International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Mar 20, 2018

राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम

राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम को तत्काल लागू करने की उठी मांग, पर्यावरण कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन


ऩई दिल्ली। 20 मार्च 2018। मंगलवार को कई बार प्रदूषण की वजह से बंद किये गए और अब वायु प्रदूषण के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन चुके बदरपुर पावर प्लांट के सामने पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पर्यावरण मंत्रालय से राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम (National Clean Air Program) को सार्वजनिक करने और सभी प्रदूषण के कारकों  को इस योजना में शामिल करने की मांग की, जिससे आगामी तीन सालों में 35 प्रतिशत प्रदूषण को कम करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने थर्मल पावर प्लांट को प्रदूषण की एक बड़ी वजह बताते हुए कोयले से दूरी बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की मांग की।

वहीं दूसरी तरफ मुंबई में भी वाशी पुल पर भी पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने एक बड़ा सा बैनर लहराकर ‘मुंबई क्लिन एयर नाउ’’ की मांग की।

प्रदर्शन में शामिल पर्यावरण कार्यकर्ता रितेश द्विवेदी ने कहा, “हम लोग वायु प्रदूषण की वजह से काफी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं , जिसे आसानी से सही कदम उठाकर ठीक किया जा सकता है। हम यहां इसलिए हैं क्योंकि हमने इस स्थिति को बहुत बर्दाश्त कर लिया है और अब हम इस स्थिति को बदलते हुए देखना चाहते हैं । यह बदलाव तभी आएगा  जब सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास को सार्वजनिक मंच पर रखा जाएगा , जिससे हमें पता चल सके कि हम किस तरफ बढ़ रहे हैं। हम लोग यहां खड़े होकर उन लाखों लोगों के साथ एकजुटता जता रहे हैं जो वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से पीड़ित हैं।”

ग्रीनपीस इंडिया की रिपोर्ट एयरपोक्लिप्स 2 में यह बताया गया है कि देश के 280 शहरों में, जहां वायु प्रदूषण की गुणवत्ता का डाटा उपलब्ध था उनमें से 80 प्रतिशत शहर की हवा गंभीर रुप से प्रदूषित हो चुकी है, 4 करोड़ 70 लाख बच्चे पूरे देश में इससे प्रभावित हैं और 58 करोड़ लोगों की हवा की गुणवत्ता को जांचने के लिये कोई कदम ही नहीं उठाया गया है।

राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम को तुरंत लागू करने की जरुरत है, ऐसा न हो कि यह भी थर्मल पावर प्लांट के लिये बने उत्सर्जन मानकों की अधिसूचना की तरह सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह जाये और जमीनी स्तर पर उसको लागू ही नहीं किया जाये। उत्सर्जन मानकों की अधिसूचना को पर्यावरण मंत्रालय ने साल 2015 में जारी किया था और थर्मल पावर प्लांट से अगले दो साल में इसपर अमल करके प्रदूषण को कम करने को कहा था, लेकिन अभी तक एक भी पावर प्लांट ने इस अधिसूचना को पूरी तरह से लागू नहीं किया है।

राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, इससे यह चिंता उठती है कि फिर कैसे इस कार्यक्रम में लोगों की साझेदारी को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

मुंबई और दिल्ली के प्रदर्शन पर बात करते हुए ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया कहते हैं, “हम यह संदेश देना चाहते हैं कि इस देश के लोग वायु प्रदूषण के खिलाफ एकजुट हैं और अपने जीने के अधिकार के लिये संघर्षरत हैं। हम यह नहीं होने देंगे कि कुछ प्रदूषण फैलानी वाली कंपनियों के हितों की रक्षा के लिये आम लोगों के स्वास्थ्य पर संकट उत्पन्न हो जाये। राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम में भी बड़े प्रदूषक अपना प्रदूषण कैसे कम करेंगे, इस पर कोई चर्चा नहीं की गयी है, जो दिखाता है कि सरकार अभी भी थर्मल पावर प्लांट जैसे प्रदूषकों से निपटने के लिये गंभीर नहीं है। अगर सरकार इस समस्या से निपटने के लिये गंभीर है तो उसे तुरंत राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम को सार्वजनिक करके उसे लागू करने के लिये जल्द-से-जल्द कदम उठाने की जरुरत है।”

अविनाश कुमार
ग्रीनपीस इंडिया
avinash.kumar@greenpeace.org

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