International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Mar 16, 2010

गौरैया बचाओ


ऋषभ त्यागी* गौरैया बचाओ की मुहिम का हिस्सा बनकर मुझे बेहद ख़ुशी है. मैंने भी कुछ लिखना चाहा

परन्तु कुछ समझ नही आया तो तुकबंदी बनाकर एक छोटी सी कविता लिख डाली. कविता में छिपे भाव को समझें और गौरैया बचाओ  मुहिम में अपना योगदान दे-
खीरी हो या हो औरैया,
नहीं दिखती कही गौरैया.
जाग जाओ सभी बहन भैया,
तभी करेगी हर घर आंगन में प्यारी गौरैया छैय्या छैय्या।

               ये रहेगी तो जग रहेगा,
               जग रहेगा तो हम रहेंगे.
               तो आओ सब मिलकर लक्ष्य बनायें,
               नन्हीं गौरैया को हर हाल में बचाएं ।  
ऋषभ त्यागी (लेखक: राष्ट्रीय सहारा - हिंदी दैनिक लखीमपुर के ब्यूरो प्रभारी हैं. इनसेrishabh.lakhimpur@gmail .com पर संपर्क कर सकते हैं)

4 comments:

  1. कृष्ण मिश्रMarch 16, 2010 at 7:53 PM

    एक सुन्दर कविता जिसे गाकर लोगों को आकर्षित किया ज सकता इस खूबसूरत पक्षी के प्रति!

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  2. kavita se bhi kahi jada sundar bhav hai tyagi ji.umeed hai ki aap ka sandesh door tak jayega.shubhkamnayen

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  3. tyagi ji aapko aur kk misrhra ji dono ko bahut abhar.khas bat ye hai ki kisi ne wild life ko lekar pahli bar koi aisa andolan chalaya hai ..jis se sab judna chahte hai

    ReplyDelete

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