International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Jun 17, 2014

ये है किशनपुर वन्य जीव विहार की खूबसूरत बाघिन

किशनपुर वन्य जीव विहार लखीमपुर खीरी में स्थित है, मौजूदा  वक्त में यह दुधवा टाइगर रिजर्व का भी हिस्सा है, शारदा नदी के निकट झादी ताल मुख्य आकर्षण का केंद्र है यहां, वजह यहाँ मौजूद बारहसिंघा की अच्छी तादाद और  बाघों का इस ताल के आसपास विचरण, किन्तु यहां बाघों व् अन्य जीवों के शिकार की घटनाएं  होती रही है, स्थानीय गाँवों के अपराधिक लोगों विशेषत: क्रिमिनल ट्राइब्स और वन्य जीव अपराधियों की साठ - गाँठ हमेशा इस वन्य जीव विहार के जीवों के लिए ख़तरा बना हुआ है. जंगल के बफर जोन में भूमि अतिक्रमणकारी भी किशनपुर के वन्य जीवन के लिए दुश्मन बने हुए है. मानव और वन्य जीवों के मध्य यहां संघर्ष जारी है, गुनहगार मानव ही जीतता है इस जंग में, जो इन जीवों के आवासों और इनकी जिंदगियों का दुश्मन है.
गर्मियों में बाघों व् अन्य वन्य जीवों के लिए सेंक्चुरी में पानी के स्रोतों की अत्यधिक आवश्यकता है. और  सुरक्षा की भी. ताकि खीरी के ये वन सदैव इस धारीदार चमकीले पीतवर्ण व् साहस के प्रतीक जंगल के राजा बाघ की प्रजाति को सरंक्षित रख सके.....

डॉ धर्मेन्द्र सिंह के कैमरे की नज़र से .......(सभी तस्वीरें: डॉ धर्मेन्द्र सिंह)












डॉ धर्मेन्द्र सिंह ( वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर, जंगलों में नियमित भ्रमण, पेशे से आटोलैरिंगोलॉजिस्ट (ई इन टी सर्जन) लखीमपुर खीरी में निवास, इनसे dharmusingh.balyan@facebook.com पर संपर्क  कर सकते हैं)

1 comment:

  1. Superb and Stunning Photographs! (Uruj Shahid)

    ReplyDelete

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था