डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 06, June 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Oct 8, 2010

क्या सिर्फ़ इन्सान ही जज्बाती होते हैं !

 क्या प्यार पर सिर्फ़ इन्सानी कौम का एकाधिकार है? क्या प्रेम, दया, करूणा, और परोपकार जैसे भाव सिर्फ़ इन्सानी फ़ितरत में पाये जाते हैं, या कथित मानवता के ये शब्द व छणिक भाव हैं, कुछ ऐसी ही बातों पर सवाल खड़े कर रही है, सुरेश बरार की ये कहानी!



एक बार की बात हैं, एक लड़की थी बहुत ही चुलबुली शरारती वो सब से प्यार करती थी। लेकिन उसे कोई प्यार नही करता था, उसे कभी कोई फर्क भी नही पड़ता था, वो अपने दादा जी के साथ बहुत खुश थी, वो उस समय कक्षा ७ में थी। अपनी छोटी सी दुनिया में बहुत खुश थी। उसके दादा जी उसे बहुत प्यार करते थे। और वो भी उन्हें बहुत प्यार करती थी अपने दादाजी से, सुबह की शुरुवात कुछ ऐसे होती कि वो सोती रहती और दादाजी उसे जोरों से आवाज़ें लागाते रहते 'क्योकि दादाजी को खाना जो खाना था ! जब तक दादाजी की थाली से एक टुकड़ा नही उठता था तबतक दादाजी अपने मुह के अंदर खाना नही डालते थे , लड़की बोलती दादाजी भूख नही हैं, फिर भी उसे खाना पड़ता था ,क्योकि अगर वो नही खाती तो दादाजी नही खाते ! फिर वो स्कूल जाती जब तक वो स्कूल से वापस नही आती, दादाजी खाना नही खाते थे। वो खेत पर रहते थे। स्कूल से आने के बाद वो दादाजी का काम करती थी और उनको बहुत तंग भी करती थी। दादाजी उसे हमेशा लडकों की तरह रखते थे . और वो किसी से डरती भी नही थी , वो अब कक्षा ८ में आ चुकी थी, जब वो कक्षा ८ में अच्छे नंबर से पास हुई तो दादाजी ने पूरे गांव में मिठाईं बांटी और एक दिन वो बीमार हो गए बुखार हो गया ,फिर क्या था कुछ भी ठीक नही हो रहा था लड़की को कुछ समझ नही आ रहा था, कि क्या हो रहा हैं, एक दिन वो दुनिया को छोड़ कर  चले गये, तब भी उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा हैं, कई दिन बीत गए दादाजी दिखाई नही दे रहे थे। लड़की चुप थी, कुछ टाइम बाद उसे पता चला दादाजी भगवान के पास गए हैं, और कभी नही आयेगे, वो उनकी आंटी के पास रहते थे, लड़की उन पर चिल्लाई के उन्होंने दादाजी को क्यों मारा, घर वाले समझ नही पा रहे थे, कि उसे १० दिन के बाद क्या हो गया हैं, क्या उसे अब समझ आया, कि उसके दादाजी अब नही रहे ? वो हैरान थे, उसके इस बर्ताव पर उसे कोई समझा नही पा रहा था, बस एक ही रट दादाजी दादाजी ........... पता नही उसके दादाजी उसे छोड़ कर कहां चले  गए थे ? शायद उस जगह जहां से कोई लौटकर वापस नही आता, लेकिन लड़की मानने को तैयार नही, कि उसके दादाजी अब कभी लौटकर वापस नही आयेगे । उसका असर उसके दिमाग पर हुआ और वो बीमार हो गई, उसे सिर्फ़ दादाजी चाहिये वो बड़ी तो थी, लेकिन समझ नही थी उसकी दुनिया सिर्फ़ उसके दादाजी थे और कोई नही।

अब वो दीदी के साथ कक्षा १० में पढ़ती थी, ठीक तो हो गई थी लेकिन बहुत शांत हो गई थी , फिर वो कक्षा १० से पास होकर ११ में गई तब उसकी जिंदगी में २ नये दोस्त  आ गये, वो दीदी के दोस्त थे वो दोनों सी आर पी एफ़ फ़ोर्स में थे, वो उन्हें सर बोलती थी, दोनों बहुत प्यार करते थे उससे क्योकि वो उन चारों में सबसे छोटी थी चारों अपनी प्रोब्लम एक दूसरे के साथ बांटते थे, लड़की फ़िर से हंसने लगी थी। ऐसे भले शरारती थी। चारों बहुत अच्छे दोस्त थे, वो मिलते नही थे, कभी कभी मिलते थे लेकिन दोस्ती दिल से थी चारों एक दूसरे की ख़ुशी के बारे में सोचते थे ! लड़की फिर से किसी पर विश्वास करने लगी थी ५ साल तक वो बहुत अच्छे दोस्त रहे उसे अपने दोस्तों पर बड़ा गुरुर था, कि उसकी दोस्ती दुनिया की सबसे बढ़िया दोस्ती हैं, घर वाले भी खुश थे की उनकी बेटी किसी पर भरोसा करने लगी हैं, दादाजी के जाने के बाद वो भगवान से भी नाराज हो गई थी, कि उसने उनके दादाजी को अपने पास बुला लिया था, अब उसके लिए दोस्ती ही सब कुछ थी

एक दिन उसके एक दोस्त ने दोस्ती तोड़ ली, पता नही क्यों ५ साल के बाद फिर से वो लड़की टूट गई थी, फिर एक दिन क्या था, कि दूसरे दोस्त ने उसे कहा कि उसने हम से दोस्ती सिर्फ़ दूसरे दोस्त के कहने पर की थी और उन्होंने उस दोस्ती को निभाया भी, दोस्ती का मतलब उस लड़की के लिए भगवान था, जो फिर से रूठ गया था उसे फिर से कुछ समझ नही आ रहा था, कि ये सब उसके साथ क्यों हो रहा था। वो बिलकुल थम सी गई थी दिल जो टूटा वो फिर नही जुड़ने वाला था ! वो उसे बोलता गया और वो सिर्फ़ सुनती रही कुछ नही बोला, बस यही सोच रही थी के ५ साल तक दोस्ती एक धोका थी और कुछ नही उसे समझ आ गया की लोगो से दूर रहना हैं उसने उनसे सिर्फ़ इतना बोला की आपने धोका दिया क्यों? वो गलती मानने को तैयार नही था बोला मैं अपनी दोस्ती का हर  फ़र्ज़ पूरा किया हैं तुम्हे कोई शिकायत नही होनी चाहिये ? लड़की ने कहा आपने सही बोला आपने दोस्ती का हर फ़र्ज़ पूरा किया लेकिन क्या उसमें आपके दिल की ख़ुशी थी आपने वो किया जो आप नही करना पसंद करते थे, मुझे झूठी दोस्ती नही चाहिये थी, क्यों किया आपने ऐसा ? उसने बोला ठीक हैं आपकी दोस्ती झूठ थी मेरी नहीं, जाओ मेरी जिन्दगी से दूर हमारी दोस्ती आपके लायक नही थी, और न हम आपकी दोस्ती के लायक हैं, जहां जाओ खुश रहो ? बस एक एहसान करना कभी किसी से झूठ मत बोलना, क्योकि जब किसी का विश्वास टूटता हैं, तो वो किसी पर भरोसा नही कर सकता ? खुश रहो हमेशा।  सब ख़त्म हो चुका था।


इस बार तो वो असे टूटी के इंसानियत पर से भरोसा टूट गया , वो फिर से इमोशनली हार्ट हुई थी। साँस जिसे वो लेना ही नही चाहती थी ! एक बार वो फिर से सब से दूर हो गई और इस बार वो हमेशा के लिए सब से दूर थी। वो जीना नही चाहती थी। बस सोचती कि क्या वो सच में किसी की दोस्ती के काबिल नही हैं ? क्या यही दुनिया हैं ? क्या लोग ऐसे ही होते हैं ? वो ५ साल तक हमारे साथ था फिर भी हम नही समझ पाए ? वो समझ चुकी थी के लोगो को समझा नही जा सकता ? अब वो दुनिया से नाराज थी जीना नही चाहती थी? वो एक बार फिर से अकेले हो गई ! एक बार वो अकेले एक पार्क मैं बठी रो रही थी तो वहाँ कुछ अलग नजारा देखा,  उसने देखा कि इन्सान सिर्फ़ इन्सान का ही नही जानवरों का भी दुश्मन हैं! दुसरे दिन लड़की फिर उसी पार्क में बैठी थी, वो कुछ देख रही थी, कि एक कुत्ता सब लोगो के पास बारी बारी से जा रहा था और लोग उसे मार रहे थे ! वो फिर भी उनके पास जा रहा था ! अगले दिन फिर वही सब हुआ वो कुत्ता बहुत ही बड़ा और बहुत मोटा था,  एक मोटी औरत ने उसे चप्पल से मारा फिर उसने सुना के लोग कह रहे थे की कुत्ता पागल हैं, और खतरनाक भी लड़की उसे देख रही थी पर उसे वो पागल नहीं लग रहा था फिर उसका ध्यान उस कुत्ते के पाओ पर गया तो वो लगड़ा रहा था, फिर उसे समझ आया कि उसे मदद चाहिये, वो लड़की भी उससे डर रही थी,  और लोग उसे बराबर मारे जा रहे थे ! तभी कुत्ता दौड़ कर उस लड़की के पास गया उसकी आँखों में बहुत दर्द था, जो वो बर्दास्त नहीं कर पा रहा था, और कुत्ते ने लड़की की तरफ अपना पैर उठाया तो लड़की ने देखा की उसके पावं में कील लगी हुई थी, जो ४/५ दिन पुरानी थी, वो जैसे बोल रहा था, प्लीज हेल्प......

देखने में वो बहुत बड़ा था पर बहुत मासूम लग रहा था।  तभी लोगो ने शोर किया की ये कुत्ता पागल हैं, वहाँ से हट जाओ,  लड़की ने कहा ये पागल नहीं हैं, ये मेरा हैं  वो लड़की डरी हुई थी। कुत्ता उसके पैरों में बैठ गया। लड़की ने कुछ हिम्मत की और उसके पैर को ऊपर उठाया जैसे वो कील निकालने लगी, तो कुत्ता जोर से चिल्लाया उसे बहुत दर्द हुआ ! लोग तो उसे जान से मारने का प्लान बना रहे थे , तभी लड़की ने जोर से कील को खींचा, तो कुत्ते ने उसका हाथ अपने मुंह में ले लिया तभी लोगो को लगा की कुत्ते ने लड़की को काट लिया हैं, लोगो ने कुत्ते पर  किसी पैनी चीज से मारा तो उस लड़की ने अपना हाथ उसके ऊपर अड़ा दिया लड़की को बहुत जयादा चोट लगी कुत्ते के पावं से कील निकल गई थी और वो डर कर वहां से भाग गया ! लड़की ने लोगों को बताया कि वो पागल नहीं हैं। उसके पाओ  में कील लगी थी। इसलिए वो आप सब से मदद मांग रहा था, लोग वहाँ से चले गए, कुत्ता वही छुपकर देख रहा था सब के जाने के बाद वो बहार आया उस लड़की के पास ! लड़की ने सोचा अब क्या चाहिये उसे कील तो निकल चुकी हैं, वो आकर लड़की का हाथ चाटने लगा जहां लोगों ने उसे मारा था। एक बार वो अपना पाओ चाटता और एक बार लड़की का,  वो लड़की को प्यार कर रहा था फिर वो भी उसे प्यार करने लगी !

अब तो वो रोज मिलते थे, कुत्ता लड़की का शुक्रिया अदा करना नही भूला था। उसे पता था की लड़की को नुकसान उसकी वजह से हुआ हैं। वो उसका हाथ रोज चाटता था। और अपना भी लड़की को भी बहुत अच्छा लगता था ! कुछ महीने बाद दोनों का जख्म ठीक हो चूका था वो उसके लिए खाना लेकर जाती थी। लड़की इस वक्त २० साल की थी ! जहाँ वो लड़की लोगो को देखकर मुंह फेर लेती थी। वही दूसरी तरफ वो कुत्ते से बहुत प्यार करने लगी थी। वो अपना खाना उसी के साथ बांटती थी, कई बार कुत्ता भी अपना खाना लड़की के लिए बचा कर रखता था। लड़की उससे अपने दिल की सारी बातें करती थी और वो उसे सुनता था, मानों उसे सब समझ आता था और वो रोने लगता था, दोनों एक दूसरे के गले से लगकर बहुत रोते थे। वो लड़की के आसुओं को अपनी जीभ से चाटता था, फिर दोनों ने एक दुसरे से वादा किया की वो दोनों अब कभी नही रोएगे ! एक दिन लड़की बीमार थी तो वो उससे मिलने नहीं जा पाई जब वो दूसरे दिन उसके पास गई तो कुत्ता उसके सीने से लग कर रोने लगा जैसे वो बोल रहा था, कि तुम मुझे क्यों छोड़ कर गई उसने खाना भी नहीं खाया था। खाना छुपा कर रखा हुआ था। फिर वो निकाल कर लाया, खाने से बदबू आ रही थी !


कुछ दिनों बाद जब लड़की उससे मिलने गई तो वो वहा नही था उसको लगा वो आ जायेगा लेकिन ऐसा नहीं था शाम हो चुकी थी। उसका कोई पता नहीं था, वो कभी नहीं लेट होता था, लड़की को लगा कहीं उसे कुछ हो तो नहीं गया, वो बहुत डर गई थी। उसने शोर मचाना शुरु किया, तो एक गडडे से उसकी थोड़ी सी आवाज़ सुनाई दी, वो दौड़ कर नीचे गई, तो उसने देखा कि वो अपनी आखरी साँसे गिन रहा है! वो फिर नहीं समझ पा रही थी, कि ये सब कैसे हो गया। वो तो बिलकुल ठीक था ? उसके पेट से खून निकल रहा था। उसने लड़की को चाटा और मर गया।  लड़की को शॉक लगा, वो वही पर पड़ी रही जब वो उठी तो उसका दोस्त दुनिया और उससे दूर जा चुका था। वो रोती रही रातभर सुबह जब देखा तो उसे मारा गया था, उसके पेट से खून निकला था, और उसके मुंह में था। क्या कोई यकींन कर सकता हैं, कि पाओ का एक पैकेट उस दिन लड़की का जन्मदिन था। वो उसके लिए तोफा लाया था। किसी की दुकान से पर पता नहीं कि उसे कैसे पता था। कि आज उसकी दोस्त का जन्मदिन हैं ? उसे अपने जन्मदिन पर तोफे में अपने दोस्त की लाश मिली फिर क्या था ! इंसानों से नफरत और बढ़ गई ! क्या उसका इतना कसूर था, कि वो इन्सान से ज्यादा वफादार था? उनसे ज्यादा प्यार करने वाला ? लड़की ने तो सिर्फ़ उसकी छोटी सी मदद की थी ! थोडा सा प्यार ! और उसने उस प्यार के बदले अपनी जान तोफे में दे दी ? आज वो लोगों से दिल से इतनी दूर हैं, जितना की धरती से आसमान! क्या उसे जीने का कोई हक़ नही था ? जो उसे इतनी बड़ी सजा दी गई ? सजा तो दोनों को मिली बस फर्क सिर्फ़ इतना की लड़की जिन्दा थी ?


 सुरेश बरार (लेखिका गुड़गांव में रहती हैं, ताईकांडों सीखना व सिखाना इनका मनपंसद कार्य है, वन्य जीवों से प्रेम, अभी तक ताईकांड़ों जैसी विशेष कला में तमाम एवार्ड अर्जित कर चुकी हैं, वन्य जीवन के सरंक्षण में कार्य करने वाली कई राष्ट्रीय एंव अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं, इनसे  brar.suresh@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।)




Water lily (गुजरी) की तस्वीरें साभार: सतपाल सिंह

6 comments:

गजेन्द्र सिंह said...

लेख अच्छा लिखा है ........

थोडा समय यहाँ भी दे :-
आपको कितने दिन लगेंगे, बताना जरुर ?....

कृष्ण मिश्र said...

भावपूर्ण लेखन, जो इन्सान को यह सोचने पर मज़बूर कर दे कि उसकी प्रवृत्तियां कितनी दूषित व अव्यहारिक हो चुकीं हैं।

अरुणेश दवे said...

भावविभोर करने वाला लेख इंसानो की दोस्ती से पशुओ की दोस्ती लाख गुना बेहतर है ।

mad said...

aapki kahani ka wo pal aankho me aansu la deta hai jab ladki k dost bolte hai "SAB KHATAM HO GAYA" samajh nhi aata aise kaise sab khatm ho jata hai?
insaano ki life yahi tak hi nhi "use and throw" ho gai hai.
end bahut TREGICAL hai.
sach me insano se jyada achche hai "JAANWAR"
unme waakai"JAAN" hai.
insaan wo ban chuka hai joki"BEJAAN" hai.
keep it up.GOD BLESS U.

mad said...

good

mad said...

aapki kahaani ka 1st half meri life se hai....
nhi nhi main yeh nhi keh raha hu ki aapne churaya hai, ittefaak ho sakta hai.
par mere karib laga.
really touching hai.

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