डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 02, February 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Sep 24, 2015

प्रथम स्वाधीनता संग्राम के चिन्हों को मिटाने की कोशिश



१८५७ में अंग्रजों ने किया था ध्वस्त अब हमारी ही सरकार जमींदोज करने पर उतारू है मितौली गढ़ी को-

लखीमपुर-खीरी: उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में राजा लोने सिंह की गढ़ी मितौली जो जनपद में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम १८५७ का एक मात्र प्रतीक चिन्ह है, उसे जमींदोज करने की कोशिश की जा रही है, जनपद खीरी के मितौली विकास क्षेत्र में मितौली ग्राम सभा के अंतर्गत यह गढ़ी सैकड़ों वर्षों से स्थानीय जनमानस के लिए पूज्यनीय रही है, इस गढ़ी पर सात प्राचीन कुँए और एक शिव मंदिर के साथ ही सैकड़ों वर्ष पुरानी मजार स्थित है, यही वो चिन्ह है जो जंग ए आजादी की याद दिलाते है, मजार और मंदिर पर हजारों लोग बड़े श्रद्धा भाव से आते है, किन्तु २३ सितम्बर सन २०१५ को अचानक एक जे सी बी लाकर गढ़ी पर खुदाई शुरू कर दी गयी, लोग बाग़ भौचक्के थे, बाद में पता चला की खीरी जनपद की नवगठित तहसील के अधिकारियों व् कर्मचारियों के आवास बनाए जाने के लिए यहाँ भूमि का समतली करण किया जा रहा है. स्थानीय जनमानस ने यह जानकारी पाकर सैकड़ों की तादाद में राजा लोने सिंह की गढ़ी पर इकट्ठा हो गए. 


जब स्थानीय विधायक ने विरासत बचाने की पहल-

स्थानीय विधायक सुनील कुमार भार्गव "लाला" ग्रामीणों के बुलावे पर गढ़ी पहुंचे और खुदाई के कार्य को फ़ौरन रुकवा दिया ताकि यह राष्ट्रीय धरोहर हमारे बीच बनी रहे, अभी कुछ दिन पूर्व गढ़ी पर मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ साथ विधायक की अध्यक्षता में जनपद के तमाम गढ़मान्य व्यक्तियों ने यहाँ पौधरोपण किया.

विगत दिनों में प्राथमिक शिक्षक संघ मितौली, अधिवक्ता संघ तहसील मितौली, उत्तर प्रदेश राजस्व संग्रह संघ तहसील मितौली, युवा व्यापार मंडल मितौली, दुधवा लाइव संगठन के सहयोग से यहाँ विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम कराये गए  साथ ही विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपकर उनकी सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगाए गए. स्थानीय लोगों का यह प्रयास रहा है कि सरकार इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे एवं पुरातत्व विभाग इसे राष्ट्रीय धरोहर के तौर पर सरंक्षण प्रदान करे.   

सभी संगठनों और ग्रामवासियों की उत्तर प्रदेश और भारत सरकार से यही मांग है की तहसील आवास कहीं अन्यंत्र बनाए जाए ताकि यह विरासत बची रहे और साथ में ही दो धर्मों के यह प्राचीन स्थल भी.

दुधवा लाइव डेस्क  
  

0 comments:

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Featured Post

क्षमा करो गौरैया...

Image Courtesy: Sue Van Coppenhagen  संस्मरण गौरैया और मैं -- (3) ....डा0 शशि प्रभा बाजपेयी बात उस समय की है जब घर के नाम पर ...

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!