डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Apr 30, 2011

अरे वे तो उसी के रंग में रंग गये !

एक पहेली-
जानवर और वृक्ष- एक जैसी शक्ल-ओ-सूरत !
वनस्पति और जन्तु जो ढल गये एक ही शक्ल-ओ-सूरत में आखिर कैसे और क्यों ? 
जवाब आप से चाहिए !

मदार के पौधे के इस गहरे हरे रंग के माँसल पत्ते पर पर यह कौन ? सा जीव है जिसकी वाह्य सरंचना हूबहू मदार के इस पत्ते की तरह है ! क्या आप बतायेंगे इस खूबसूरत रचना का नाम जिसे प्रकृति ने कभी गढा था ।


Photo by: © Krishna Kumar Mishra


 प्रकृति के इस रूप को पहचानिए और अपने एहसासातों को जरूर जाहिर करिए दुधवा लाइव के माध्यम से...वैज्ञानिक नज़रिए के अलावा प्रकृति की इस सुन्दर कृति की अतुलनीयता, साज-सज्जा, एवं अनकहे रहस्यों को परिभाषित अवश्य करें ।

हमें इन्तजार है आप की महत्वपूर्ण टिप्पड़ियों का !

 
दुधवा लाइव डेस्क




1 comments:

Sunil said...

waah !!!! bahut khoob!!!!

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आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
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पर्यावरण

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देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

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दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

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भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
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