International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Dec 20, 2013

आखिरकार.. मानव जंगलों में भागकर अपनी जान बचा रहा था !

Photo Courtesy: NASA

प्रकृति के विनाश की पुरजोर कोशिशो में  लगा मानव और इन भयावह हालातों पर वेदनाओं की बेहतरीन अभिव्यक्ति की राम सिंह यादव ने अपनी कलम से..... कुछ इस तरह की हम जिस बुनियाद पर कायम है उसे ही नस्तेनाबूत किए जा रहे है !।. संपादक 
*********

अरे ओ, कलम के देवताओं
सुना है तुम इतिहास लिखते हो ?
वर्तमान को शिक्षा देते हुए
भविष्य का आईना दिखाते हो ?

क्या यह हकीकत है
कि तुम वो देवता हो, जो दुनिया बचाते हो ?

हाँ शायद ये सच है
पालने से लेकर मृत्यु शैयया पर लेटा-मानव
तुम्हारी लिखी इबारतों का
अनुसरण करता है।
तुम्हारी लिखी धुरी पर
उसका चक्र पूरा होता है।।

तुम लिखते हो,
भगवान का स्वरूप ऐसा है........
वो मान लेता है।।
तुम लिखते हो,
मुजफ्फर नगर दंगा इसने कराया
पांच सौ कोस दूर बैठा अनजान मानव,,,,,,,,
विरोधी सम्प्रदाय वालों को मारने लगता है। 

  
तुम लिखते हो,
विकास का स्वरूप ऐसा है
चैड़ी सड़कें, गगनचुंबी अट्टालिकाएं,
सीमेन्ट और डामर से पटे ऊसर मैदान......
रोशनी से नहाते शहर.......
आह व्यावसायिक मानव का, खूबसूरत और नयनाभिराम सपना.......।।।।


पर क्या तुमने लिखा........
भूमिजल खत्म होने का मुख्य कारण ??
क्या तुम लिखोगे ?
दस मंजिल ऊपर रहने वाला
कृत्रिम बिजली खत्म होने पर
दो सौ फीट गहरा पानी कैसे पीयेगा ??

  

क्या तुमने लिखा,
झूठे विज्ञापनों के दम पर
क्षणिक स्वच्छता दिखाने वाले............
लाइफबाय, लक्स, हार्पिक, विम, रिन,
लइजाल, क्लीनिक प्लस वगैरह वगैरह ने.......
नालियों और नदियों का क्या हश्र किया ????

अब इस पानी में कोई 
मछली नही है
जो मच्छरों के लार्वा को खा सके
और मानव को डेंगू से बचा सके..........

अब इस रासायनिक जल में मरे हुये
असंख्य जीवों से उत्पन्न.....
मानव कवलित करने वाली
मीथेन आदि गैसो का साम्राज्य है ।।




क्या तुमने लिखा,,,,,,
उत्तराखण्ड त्रासदी के जिम्मेदार
मानव निर्मित सैकड़ों बांध........ 
जो असंख्य लहलहाते पेड़ों को 
काट कर हो रहे थे...........
हास्यास्पद था देखना
काल का ग्रास बना मानव......
जंगलों मे भागकर
जान बचा रहा था ।।।


क्या तुमने लिखा ?
जापान का अंजाम देख कर भी
लालची नेताओं द्वारा एटमी करार का महिमा मंडन.........
किस भविश्य को परिलक्षित कर रहा है ????

   


क्या तुमने लिखा ???
सद्दाम से लेकर लादेन तक ??
सीरिया, इराक, अफगानिस्तान,
रूस, जापान, ईरान, लीबिया, वियतनाम,
कोरिया या पाकिस्तान........
इन बिके पत्रकारों के दिखाते झूठ पर ????


क्या तुमने लिखा ???
सभ्यताओं को नष्ट करना
और उसके पीछे छिपा
साम्राज्यवाद का लक्ष्य ???

क्या तुमने लिखा ???
एटम बम, जैविक-रासायनिक हथियार,
ड्रोन इत्यादि का प्रयोग किसने किया ??

   

क्या तुमने लिखा ???
किसने हथियारों की होड़ बढाई ??
किसने अंतरिक्ष से लेकर अंटार्टिका तक
पारिस्थितिकी तंत्र को बर्बाद किया ??
किसने पेप्सी जैसे पेयों से
बच्चों तक को कैंसर बांटे ???

अब तो हद हो चुकी......
तुम्हारी लेखनी की अब जरूरत नही........
मानव दूसरी प्रकृति बना रहा.......
हार्प प्रोग्राम से हैयान तो शुरूआत मात्र थी......

     

मानव का अनंतमि लालच.......
स्वयं मानव सम्यता के लिये,
दो गज जमीन पर खत्म होने जा रहा।।

   

क्या तुम लिख सकोगे ??????
प्रकृति के विरूद्ध अजेय सम्यताएं............
आज समंदर की गहराईयों
या परतों में दबी कहानियां सुना रही हैं।।।।।।। 
वन क्रान्ति-जन क्रान्ति 
**********

लेखक: राम सिंह यादव 
संपर्क: yadav.rsingh@gmail.com 

0 comments:

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था