डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Nov 2, 2014

यू पी में पहली बार देखा गया रेड स्ट्रिप्ड टाइगर माथ


Red Striped Tiger Moth- Cyana bianca

उत्तर भारत के खीरी जनपद में पहली बार देखी गयी यह खूबसूरत प्रजाति 

इस कीट के जहरीले प्रभाव से लोगों में फ़ैल रही है त्वचा की बीमारियाँ..

कहते है धरती अपने दामन में न जाने कितने ज़िंदा रंग समेटे हुए है, और हम उनका लुत्फ़ नहीं ले पाते वजह है नजरिया,... खीरी जनपद के मैलानी क़स्बे एक पत्रकार मित्र सुनील निगम ने आज सुबह मुझे एक तस्वीर भेजी,  ताकि मैं इसकी पहचान कर सकूं, और इसके विषैले प्रभावों का पता लगाया जा सके. मैलानी के जंगली इलाकों में एक रंग बिरंगे जीव की आमद, इस नन्हे जीव की प्रकृति ने पंखों पर लाल धारियां और काले नुक्तों से सजावट की है, 

इस तस्वीर को भेजने की वजह तो खौफनाक है, दक्षिण खीरी वन प्रभाग के शाखू के जंगल के इलाकों में जो रिहाइशी इलाका है, वहां के लोग खौफजादा है इस उड़ने वाले रंग बिरंगे जीव से, बताया जा रहा है की इस जीव के छू जाने से इंसान की चमड़ी में सडन पैदा होना शुरू हो जाती है, और लोग त्वचा की तमाम बीमारियों से बावस्ता हो रहे है.

दरअसल यह रंग बिरंगा जीव एक माथ है, जो लेपिडोप्टेरा वर्ग के आर्कीटीडी फैमिली से ताल्लुक रखता है, इसका जंतु वैज्ञानिक नाम है Cyana bianca, सबसे ख़ास बात है की इस परिवार में तकरीबन ११००० खूबसूरत व् रंगों से लबरेज प्रजातियाँ मौजूद है पूरी दुनिया में, और इनमे से भी टाइगर माथ का तबका सबसे बड़ा है, ये रंगीन व् चटकीले रंग वाले कीट है.

बहुत से टाइगर माथ जहरीले होते है, खासतौर से इनका कैटरपिलर, उसके खोखले बालों में भरा जहर किसी भी जानवर को अपंग कर सकता है, वयस्क में भी जहरीले लक्षण होते है ताकि शिकारी पक्षी चमगादड़ आदि इनके  कसैले स्वाद के कारण इन्हें बख्स दे.

यह रेड स्ट्रिप्ड टाइगर माथ में भी विषैले लक्षण पाए गए है.

गौरतलब यह है की रेड स्ट्रिप्ड टाइगर माथ पहली बार उत्तर प्रदेश के हिमालयन तराई में देखा गया, इसके मौजूदगी के जो सबूत है वह श्री लंका जावा बाली व् चीन में मिलते है, भारत के उत्तरी छोर में यह सुन्दर कीट पहली बार देखा गया. इसके व्यहवार के अध्ययन की आवश्यकता है ताकि इस माथ के जीवन चक्र व् गुणों का पता लगाया जा सके और जान मिले की मानव समाज व् कृषि पर इसका प्रभाव क्या है.

इस तरह प्रकृति की एक और  सुन्दर कृति से मेरी जान पहचान हो सकी........


कृष्ण कुमार मिश्र 
krishna.manhan@gmail.com 



2 comments:

Anonymous said...

Good work !!!!!! Please post it on facebook so that a larger community will aware.

अमित वर्मा said...

बहुत खूब!!!

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