International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Jul 30, 2011

...फ़िर सड़क पर मारी गयी एक बाघिन


 सड़क हादसे में एक बाघिन की मौत-
किशनपुर सैंक्चुरी व दक्षिण खीरी वन-प्रभाग से गुजरती मैलानी-भीरा सड़क पर हुआ ये हादसा-
 देवेन्द्र प्रकाश मिश्र (पलिया-खीरी)
दुधवा नेशनल पार्क के किशनपुर के जंगल के बीच से निकली भीरा-मेलानी रोड पर 30.07.2011 की रात में वाहन की टक्कर से साड़े तीन साल की किशोर बाघिन की दर्दनाक मौत शव पोस्टमार्टम के लिए आई.वी. आर. आई. बरेली भेजा गया. वाहन पीलीभीत में पकड़ा गया. चालाक मौका पाकर फरार हुआ।

दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शामिल किशनपुर वन्यजीव विहार के जंगल से निकली मैलानी रोड पर बाघिन की वाहन की टक्कर में हुई मौत का प्रारम्भिक जांच के लिए तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया गया है। इसमें विश्व प्रकृति निधि भारत के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी डा0 मुदित गुप्ता, राजकीय पशु चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी डा0 जेबी सिंह एवं डा0 वीपी सिंह को नामित किया गया है। जांच के दौरान प्रथम दृष्टया वाहन से हुई टक्कर में कमर की हड्डी के टूटने से बाघिन की मौत होने का अंदाजा लगाया गया है। बाघिन के शव को यहां दुधवा मुख्यालय में डीप फ्रीजर में सुरक्षित रख दिया गया है तथा उसकी रखवाली में कर्मचारी तैनात किए गए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए रविवार को सुबह आईबीआरआई बरेली भेजा जाएगा।

यहां बताते चले की खीरी-पीलीभीत-बहराइच के घने जंगलों से गुजरती हुई इन सड़कों पर न जाने कितने बाघ सड़क दुर्घटना का शिकार होते रहते है, साथ ही उन जीवों की चर्चा भी नही होती जो खतरे में पड़ी प्रजातियों से इतर हैं..।

1 comment:

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था