डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 02, February 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Jan 9, 2014

ग्रीनपीस ने महान कोल खदान को रद्द करने की मांग की


ग्रीनपीस ने कहा है कि ऊर्जा मंत्रालय के कड़े विरोध के वावजूद इस्सार-हिंडालको को गलत तरीके से कोल खदान आबंटित किया गया.

7, जनवरी 2014। कोल खदानों के आबंटन घोटाले पर जिस तरह सीबीआई के संदेह खड़ा किया है उसमें आदित्य बिड़ला ग्रुप के हिंडालको को महान कोल खदान आबंटन में भी धांधली नजर आ रही है। नए तथ्य के सामने आने के बाद ग्रीनपीस इंडिया ने महान कोल खदान को तत्काल रद्द करने की मांग की है। ग्रीनपीस इंडिया ने सरकार से यह भी मांग की है कि इस आबंटन में एस्सार ऊर्जा और मध्य प्रदेश सरकार की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

ग्रीनपीस का कहना है कि कोल आंबटन में किसी तरह की पारदर्शिता नहीं बरती गई है। ऊर्जा मंत्रालय ने सीबीआई को बताया है कि उसने हिंडालको को महान कोयला खदान आबंटित करने की सिफारिश नहीं की थी। इसी तरह, शुरु में एस्सार ऊर्जा को कोल खदान आबंटित किए जाने की मांग को मध्य प्रदेश सरकार और स्क्रीनिंग कमिटी ने भी खारिज कर दी थी। लेकिन बाद में दोनों ने अपने निर्णय को बिना किसी कारण के पलट दिया।

इससे पहले भी सीबीआई ने आदित्य बिड़ला ग्रुप के अध्यक्ष पर जालसाजी, धोखाधड़ी और वित्तीय गलतबयानी करके तालबिरा कोल खदान हासिल करने का आरोप लगाया था। ग्रीनपीस ने कहा है कि इस खुलासे से इस शक को बल मिलता है कि वर्ष 2004 से 2009 के बीच जितने भी कोल खदान आबंटित हुए थे उसमें कुछ न कुछ गड़बड़ियां जरूर हुई थी।

ग्रीनपीस की कंपैनर अरुंधति मुतु ने कहा, महान कोल खदान के आबंटन की जांच में एस्सार ऊर्जा को भी शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार ने एस्सार और हिंडालको को 1 मार्च 2005 को हुई बैठक में कोल खदान आबंटन का विरोध किया था लेकिन तीन हप्ताह के भीतर 23 मार्च 2005 में उसने अपने फैसले को पलट कर हिंडालको को नहीं बल्कि एस्सार को कोल खदान आबंटित करने की अनुशंसा कोयला मंत्रालय से कर दिया।

अरुंधति मुतु ने इस आबंटन पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए पूछा कि यह कैसे हुआ कि, ऊर्जा मंत्रालय ने इसी अनुशंसा को स्क्रीनिंग कमिटी को भेज दिया। स्क्रीनिंग कमिटी ने 1 मार्च 2005 की बैठक में एस्सार को कोल खदान आबंटित करने से मना कर दिया था, लेकिन इस बार बिना किसीस्पष्टीकरण के एस्सार और हिंडालको को 2006 में कोल खदान आबंटित कर दिया।
अरुंधति मुतु ने सरकार से महान कोल खदान के आबंटन की जांच करने की मांग की है और कहा कि जब तक जांच पूरी न हो जाय तब तक वहां सभी तरह के काम पर रोक देनी चाहिए।


महान कोल खदान की खुदाई महान कोल लिमिटेड द्वारा की जा रही है जो एस्सार ऊर्जा और हिंडालको का संयुक्त उपक्रम है। वहां पर स्थानीय नागरिकों द्वारा इसका पुरजोर विरोध किया जा रहा है क्योंकि उनके जल, जंगल, जमीन के अधिकार को मानने से इंकार किया जा रहा है।


एस्सार और हिंडालको, दोनों ने मिलकर मार्च 2005 में 27वीं स्क्रीनिंग कमिटी में महान कोल ब्लॉक के आबंटन के लिए प्रयास किया था, जिसका मध्य प्रदेश सरकार ने विरोध किया था (यह मिनट्स में शामिल है )। ठीक इसके तीन हप्ते बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पलटी खाया और कोयला मंत्रालय को एस्सार को शामिल किए जाने की वकालत कर दी (यह चिठ्ठी में शामिल है)। एस्सार को क्यों कोल खदान आबंटित किया जाय, इसका जिक्र मिनट्स में कहीं नहीं है। फिर भी, 3 जुन 2006 की स्क्रीनिंग कमिटी की 29वीं बैठक में उन दोनों कंपनियों को महान कोल खदान आबंटित कर दिया गया।

ग्रीनपीस शुरु से ही महान कोल खदान के आबंटन का विरोध करता रहा है। ग्रीनपीस की कंपैनर अरुंधति मुतु ने सरकार से मांग की है कि जब जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता है तब तक विवादास्पद समय में आबंटित किए गए सभी कोल खदानों पर चल रहे काम पर प्रतिबंध लगा दी जाए।
संपर्कः
अरुंधति मुतु  - 09880639937 amuthu@greenpeace.org
अविनाश कुमार चंचल- 8359826363

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