International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Dec 25, 2011

जब बाघिन पहुंची स्कूल में अपने बच्चों को मिड डे मील खिलाने !


Photo Courtesy: desktopnexus.com
शावकों के साथ स्कूल पहुंच गई बाघिन, भगदड़


तिकुनिया-खीरी। जंगल से निकलकर शनिवार को एक बाघिन जूनियर हाई स्कूल में पहुंच गई। उसके साथ दो शावक भी थे। वहां खाना बन रहा था। बाघिन के पहुंचने पर स्कूल में अफ़रा -तफ़री मच गई। किसी तरह बच्चों ने कमरे में खुद को बंदकर अपनी जान बचाई। बाघिन करीब आधे घंटे तक स्कूल में रूकी रही।

ये घटना शनिवार की दोपहर खरौटिया ग्रामसभा के मजरा चक्करपुर की है। जंगल से निकलकर एक बाघिन अपने दो शावको के साथ जूनियर हाई स्कूल के परिसर सएं पहुंच गई। बता दे कि चक्करपुर में दो सप्ताह पहले भी बाघिन अपने शावकों के साथ बलविन्दर सिंह के झाले पर पहुंच गई थी। शुक्रवार को शाम भी यह बाघिन अपने शावको के साथ शाम करीब सात बजे चक्करपुर गांव में अपनी आमद दर्ज करा चुकी थी। दोपहर में जब बाघिन अपने शावको के साथ स्कूल पहुंची। उस समय बच्चो के लिए खाना बन रहा था। बाघिन व शावको को देखकर स्कूल के बच्चे काफ़ी डर गये। बाघिन के डर बच्चो ने स्कूल के कमरों में खुद को बन्द कर लिया। इस दौरान बच्चो की चीख पुकार सुनकर ग्रामीण पहुचे लेकिन बाघिन के जमे रहने के कारण ग्रामीण कुछ नही कर पाये। आधे घंटे बाद बाघिन वापस लौट गई।


साभार: हिन्दुस्तान दैनिक बरेली-लखीमपुर दिनांक- 25 दिसंबर 2011 पेज-03

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