International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Dec 6, 2013

दुधवा नेशनल पार्क में बाघ ने गैंडा बच्चे को मौत के घाट उतारा

Image Courtesy:  greater one-horned rhino with baby via Shutterstock & planetsave.com

विश्व की इकलौती है दुधवा गैंडा पुनर्वास परियोजना

-दुधवा नेशनल पार्क से डीपी मिश्र

लखीमपुर-खीरी। यूपी के मात्र दुधवा नॅशनल पार्क के सोनारीपुर वनरेंज के ककराहा जंगल में बाघ ने चौदह माह के गैंडा बच्चे को मार डाला है। इस सूचना से पार्क प्रशासन में हड़कम्प मच गया है। मौके पर पहुंचे डिप्टी डायरेक्टर ने घटना स्थल का निरीक्षण किया। तीन डाक्टरों के पैनल ने शव  का पोस्टमार्टम किया है। इसके बाद शव  को दफन कर दिया गया। इस घटना से दुधवा के 32 सदस्यीय गैंडा परिवार की सुरक्षा पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है।

दुधवा नेशनल पार्क के सोनारीपुर वनरेंज के तहत 27 वर्गकिमी के जंगल में सौरउर्जा से संरक्षित इलाका में विश्व की एकमात्र गैंडा पुनर्वास परियोजना चल रही है। इसमें 33 सदस्यीय गैंडा परिवार स्वछंद कर रहा है। बीते दिवस बाघ ने मादा गैंडा ‘सदा‘ के चैदह माह के फीमेल बच्चे पर हमला करके उसे मौत के घाट उतार दिया। हाथी से गैंडों की मानीटरिंग में जंगल गई टीम को गैंडा के बच्चे का क्षत बिछत षव ककराहा के जंगल में पड़ा दिखाई दिया। बाघ द्वारा गैंडा के बच्चे का षिकार किए जाने की मिली सूचना पर पार्क प्रषासन में हड़कम्प मच गया। दुधवा नॅशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर बीके सिंह, बेलरायां वार्डन एके श्रीवास्तव, सोनारीपुर रेंजर एमके शुक्ला आदि मौके पर पहुंच गए और घटना स्थल का निरीक्षण किया। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के गैंडा विशेषज्ञ रूचिर की देखरेख में डब्ल्यूटीआई के डाक्टर सौरभ सिंघई, डाक्टर नेहा सिंघई और राजकीय पषु चिकित्साधिकारी डाक्टर राजेष निगम ने क्षत बिछत गैंडा के बच्चे के षव का पोस्टमार्टम किया। डाक्टरों की टीम ने बच्चे की उम्र लगभग चैदह माह बताई है। बाद में वार्डन एके श्रीवास्तव ने अपनी देखरेख में षव को दफन करा दिया। 

इससे पहले इसी साल 9 जनवरी को बाघ ने ककराहा क्षेत्र के जंगल में मादा गैंडा पावित्री के एक माह के बच्चे को मार डाला था। और 29 जनवरी को दुसाहसी बाघ ने फिर से मादा गैंडा पावित्री पर हमला करके मौत के घाट उतार दिया था। जबकि इससे पहले 10 दिसम्बर 2012 में बाघ ने दीपा नामक मादा गैंडा पर हमला करके उसे बुरी तरह से घायल कर दिया था। बाघ द्वारा गैंडों पर किए जाने वाले ताबड़तोड़ हमलों के कारण गैंडों के लिए अब संरक्षित जंगल उनके लिए सुरक्षित नहीं रह गया है, साथ ही गैंडा परिवार की सुरक्षा पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर बीके सिंह ने बताया कि इस घटना का गंभीरता से गैंडों को सुरक्षा बढ़ा दी गई है साथ ही स्टाफ को सतर्कता बरतने और लगातार निगरानी करने के आदेश दिए गए हैं।

देवेन्द्र प्रकाश मिश्र 
dpmishra7@gmail.com

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