International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Jul 31, 2010

किशनपुर वन्य जीव विहार में एक तेन्दुए के शिकार की कोशिश!

दुधवा लाइव डेस्क* दुधवा टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत किशनपुर वन्य जीव विहार में शिकारियों ने एक तेन्दुए का शिकार करने की कोशिश की, किशनपुर रेन्ज के निकट गन्ने के खेत में लगभग तीन वर्ष का नर तेन्दुआ शिकारियों द्वारा लगाये गये खुड़के में फंसा पाया गया।


सूत्रों के हवाले से पता चला, कि इस बात की सूचना वन-विभाग  को ग्रामीणों द्वारा पहुंचाई गयी, जब उन्हें खुड़का (आइरन क्लैम्प) में फ़ंसे तेन्दुए की  चीख सुनाई दी।, तब दुधवा प्रशासन हरकत में आया। दुधवा टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक संजय पाठक, किशन्पुर रेन्ज व भीरा रेन्ज के रेन्जर्स सहित वन-विभाग का अमला घटना स्थल पर पहुंचा, जहाँ वाइल्ड लाइफ़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया के डा० मुस्ताक ने तेन्दुए को ट्रन्कुलाइज़ किया। फ़िलहाल तेन्दुए को पिजड़े में कैद कर दुधवा नेशनल पार्क लाया गया है, जहां उसके इलाज का इन्तजाम किया जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेन्दुए का पंजा आइरन जा(खड़का) में फ़से रहने से उसका अगला बायां पैर बुरी तरह से घायल हो चुका है, यदि ग्रामीणों को इसकी खबर न चलती तो तेन्दुए का बचना मुश्किल होता!
इन दिनों बारिश की वजह से दुधवा टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए बन्द किया गया है, और मानसून गस्त आदि की कवायदें जारी है, बावजूद इसके वन्य-प्राणियों का शिकार बदस्तूर जारी है! यह पहली घटना नही है, किशनपुर वन्य-जीव विहार में पिछले कुछ वर्षों में बाघ व तेन्दुए के शिकार के मामले प्रकाश में आये,जहाँ खीरी जनपद में तेन्दुओं की बहुतायात थी वही अब खीरी जनपद में स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में मात्र सात तेन्दुए बचे हुए हैं(वन्य-जीव गणना के अनुसार)।  जिसमें दो वर्ष पूर्व दो तेन्दुए के बच्चे जंगल में पाये गये, उनकी माँ का इन्तजार करने के बाद प्रशासन ने उन्हे लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया जो बड़े हो चुके है और शारदा व सुहेली (दुधवा वन क्षेत्र में पड़ने वाली नदियों के नाम हैं) के नाम से जाने जाते है।
तेन्दुओं की इतनी कम सख्या इस विशाल आरक्षित वन क्षेत्र में चिन्ताजनक है, क्योंकि सन १९८८ से यहां टाइगर प्रोजेक्ट के तहत इन जीवों को सरंक्षण प्राप्त है।
किशनपुर वन्य जीव विहार के अन्दर  व आस-पास तमाम गाँवों के चलते वन्य-जीवों व उनके आवासों पर भारी दबाव है, लेकिन वोट और गोट की राजिनीति में इन गाँवों को विस्थापित नही किया जा रहा है, बावजूद इसके कि तमाम गांवों के लोग इस जगह की दुरूहता से आजिज है, और वह कहीं और बसना चाहते है, बशर्ते सरकार उनकी बुनियादी जरूरतों को देखते हुए उचित मुआबजा दे।
यदि जल्द ही शिकार पर अंकुश न लगा तो तेन्दुआ दुधवा टाइगर रिजर्व समेत पूरे खीरी जनपद में विलुप्त हो जायेगा!

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