानी हिंदुओं को समझाते हैं,,,
कुछ पाकिस्तानी मुसलमानों को बरगलाते हैं,,,,,
परमाणु बम हैं,,
कश्मीर है,,,
बलूचिस्तान है,,,
अयोध्या है,,,,
मुंबई - कश्मीर को दहलाती बारूद की धूल है,,,
अंधधार्मिकों की गोलियों में पेशावर के फूल हैं,,,,,
तकरीरे हैं, दंगे हैं, मीनारों से आती अज़ान है,,,,
डिस्को में थिरकते भजन हैं,,,,
मोबाइल है, इंटरनेट है,
नारी पूजते देश में पोर्न की पैरवी करता, अश्लील अर्थवाद है,,,,

लोकतन्त्र को पंगु करते समूहों में विदद्वेषता भरते,,,,
चुटकियों में जानें लेते अफवाहों का साम्राज्य है....

आई॰एस॰आई॰एस॰ है,,
कोरिया, युक्रेन, एशिया की सुलगती गाँठ हैं,,,,,

हिंदुस्तान - अमेरिका है,,
चीन - पाकिस्तान है....
मानवता को जन्म देने वाले हिमालय का आर्तनाद है,,,
कैलाश से निकलती जैव शिराओं को रोकते सुरंग और बांध हैं,,,,
धसकती चट्टानें हैं, फटते बादल हैं, ऊर्जा के विघटन से श्रंखला कंपन्न है,,,,,
ब्रह्मपुत्र में गिरते रेडियोधर्मी अवशिष्ट है,,,
चीन का साम्राज्यवादी लक्ष्य है,,,
मूढ़ पाकिस्तान का आत्महंत उन्माद है,,,
मानव मृत्यु के मूल में हिमालय का त्रास है....

डालर - पेट्रोल के भरोसे जन्म लेते स्मार्ट सिटी हैं,,,,
पीपल, बरगद की कीमत पर चौड़ी होती सड़कें हैं,,,,,

संसद में बैठे विधाताओं के राष्ट्रविरोधी षड्यंत्र हैं,,,
भूमि अधिग्रहण की बाट जोहते युवाओं के रोजगार पर दंश है,,,
लाखों एन॰जी॰ओज॰ और क़ानूनों के बावजूद सबसे अधिक भूमि व्यापार है?????
किसकी जीत है और किसकी हार है??????

कर्मठ, समर्पित युवाओं को भटकाते राष्ट्रद्रोह कराते मीडिया, संस्थाओं 
या हथियारों के सौदागरों का घातक कारोबार है,,,,,

कोयले का उपहास करते लोगों के, चारकोल से चमकते दाँत है,,,
कास्टिक, प्लास्टिक और रसायनों से पटी धरती, नदियां और नालियाँ हैं,,
बिल्डिंगों में बदलते तालाब हैं,,,,
झीलों को समेटते चट्टान हैं,,,,,,
बेमौसम बरसात - सूखता सावन है,,
अल निनों - ला निनों में बहलते मौसम वैज्ञानिक हैं.........

सिंथेटिक दूध, रंगी सब्जियाँ, सल्फास से भरे अनाज,,,,
 सेंसेक्स को गिराते अन्न और प्याज़ हैं.........
धरती के भगवानों की चौंधती दुनिया में 
काल्पनिक बीमारियों और दवाइयों से होते मौतों के व्यापार हैं......

विज्ञापन के मायावी संसार में आर्थिक विषमता का आधार है,,
छोटी दुकानें, कुटीर उद्योगों को हाशिये पर लाते,
असंख्य मुनाफा विदेशों में डालते, 
शॉपिंग माल, यूनीलीवर, प्रोक्टर-गैंबल, जॉनसन्स आदि का मायाजाल है........

जनसंख्या, रोजगार और अनाज
को लूटता,,,,
अनैतिकता,,,
मृत मुहाने पर,,,
यह भारतीय उपमहाद्वीप,,,
चीखते, बिलखते नौनिहाल हैं....
डायन कह कर पत्थरों से मारी जाती माएँ...

आरक्षण के आघात से दम तोड़ते मेधावी,,,
अकर्मण्यों की हड़तालें,,,,,,,
मानव को मानव में बांटते 
राजनीतिज्ञों की मूढ़ता का लक्ष्य सर्वनाश है.....

एवरेस्ट विस्थापन, कैलाश के सूखते हिमनद, नेपाल की तबाही, बांगलादेश के चक्रवात, पाकिस्तान की बाढ़
भारतीय उपमहाद्वीप का संताप है..........

धर्म के ठेकेदारों,
जाओ तीन साल के अबोध को भगवान समझाओ,
माँ का महत्व समझ जाओगे,,,,
परदेश से घर का रुख करना 
अपनी किलकारी महसूस करना,,,, धरती माँ को जान जाओगे..........  

आखिर क्यों मार रहे हो भारत को,,
क्या बिगाड़ा है तुम्हारा?????
हजारों सालों से पोसती सभ्यता को उसकी अपनी संतान ने लगाई आग है..............

सड़क के दोनों ओर जैव-नहर-फल वृक्ष की चौड़ी श्रंखला बनाऊँ
या उसे स्मार्ट सिटी का छद्म आवरण पहनाऊँ????

कमियाँ शायद किसी की नहीं 
या फिर प्रारब्ध का खेल...
बादलों की ओट से
आता मृत्यु नाद..........
काल तेरा अट्टहास .....

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियाँ,,,
ब्लू मून की परिकल्पना,,,,,

हे अर्धनारीश्वर,,,,,
तुम्हारा नाद ब्रह्म विज्ञान,,,,,
जीवन सृजन और मानव नाश 
मध्य फंसा कर्म का दास.......

क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा,,,
पाँच तत्व मिली रचेहु सरीरा.......

इस पिंड की गति क्या होगी???

धर्म के पागलपन से दूर कलाम जैसी समाधि
या ईश्वर को सिद्ध करते दंगे में अंग-भंग वाली अस्पताल की जिंदगी.....?????

मेरे यहाँ तो कृष्ण भी भगवान थे और कलाम भी भगवान हैं,,,,
मानवता को सबसे ऊपर रखते प्रत्यक्ष परम आत्मा का सम्मान है,,,,,,

क्यों आंखे बंद कर उसको मानूँ 
क्यों उसके पीछे जान दूँ और जान लूँ
पैदा करने वाला तो एक ही है ना ???
फिर क्यों लड़ते इंसान हैं ?????????

किसको दोष दूँ???
उस सवाल का जवाब कैसे दूँ??
धरती को जीने योग्य कैसे बनाया जाये???

या 

इस सवाल को भारत संतति के लिए छोड़ दूँ?????

काल,,,, 
तुम्हारी लेखनी से शायद फिर कुछ छप रहा है???????????????????


वन क्रांति - जन क्रांति
           
राम सिंह यादव (कानपुर, भारत)
yadav.rsingh@gmail.com
             www.theforestrevolution.blogspot.com

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था