International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Feb 9, 2011

यहाँ तो निगेहबान ही चोर निकले..!

©dudhwalive.com
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में काटे गये शाखू के पेड़...
अफ़सर और कर्मचारियों की मिलीभगत हुई उजागर
दुधवा के तीन फ़ारेस्ट गार्ड भेजे गये जेल
भारत-नेपाल सीमा से सटे दुधवा नेशनल पार्क के जंगल पर हमेशा नेपाली वल माफियाओं का ही दबाव बना रहत था। लेकिन जंगल से पेड़ कटवाने में पार्क कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर होने के प्रथम दृष्टया सबूत मिलने पर पार्क की गौरीफंटा रेंज के वन फारेस्ट गार्डो को वन अधिनियम के साथ ही वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत जेल भेजा गया है।

जनकारी के अनुसार भारत-नेपाल सीमा से सटे दुधवा टाइगर रिजर्व की गौरीफंटा रेंज की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से लगे कीरतपुर बीट नंबर तीन के जंगल में साखू के पेड़ों का अवैध कटान किए जाने की सूचना पर दुधवा के डीडी संजय पाठक ने मौके का निरीक्षण करके जांच पड़ताल की। 

इस दौरान साखू पेड़ की लकड़ी के आठ लट्ठा बरामद हुए। इसके बाद की गईछानबीन एवं पूछताछ के दौरान प्रथम दृष्टया मामला सही पाया गया, जिसपर गौरीफंटा रेंज में तैनात फारेस्ट गार्ड रामदास, राकेश कुमार, राम सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था। अवैध कटान के संगीन मामले में पार्क अधिकारियों की संलिप्तता उजागर होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सीमा पर अवैध कटान निर्वाध गति से जारी है। 

हालांकि डीडी ने संबंधित रेंजर को दफ्तर में जमकर फटकार लगाई और चेतावनी भी दी है। बताया गया कि गिरफ्तार हुए तीनों फारेस्ट गार्डो को वन अधिनियम तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में अभियोग पंजीकृत करके जेल भेज दिया गया है। बरामद लकड़ी की अनुमानित कीमत लगभग एक लाख रूपए बताई गई है।

देवेन्द्र प्रकाश मिश्र (पलिया-खीरी)

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