डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Aug 26, 2010

बाढ़ में इन्सान ही नही, साँप भी मुसीबत में हैं

मसला लखीमपुर खीरी का है, जहाँ जंगल आबाद हैं और नदियां उफ़नाती हैं, जाहिर हैं, जल में रहने वाले जीवों की भी भरमार होगी, और वो भी प्रभावित होते होंगे इस भीषण बाढ़ में! लेकिन उन्हे रेस्क्यू करने का न तो तो कोई सरकारी इन्तजाम है, और न ही कोई स्वंय सेवी संगठन इस बावत में कोई काम कर रहा हैं, सिवाय कागजी कामों और नोटों के सिवा! अगर हम त्रासदी की बात जाने दे, तो मछली का शिकार व्यापक तौर पर किया जाता है, वैध और अवैध दोनों तरह से, इसी शिकार में जो इन्तजाम किए जाते हैं, उनमें सापों के अतिरिक्त मगरमच्छ व घड़ियाल भी फ़सते हैं। गिरवा, शारदा व घाघरा नदियों में इनकी बहुतायात हैं। खासकर घड़ियाल व मगरमच्छ के बच्चे मछली पकड़ने वाले जाल में फ़ंस जाते हैं, और इनकी मौत हो जाती है। वन-विभाग व वन्य-जीव प्रेमियों को इस दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए!..माडरेटर


मछली की जगह फंसे सांप पकड़ लिए

निघासन। जरा इन साहब की हिम्मत तो देखिए ! बाढ़ के इस दौर में मछली पकड़ने के लिए जाल लगाया था। मछली तो एक भी नहीं फंसी। इसकी जगह फंस गए कुछ सांप। लेकिन जनाब का गुस्सा तो देखिए। उन्होंने सांपों को भी नहीं छोड़ा। पूंछ से पकड़कर उनको घसीटते हुए दूर ले जाकर फेंक आए।

इस समय इलाके में भीषण बाढ़ आई हुई है। ऐसे में तमाम मछुआरों ने जगह-जगह पानी भरा देखकर अपने जाल लगा दिए हैं। निघासन के अबरार हुसैन ने झण्डी रोड के किनारे चल रही पानी की धार में अपना जाल लगाया था। शाम को इस उम्मीद में कि जाल में काफी मछलियां फंस चुकी होंगी, वह इसे निकालने वहां पहुंचे। पानी में से जाल बाहर खींचा तो हैरत में पड़ गए। जाल में मछली तो एक भी नहीं थी। उनकी जगह पांच-छह सांप जाल में फंसे इधर-उधर घूम रहे थे। मछलियों की जगह सांपों को देखकर अबरार का पारा चढ़ गया। दिमाग में यह आया कि मछलियां तो फंसी होंगी लेकिन इन सांपों ने उनको चट कर डाला होगा।

बस फिर क्या था। उन्होंने हिम्मत करके एक-एक कर सारे सांपों को पूंछ से पकड़ा और रस्सी की तरह जमीन पर लटकाकर घसीटते हुए उनको वहां से लेकर दूर चल दिए। करीब एक फर्लांग आगे ले जाकर अबरार ने सारे सांपों को नचाकर दूर खेतों में भरे पानी में फेंक दिया। लेकिन सड़क पर फन रगड़ने से कई सांप पहले ही मर चुके थे। (रिपोर्ट: सुबोध पाण्डेय)

1 comments:

आलोक मोहन said...

janta hu bhai
mai bhi lakhimpur kheri ka hu
baad ne bahut buri halat ker di hai

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