International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Dec 18, 2010

महामहिम ने देखा तराई का अदभुत प्राकृतिक सौन्दर्य

महामहिम मुख्य न्यायाधीश एफ़०आई०रेबेलो ने देखा तराई का स्वर्ग-दुधवा जंगल:

दुधवा नेशनल पार्क से देवेंद्र प्रकाश मिश्र की रिपोर्ट* उत्तर प्रदेश के एक मात्र दुधवा नेशनल पार्क में अब तक भ्रमण के लिए आने वाले गेस्ट वीआईपी को बाघ दर्शन न होने के रिकार्ड को ब्रेक तब लग गया जब शुक्रवार को दुधवा भ्रमण के दौरान हाईकोर्ट इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश एफआई रेबेलो (Justice Ferdino Inacio Rebello (CJ)) आदि को वनराज के परिवार सहित दर्शन हो गए। इसके साथ ही उन्हें तीन गैंडा भी घूमते हुए दिखाई दिए। दुर्लभ प्रजाति के इन वयंजीवों को देखकर श्री रेबेलो काफी प्रफुल्लित दिखाई दिए। 

उल्लेखनीय है कि दुधवा नेशनल पार्क के इतिहास में देखा जाए तो कभी जंगल के साथ ही सीमावर्ती खेतों में वनराज के दर्शन आम रूप से हुआ करते थे। स्थिति यहां तक थी कि जब लोग वाहन लेकर चंदनचौकी या गौरीफंटा रोड से जाते थे तब उनको यह भय रहता था कि कहीं न कहीं बाघ जरूर दिखाई देगा। इसके कारण भयभीत लोग तीन चार वाहन की संख्या होने पर ही उक्त मार्गो से गतंव्य तक जाते थे। कालांतर में बाघ के दर्शन जब कम होने लगे तो देशी विदेशी वीआईपी पर्यटकों को बाघ के दर्शन जब कम होने लगे तो देशी विदेशी वीआईपी पर्यटकों को बाघ के दर्शन कराने के लिए अस्सी के दशक में तत्कालीन पूर्व फील्ड डायरेक्टर डा आर एल सिंह ने निश्चित स्थानों पर पड्डे यानी गैस के बच्चे को चारा के रूप में बांधकर बाघों को ललचाना शुरू कर दिया। जब बाघ पड्डे को मारकर खाता था तब उसके दर्शनों के लिए मचानों पर पर्यटकों की भीड़ जमा हो जाती थी। फिर समय बदला और कालान्तर में वनराज बाघों के दर्शन दुर्लभ ही नहीं अति दुर्लभ होने लगे। लोग यहां तक कहने लगे कि पहले बाघ देखना खास नहीं होता था अब भाग्यशाली को ही बाघ के दर्शन हो पाते हैं। दुधवा नेशनल पार्क में केन्द्रीय तथा प्रदेश सरकार के तमाम मंत्री, राजनेता, फिल्म अभिनेता समेत सूबे के कई राज्यपाल भ्रमण हेतु आ चुके हैं। लेकिन इनमें से ऐसा कोई भाग्यशाली नहीं रहा जिसे वनराज बाघ के दर्शन हुए हों। इससे सभी को निराशा ही हाथ लगी। लेकिन इस इतिहास को अब ब्रेक मिल गया जब शुक्रवार को दुधवा भ्रमण के दौरान इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एफआई रेबेलो को सलूका परिक्षेत्र में वनराज बाघ के सपरिवार दर्शन हो गए। दुधवा टाइगर रिजर्व के डीडी संजय पाठक के अनुसार वन भ्रमण के दौरान सलूकापुर परिक्षेत्र के ककराहा वनखंड में एक बाघ के साथ ही बाघिन को बच्चे के साथ विचरण करता देखकर सीजे श्री रिवेलो समेत उनकी पत्नी एवं पुत्र अपलक देखते ही रहे। इसके बाद गैंडा इकाई परिक्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर तीन गैंड़ों को जंगल में स्वच्छंद घूमते देख वह सभी लोग खासे प्रफुल्लित दिखाई दिए। इसके अलावा जंगल में चीतल, पाढ़ा आदि वन्यजीवों को भी देखकर सभी लोग खुश हुए हैं। उल्लेखनीय है कि अब तक के इतिहास में वीआईपी को वनराज के दर्शन न होने के कारण पार्क के अधिकारी हमेशा उपहास के पात्र बन जाते थे। किन्तु मुख्य न्यायाधीश को वनराज बाघ के दर्शन हो जाने के बाद दुधवा में बाघ न दिखने के कलंक से मिली निजात से पार्क के आला अफसरों के चेहरों पर भी खासी रौनक दिखाई दी।


दुधवा नेशनल पार्क के नवीन पर्यटन सत्र के द्वितीय माह की शुरूआत में टाप गेस्ट वीआईपी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस एफआई रेबेलो ने यहां आकर दुधवा के नयन भिराम प्राकृतिक सौंदर्य का अवलोकन करके स्वच्छंद विचरण करने वाले वन्यजीवों को देखा। इससे पूर्व उनके आगमन के मद्देनजर दुधवा पर्यटन परिसर की व्यापक साफ सफाई करने के साथ ही गेस्ट हाउस को भी नीट एंड क्लीन कराया गया था।

जानकारी के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एफआई रेबेलो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सपरिवार १६ दिसम्बर गुरूवार की देर शाम को दुधवा नेशनल पार्क भ्रमण हेतु पहुंचे। यहां पर परंपरागत ढंग से उन्होंने गार्ड आफ आनर की सलामी ली। इससे पूर्व दुधवा पार्क प्रशासन द्वारा पर्यटन परिसर की व्यापक सफाई कराई गई थी एवं गेस्ट हाउस के वीआईपी रूम को भी नीट एंड क्लीन कराया गया था। दुधवा आगमन पर फील्ड डायरेक्टर शैलेष प्रसाद एवं डिप्टी डायरेक्टर संजय पाठक तथा एसडीएम महेन्द्र सिंह आदि ने श्री रिवेलो का जोरदार स्वागत किया। शुक्रवार को प्रातःकाल श्री रिवेलो परिवार के साथ जंगल भ्रमण पर निकल गए। बताया गया कि एफडी शैलेष प्रसाद तथा डीडी संजय पाठक की अगुवाई में श्री रेबेलो ने सलूकापुर परिक्षेत्र की गैंडा इकाई, सोनारीपुर, बांकेताल आदि स्थानों का भ्रमण करके दुधवा के प्राकृतिक सौंदर्य को निहरा तथा स्वच्छंद विचरण करने वाले दुर्लभ प्रजाति के वयंजीवों को देखा। लगभग साढ़े चार घंटा जंगल भ्रमण के बाद दुधवा वापस आए श्री रिवेलो परिवार के साथ गेस्ट हाउस में कुछ समय व्यतीत करके लंच किया और उसके बाद किशनपुर वयंजीव विहार भ्रमण करने के लिए रवाना हो गए। श्री रिवेलो दुधवा में रात्रि विराम करने के बाद शनिवार को लखीमपुर के लिए रवाना होंगे। श्री रिवेलो के आगमन पर पुलिस के साथ ही वन विभाग के अमला खासा चौबंद दिखाई दिया।


खास-O-आम! के किस्से:
उल्लेखनीय है कि दुधवा नेशनल पार्क में जब कभी भी कोई मोस्ट वीआईपी आता है तो पूरा पार्क अमला उनके स्वागत सत्कार में जुट जाता है। ऐसे में पैसा खर्च करने वाले पर्यटक की खासी छीछालेदर हो जाती है। जानकारी के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सपिरवार दो दिवसीय दुधवा भ्रमण के लिए आए हैं। ऐसे में दुधवा के थारूहट आदि अफसरों के लिए पहले से आरक्षित कर दिए गए। परिणाम शुक्रवार को आए तमाम पर्यटकों का दुधवा प्रवास का सपना साकार न होने से वह निराश होकर वापसी के लिए विवश हो गए। 

दुधवा नेशनल पार्क में जंगल भ्रमण के लिए सपरिवार आए उन्नाव के सौरभ बाजपेई, सीतापुर के आशुतोष सिंह, अम्बेडकरनगर के अजीत वर्मा, कानुपर के पंकज कुमार, सविता देवी, नागपुर के हरनदी मिली आदि को दुधवा में रहने के लिए थारूहट आदि नहीं मिल सके। सभी पर्यटक परिवार एवं बच्चों के साथ इधर उधर घूमकर पार्क कर्मचारियों से मनुहार करते दिखाई दिए लेकिन लगभग सभी ने रटारटाया जवाब दिया कि वीआईपी आए हैं, इसीलिए यहां कुछ भी कोई व्यवस्था नहीं हो सकती है। इससे निराश होकर जहां सभी पर्यटक वापसी के लिए विवश हुए। वहीं लखनऊ की नावार्ड की टीम में शामिल अमित कुमार, विनसेट लाका, मलय कुमार भी दुधवा में थारूहट न मिलने से खासे मायूस दिखाई दिए। इन लोगों ने बतायाकि बड़ी मुश्किल से दुधवा के लिए समय निकाला था। हम लोगों की किस्मत ही खराब है। यह लोग भी इधर उधर भटककर धनगढ़ी (नेपाल) घूमने के लिए चले गए।


देवेन्द्र प्रकाश मिश्र- (लेखक वाइल्डलाइफर /पत्रकार है- दुधवा नेशनल पार्क के निकट पलिया में निवास, इनसे dpmishra7@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते हैं।)

1 comment:

  1. yea

    cheers for the
    VIP

    resident
    of
    the jungle

    the tiger!!

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