डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Jun 18, 2014

प्रणय युद्ध में दुधवा के जंगल में हुई हाथी की मौत




तीन डाक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टम
फोटो: दुधवा क्षेत्र के बांकेंताल में मृत पड़ा हाथी का शव



दुधवा-खीरी से, डीपी मिश्र। दुधवा नेशनल पार्क के इतिहास में पहली बार दो नर हाथियों के बीच बांकेताल के पास हुए प्रणय युद्ध में एक युवा हाथी को अपनी जान असमय गंवानी पड़ गई। हाथी की मौत से पार्क प्रशासन में खासा हड़कंप मच गया है। सूचना पर दुधवा के एफडी शैलेष प्रसाद, डीडी वीके सिंह आदि मौके पर पहुंच गए एवं घटनास्थल का निरीक्षण किया। तीन डाक्टरों के पैनल से हाथी केशव का पोस्टमार्टम किया है। जिसमें मौत का कारण घावों से अधिक खून का बह जाना बताया गया है। हाथी के शव को पार्क अधिकारियों ने अपनी देखरेख में दफन करा दिया है।

यूपी के एकमात्र दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में चार दर्जन से ऊपर हाथियों का दल स्वच्छंद विचरण कर रहा है। इस दल में शामिल दो युवा नर हाथियों के बीच बांकेताल के पास प्रणय को लेकर बलशाली साबित करने के लिए हुए युद्ध में कमजोर पड़े एक हाथी की मौत हो गयी। पार्क के इतिहास में प्रणय युद्ध में पहली बार हाथी की मौत की हुई घटना से दुधवा पार्क प्रशासन में खासा हड़कंप मच गया। सूचना पर दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर शैलेष प्रसाद, डिप्टी डायरेक्टर वीके सिंह, बेलरायां वार्डन आनंद कुमार, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ समन्वयक डाॅ मुदित गुप्ता आदि मौके पर पहुंच गए एवं घटनास्थल का गहनता से निरीक्षण किया। डब्ल्यूटीआई के डाॅ सौरभ सिंघई तथा राजकीय पशु चिकित्सालय सूंडा के डाॅ वीआर निगम, खजुरिया के डाॅ नीरज गुप्ता ने हाथी के शव का परीक्षण किया। लगभग दस-बारह वर्ष की आयु वाले हाथी की मौत का कारण अधिक रक्तस्त्राव बताया गया है। उसके गले तथा पिछले हिस्से में हाथी दांत के गहरे निशान मिले हैं। बीते रविवार को दोपहर बाद दो से चार बजे के आसपास हाथी की मौत होने के समय का अनुमान लगाया गया है। दुधवा के डिप्टी डायरेक्टर वीके सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव को मौके पर निगरानी में ही दफन करा दिया गया है।


देवेन्द्र प्रकाश मिश्र 
पलिया - खीरी 
dpmishra7@gmail.com

----------------------------------------------------------------------------

0 comments:

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Featured Post

क्षमा करो गौरैया...

Image Courtesy: Sue Van Coppenhagen  संस्मरण गौरैया और मैं -- (3) ....डा0 शशि प्रभा बाजपेयी बात उस समय की है जब घर के नाम पर ...

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!