डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 06, June 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Oct 17, 2010

एक और खूबसूरत बाघ को आजीवन कारावास !

सुनील निगम (मैलानी) १५ अक्टूबर २०१०, पीलीभीत की दियूरियाँ रेन्ज से निकलकर आदमखोर बने बाघ को अन्ततः फरूखाबाद जिले की रेंज में बेहोश करके पकड़ लिया गया है। आपको  याद होगा कि कई मानव शिकार करने वाले इस बाघ को पिछले तीन माह से ट्रैंकुलाइज करने के लिये वन-विभाग व वाइल्ड लाइफ़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया द्वारा अभियान चलाया जा रहा था। लेकिन यह बाघ शाहजहाँपुर के अलावा खीरी, हरदोई होते हुए फरूखाबाद जिले में दो दिन पूर्व प्रवेश कर गया था।

इससे पूर्व आदमखोर घोषित इस बाघ ने एक माह पूर्व शाहजहाँपुर की खुटार रेन्ज में प्रवास के दौरान अपने मूल हैबिटेट में वापस जाने की तमाम कोशिशे  तो की लेकिन मानवीय हस्तक्षेप और बारिश के कारण अपना मार्ग भूल जाने के कारण वापस नही जा पाया था।

पकड़े जाने के बाद इस बाघ को हमेशा-हमेशा के लिए लखनऊ स्थित चिड़ियाघर में बतौर नुमाइश डाल दिया गया है।

इस आदमखोर बाघ को पकड़ने के लिए तीन माह से अभियान चला रहे शाहजहाँपुर के प्रभागीय वनाधिकारी पी.पी. सिंह समेत वाइल्ड ट्रस्ट आफ इंडिया के सदस्यों ने राहत की साँस ली है, वहीं एक तीन वर्षीय बाघ को कैदी बनाने की मजबूरी की कसक उनके दिल में हमेशा- हमेशा के लिए रहेगी।


6 comments:

shehla Masood said...

very sad

marie muller said...

could be worst..

but the tiger is alive!!!!

D.P.Mishra said...

very baid.
kab tak kaid hote rahege BAGH.
Jangal fe na nikale BAGH ah hone chahiye vyawastha.

bhasu said...

सुनील निगम जी,
आपने इस घटना को एक समाचार कि दृष्टि से लिखा है किन्तु मैं इसे एक अन्य नज़र से देखता कर टिपण्णी कर रहा हूँ.
क्या हम और आप बता सकते है कि इस पूरी घटनाक्रम में उस निरीह बाघ का क्या दोष था. हम इन्सान पहले उनके प्राकृतिक आवास को नष्ट कर देते है और उस स्थान पर विकास के नाम पर अपना कब्ज़ा जमा लेते है. अपने प्राणों को बचाने के लिए जब वे हमारे इलाके में आते है तो फिर उन्हें ही दोष दे देते है कि ये आदमखोर हो गए है तथा हुक्म सुना देते हैं " उम्र कैद या फासी" की.
ज़रा सोचिये! दोष किसका है.

Kaushalendra said...

हूँ .... ये खबर सुखद भी...... दुखद भी / सुखद इसलिए कि बाघ ज़िंदा है , दुखद इसलिए कि उसे उम्र-कैद के लिए चिड़ियाघर में डाल दिया गया / इंसान इतना beraham kyon hai ?

RAVINDRA said...

It is easy on government part but same time disgusting to cage an wild tiger forever. This tiger should have been released deep inside Corbett, Kanha or Simlipal, far from human settlements and where he can get enough prey, so that he can't move towards man.
A tiger is deleted from list of wild tigers in India, which is everdecreasing (only 1400 left).
Very sad.

RAVINDRA YADAV

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