डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 06, June 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Jan 25, 2014

दुधवा पार्क में दो गैंडों की लड़ाई में एक की मौत



लखीमपुर-खीरी। उत्तर प्रदेश के एकमात्र दुधवा नेशनल पार्क के इतिहास में पहली बार राइनो इलाका में दो मदमस्त गैंडों के बीच हुए प्रणय युद्ध में एक युवा गैंडा की मौत हो गई है। जिसका शव सलूकापुर के जंगल में गश्त के दौरान मिला है। युवा गैंडा के शरीर पर गंभीर चोटों के कई निशान मिले हैं। वीडियोग्राफी की निगरानी में शव का मौके पर ही तीन डाक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया। गैंडे की मौत से पार्क प्रशासन में हड़कंप मच गया है। गैंडा के शव को दफन करके निकाले गए सींग को पार्क अधिकारियों ने अपनी देखरेख में जला दिया है। इससे पहले लगभग पंद्रह दिन पूर्व पार्क में एक गैंडा शिशु की मौत ठण्ड से हो गई थी।


दुधवा नेशनल पार्क के तहत सोनारीपुर रेंज क्षेत्र में विश्व की एकमात्र गैंडा पुनर्वास परियोजना चल रही है। 27 वर्गकिमी के संरक्षित जंगल में 30 सदस्यीय गैंडा परिवार स्वछंद विचरण करता है। इन दिनों गैंडों का प्रणयकाल चल रहा है। इसमें कई दिनों से मदमस्त युवा गैंडा भीम, नकुल, सहदेव को एकसाथ अक्रामक स्थिति में देखा जा रहा था। गैंडों के प्रणयद्वंद में गंभीर रूप से घायल हुए सहदेव को दो दिन पहले निगरानी करने वाले पार्क कर्मचारियों ने गस्त के दौरान देखा था।

इस पर बीते दिवस मानीटरिंग करने वाली हाथियों की टीम उसे सलूकापुर क्षेत्र के सुरक्षित जंगल में हांक कर खदेड़ लाई थी। मीयटिंग फाइटिंग में गंभीर रूप से घायल हुए युवा गैंडा सहदेव का इलाज षुरू हो पाता इससे पहले ही उसकी बीती रात मौत हो गई। दुधवा नेषनल पार्क के इतिहास में पहली बार प्रणय युद्ध में युवा गैंडा की हुई असमय मौत की सूचना पर खासी सनसनी फैल गई और पार्क प्रषासन में हड़कंप मच गया है। मामले से उच्चाधिकारियो को अवगत कराया। मौके पर दुधवा नेषनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर वीके सिंह, वार्डन एके श्रीवास्तव स्टाफ सहित मौके पर पहुंच गए और मौका मुआयना किया।

 6 अगस्त 2002 में पैदा हुआ सहदेव मादा गैंडा हिमरानी का चैथा पुत्र था। वीडियोग्राफी की निगरानी में गैंडा के शव का पोस्टमार्टम राजकीय पशु चिकित्सालय के डाक्टर राजेश निगम, डाक्टर नीरज कुमार और डब्ल्यूटीआई के डाक्टर सौरभ सिंघई, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के राइनो एक्सपर्ट रूचिर शर्मा, प्रणव चंचानी की देखरेख में कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गैंडा की मौत का कारण षरीर के नाजुक अंगों में लगी गंभीर चोटों को बताया गया है। गैंडा के शव् को दफन करने के बाद उसके निकाले गए सींग को पार्क के अधिकारियों ने अपनी देखरेख में जला दिया।

 दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर वीके सिंह ने बताया कि प्रणय युद्ध में घायल हुए दूसरे गैंडा भीम और नकुल की खोजबीन के लिए टीमों को लगा दिया गया है, ताकि अगर जरूरत हो तो उनका इलाज किया जा सके। उन्होंने बताया कि गैंडों के बीच होने वाले इस प्रणय द्वंद को समाप्त करने के लिए जल्दी ही नर गैंडों का निकट बन रहे राइनो क्षेत्र में शिफ्ट कर दिया जाएगा, इसके लिए उच्चाधिकारियों से अनुमति मांगी गई है।


देवेंद्र प्रकाश मिश्र 
dpmishra7@gmail.com 


0 comments:

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Featured Post

क्षमा करो गौरैया...

Image Courtesy: Sue Van Coppenhagen  संस्मरण गौरैया और मैं -- (3) ....डा0 शशि प्रभा बाजपेयी बात उस समय की है जब घर के नाम पर ...

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!