International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Mar 20, 2018

शाहजहांपुर में मिला कूबड़ वाला कटहवा कछुआ



कछुए की खास बातें
=कूबड़ वाले कछुए को हिन्दी में कटहवा और वैज्ञानिक नाम निल्ससोनिया है
=गंगा नदी में इन्हीं कटहवा कछुओं को डाला जाता है, क्योंकि यह मांसाहारी हैं
=सड़ीगली लाशों को खाकर गंगा की सफाई करने में सबसे मददगार है कटहवा
=कटहवा को पालने पर पाबंदी है, पकड़े जाने पर सात साल की सजा का प्रावधान

फोटो : शाहजहांपुर में खन्नौत नदी से मिला कूबड़ वाला दुर्लभ प्रजाति का कछुआ।
शाहजहांपुर। 
कूबड़ वाला कछुआ बहुत ही काम है। इस कछुए को हिन्दी में कटहवा कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम निल्ससोनिया है। इसे कटहवा इसलिए कहते हैं कि क्योंकि मांसाहारी होने के कारण यह कछुआ सख्त से सख्त से हडडी को पलक झपकते काट देता है। इस कछुए को गंगा सफाई के लिए बेहद मुफीद माना जाता है, इसीलिए इस कटहवा कछुए के अंडे संरक्षित कर उसमें से निकलने वाले कछुओं को गंगा में छोड़ा जा रहा है। शाहजहांपुर में जो कूबड़ वाला कछुआ बरामद किया गया है, दरअसल वह कूबड़ किसी बीमारी के चलते ही निकला है। कछुओं के संरक्षण पर काम करने वाली संस्था के सदस्यों ने इस बात पर चिंता जताई है कि कटहवा कछुओं की संख्या लगातार कम होती जा रही है। संस्था के सदस्य भास्कर दीक्षित ने आशंका जताई है कि इस कूबड़ वाली बीमारी के चलते भी कटहवा कछुआ की संख्या कम हो रही है। फिलहाल यह कछुआ अब वन विभाग ने कब्जे में ले लिया है।
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500 रुपए में शिकारी से खरीदा रामबली ने
शाहजहांपुर में खन्नौत नदी से मछली के शिकार के दौरान जाल में एक कछुआ फंस गया था। कछुआ का वजन करीब पंद्रह किलोग्राम है। कछुआ की पीठ पर काफी बड़ा कूबड़ उभरा हुआ था। इस कछुआ के पीठ पर उभरे कूबड़ को लोग शिवलिंग मान कर दर्शन कर रहे थे। इस कछुआ को लालपुल मोक्षधाम के चौकीदार रामबली ने शिकार से खरीदा है, चौकीदार ही कछुआ को संरक्षित रखे हुए था। रामबली ने बताया कि शुक्रवार दोपहर में एक शिकारी ने खन्नौत नदी में जाल फेंका, मछलियों के साथ में जाल में एक कछुआ भी फंस गया। शिकारी मछलियों और कछुआ को लेकर लालपुल मोक्षधाम के सामने से जा रहा था, तभी मोक्षधाम के चौकीदार रामबली और पप्पू ने शिकारी के हाथ में कछुआ देख कर रोका। रामबली ने शिकारी से कछुआ को पांच सौ रुपए में खरीद लिया। इसके बाद रामबली कछुआ को मोक्षधाम के बगीचे में ले आया। वहीं उसके भोजन आदि का इंतजाम किया।
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वन विभाग के अफसर आकर ले गए कछुआ
शनिवार को शाहजहांपुर के लालपुर मोक्षधाम जाकर वन विभाग के अफसरों ने कछुआ को रामबली से कब्जे में ले लिया। रामबली ने पहले तो कछुआ देने से इनकार कर दिया था, लेकिन वन विभाग के अफसरों ने कार्रवाई करने की बात कही तो रामबली ने तुरंत ही कछुआ उनकी सुपुर्दगी में दे दिया। इस मामले में डीएफओ ने बताया कि कछुआ उनके संरक्षण में है। उच्चाधिकारियों के निर्देश का इंतजार है। हालांकि इसके आगे डीएफओ ने कुछ भी नहीं बताया, लेकिन माना जा रहा है कि कछुआ या तो नदी में छोड़ दिया जाएगा या फिर कछुआ को लखनऊ के कुकरैल स्थित संरक्षण में भेजा जा सकता है।
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पालने पर पाबंदी है कटहवा कछुआ को
कटहवा कछुआ कोई साधारण कछुआ नहीं है। इस कटहवा कछुआ को अगर किसी के पास से बरामद किया जाता है तो उस पर उसी धारा में मुकदमा दर्र्ज किया जाता है, जिस धारा में टाइगर की बरामदगी पर होता है। इस कछुआ को रखने या पालने वाले को सात साल तक की सजा का भी प्रावधान है। अन्य सामान्य प्रजाति के कछुओं को पालने और रखने पर कोर्ई पाबंदी नहीं है। लेकिन कटहवा को पाला तो जेल भी जाना पड़ सकता है। 
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गोंडा में कई साल पहले मिला था कूबड़ वाला कटहवा
फोटो : भास्कर दीक्षित
कछुओं के संरक्षण के लिए विश्व के 17 देशों में काम करने वाली संस्था टर्टल सर्वाइवल एलायंस संस्था के तराई इलाके के कोआर्डीनेटर भास्कर दीक्षित बताते हैं कि नदियों में लगातार कटहवा कछुआ कम होता जा रहा है। बताया कि कई साल पहले गोंडा की एक नदी में कम वजन के इसी तरह के कूबड़ कछुआ उन्हें मिला था। भास्कर दीक्षित का मानना है कि कूबड़ किसी बीमारी के चलते ही कटहवा कछुआ में निकल रहा है। उन्होंने संभावना जताई है कि बीमारी के चलते भी कटहवा कछुओं की तादाद कम हो रही है। उन्होंने कहा कि यह शोध का विषय है। बताया कि कटहवा कछुआ नदियों की सफाई में सबसे लाभकारी जीव है। बताया कि इस कछुआ को संरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है। इस कछुआ को गंगा सफाई अभियान में भी इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि यह मांसाहारी है, यह सड़ीगली लाशों को खाकर नदी को साफ करता है।
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साभार : दैनिक हिन्दुस्तान, शाहजहांपुर संस्करण
दिनांक: 18 मार्च 2018
लेखक : विवेक सेंगर, शाहजहांपुर में हिन्दुस्तान अखबार के ब्यूरोचीफ हैं। दैनिक जागरण, अमर उजाला में भी वह सेवाएं दे चुके हैं। मानवीय संवेदनाओं से जुड़े मसलों को जोरशोर से उठाते हैं। जल, जंगल और जमीन के मसलों पर गहरी पकड़ रखते हैं। इनकी खबरों का अंदाज आम आदमी की आमबोलचाल जैसा रहता है।
viveksainger1@gmail.com

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