डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Oct 26, 2015

पेड़ से बह रहा है खून... !

रेहुवा में इसी पेड़ से हो रहा है लाल रंग के द्रव का स्राव
खमरिया-खीरी।
धौरहरा क्षेत्र के रेहुवा गांव में सेमल के पेड़ से लाल रंग के द्रव का रिसाव होते देख लोगों में कौतूहल मच गया।देखते ही देखते सैकड़ों लोग मौके पर पहुंच गए और पूजापाठ व इबादत शुरू कर दी।हालांकि वनस्पति विज्ञानी इसे वनस्पति जगत की रासायनिक अभिक्रिया मान रहे हैं।यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक किसान अपने खेत में लगा सेमल का पेड़ काट रहा था।लाल रंग का स्राव देख किसान उसी जगह बेहोश हो गया।होश में आने पर जब उसने लोगों को यह जानकारी दी तो वहां मेला लग गया।देखते ही देखते वहां प्रसाद,धूप-दीप और रुपए चढ़ाए जाने लगे।


सोमवार की सुबह रेहुवा गांव निवासी सतीश वर्मा अपने खेत में लगा सेमल का पेड़ काटने पहुंचे।सतीश ने पेड़ पर कुल्हाड़ी से चन्द वार ही किए थे कि सेमल की जड़ में जहाँ से पेड़ काटने की कोशिशें शुरू हुई थीं।वहां से लाल रंग का द्रव बहने लगा।जिसे खून समझ कर सतीश बेहोश हो गया।होश में आने के बाद सतीश गांव पहुंचा और लोगों को पूरा वाकया बताया।जंगल की आग की तरह खबर फैलते ही आस पास के गावों के सैकड़ों लोग मौके पर पहुँच गए और वहां पूजा पाठ शुरू कर दिया।इसी बीच मौके पर एक शाश्त्री जी और एक मौलाना साहब भी पहुंच गए।कोई यहां मन्दिर बनाने की बात करने लगा तो कोई मजार।देखते ही देखते हजारों रुपए भी पेड़ की जड़ में चढ़ गए।


इस सम्बन्ध में पर्यावरणविद् केके मिश्रा ने बताया कि प्रकृति में रहस्यों की भरमार है फिर भी विज्ञान जितना जान पाता है उसे परिभाषित करता है अपने मुताबिक़, फिर भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण में यह स्राव खून का नहीं हो सकता, वनस्पति जगत में रासायनिक अभिक्रियाओं के चलते ऐसा होता है, उन्होंने बताया कि पेड़ों में टैनिन पाया जाता हो जो पेड़ पौधों को बाहरी खतरों से सुरक्षा प्रदान करता है।पेड़ को काटने पर टैनिन का स्राव होता है।यह लाल,दूधिया,सफेद और हल्के पीले रंग का होता है।रक्त जैसे रंग का होना एक स्वाभाविक रासायनिक अभिक्रिया है।जिसके तहत टैनिन जब आयरन और ऑक्सीजन के संपर्क में आता है तब अपने अंदर मौजूद कुछ विशेष प्रकार के खनिज तत्वों और प्रोटीन के कारण टैनिन लाल रंग का खून जैसा हो जाता है।इसके अलावा पेड़ों की जड़ों के आस पास कुछ फंगस उग आते हैं।फंगस के स्पोर जब कटते हैं तब वे लाल रंग का स्राव करते हैं। जिसे लोग खून मान लेते हैं।


बहरहाल वानस्पतिक तथ्यों और लोगों की भावनाओं के बीच रेहुवा में जंग जारी है।जहाँ लोग इसे पूरी तरह आस्था के साथ जोड़ बैठे हैं।

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रमेश मिश्र (एक प्रतिष्ठित अखबार में पत्रकारिता, खीरी जनपद के धौरहरा तहसील के अंतर्गत खमरिया गाँव में निवास )
098394339107

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