International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Jan 3, 2016

बाघों के महान सरंक्षक कुंवर अर्जन सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित बाघ सरंक्षण कार्यशाला


दुधवा नेशनल पार्क के संस्थापक थे बिली अर्जन सिंह 
 जंगल में स्थित टाइगर हैवन में बाघिन और तेंदुओं के साथ रहते थे बिली 

दुधवा-खीरी। नववर्ष के आरम्भ में पहली जनवरी 2016 को पलिया सम्पूर्णानगर रोड पर स्थित जसबीर नगर में पद्म भूषण बिली अर्जन सिंह की याद में दुधवा लाइव के बैनर तले के के मिश्र के संयोजन में बाघ सरंक्षण जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आयोजक शमिन्दर बोपाराय थे जिन्होंने बिली अर्जन सिंह पर एक किताब लिखी "टाइगर ऑफ दुधवा" और वह मौजूदा वक्त में बिली के घर को संग्रहालय के रूप में विकसित कर रहे हैं।

बिली अर्जन सिंह की सातवीं पुण्य तिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम में दुधवा के उपनिदेशक पी पी सिंह, स्थानीय विधायक रोमी साहनी, पलिया ब्लॉक प्रमुख जॉर्जी, वनस्पतिविज्ञान प्रवक्ता ब्रजेंद्र प्रताप सिंह अभय मिश्रा के अलावा महाविद्यालयों के स्नातक स्तर के सैकड़ों छात्र छात्राओं ने भाग लिया।


कार्यक्रम की शुरुवात बिली अर्जुन सिंह के टाइगर हैवन पर स्थित उनकी समाधि पर पुष्पांजलि से हुई फिर जसबीर नगर में उनकी तस्वीर पर स्थानीय निवासियों एवं कार्यक्रम में आये हुए गणमान्य व्यक्तियों ने पुष्प अर्पित कर कुंवर अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि दी।


कार्यशाला की शुरुवात सर्वप्रथम दुधवा के उपनिदेशक ने की उन्होंने बिली के साथ अपने एक दशक से अधिक बिताये समय में दुधवा और यहाँ के बाघों के बारे में तमाम संस्मरण सुनाए और विद्यार्थियों को बाघ और जंगल बचाने की प्रेरणा दी।

विधायक रोमी साहनी ने कहा की बिली अर्जन जैसी अंतर्राष्ट्रीय शख्सियत के बारे में नई पीढ़ी को सबक लेना चाहिए ताकि हम अपने वन्य जीवन को सरंक्षित कर सके।

बिली अर्जन सिंह की धरोहर को सरंक्षित करने वाले शमिन्दर बोपाराय ने कहा कि वह इस जगह को बिली साहब के स्मारक के तौर पर विकसित करेंगे। और वह बिली और उनकी बाघिन तारा पर एक फिल्म निर्माण के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे है.

पलिया के ब्लॉक प्रमुख जॉर्जी ने अर्जन सिंह के बाघों को बचाने के जूनून के कई किस्से बताये।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और छात्रों को बिली अर्जन सिंह और बाघ व् तेंदुओं पर किए गए उनके प्रयोगों से सम्बंधित फिल्में दिखाई गयी।

कार्क्रम का संचालन बिली अर्जन सिंह के नजदीक रहे वन्य जीव विशेषज्ञ के के मिश्र ने किया और उन्होंने बताया 16 वर्षों से अधिक समय में उन्होंने बिली अर्जन सिंह के सानिध्य में रहकर बाघ सरंक्षण की जो प्रेरणा उन्हें मिली वह उनके जीवन का आदर्श है। मिश्र ने बताया की बिली की किताबे और उनके महान कार्य हमें अगली पीढ़ी में पहुंचाना है और हमारे जंगलों को संवर्धित करना है


गौर तलब है की बिली ने एक बाघिन तारा और तीन तेंदुओं को जंगल में पुनर्वासित किया। यह दुनिया में अकेला सफल प्रयोग है जो बिली अर्जन सिंह ने कर दिखाया। 

डेस्क 

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