International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Mar 14, 2010

परिंदों के लिए शहरों में पानी कौन रखता है

गौरया : © अजीत कुमार शाह*
 मयंक बाजपई*
अब मेरे शहर में परिंदों को पानी कौन रखता है
मिटटी के घर में ओसरे के नीचे.

खाली पड़ी अलमारी के पीछे
पेड़ कि टहनियों कि गोद में छिपकर
वो झाकती थीं खिडकियों से उचक कर ...
आंख खुलने से पहले चली आती थी
नीद आने तक छिप छिप कर बतियाती थी
मैंने उसको छुआ नहीं
क्योंकि मै उसका हुआ नहीं
अम्मा कहती सोचो मुंडेर पर ये गुरैया क्यों डोल रही है
बापू कहते जल्दी जागो ये चिड़िया बोल रही है
अब न  घोसला और न घर है
एक अँधेरा कमरा है और खँडहर
मुंडेरों पे छाई है वीरानी
दहशत खड़ी है कुछ अनजानी
घर गिर चुकें है मकाँ बन चुके है
क्या बनना था और क्या बन चुके है
अब न चिड़ियाँ का झुरमुट ही दिखता है
मशीनों का जंगल ही बनता है
एक शायर मुझसे बस इतना ही बोला
इतना ही बोला ....

नये कमरों में अब चीजें पुरानी कौन रखता है
परिंदों के लिए शहरों में पानी कौन रखता है.........



मयंक बाजपई ( लेखक अमर उजाला दैनिक अखबार सीतापुर में पत्रकार हैं, कविता और मानवीय मुद्दों पर लेखन, आंदोलनी विचारधारा से हैं। इनसे mayankbajpai.reporter@gmail.com संपर्क कर सकते हैं। )

7 comments:

  1. bahut he sundar.....


    jarurat hai chhat pr pane rakhne ke

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  2. Subodh Pandey, Correspondent Hindustan DailyMarch 19, 2010 at 8:21 PM

    Dear Mayank !
    Ur poem is nice. Actually we r increasing jungles of Concrete & diminishing trees n real forests.
    I wana thank & appreciate KK Misra also.
    My words written hereinunder r 4 both, u & KK Misra.
    I wana say Mr Misra that ur attitude n efforts 4 preservation of a lil creature which used 2 live n wander around us, namely "GAURAIYA", is appraisable.
    I salute u 4 it.
    Keep it up n try 2 do the same 4 other creatures too of this planet who r facing attrocities of the "BEAST" that's unfortunatelly called Humanbeing.
    They need proper care n safety n u can do it.
    May ur present 'Abhiyan' get an unpredictable success. Amen.
    May b thea r less ppl involved in this 'Abhiyan' with u at the moment but i m sure that u ll get more n more support of the persons like me who do love nature but who r negligent or irresponsible n lazy & w8 for an initiative 2 b taken by some1 else.
    I would like 2 quote here-
    " Hum akele hi chale they zaanib-e-manzil magar;
    Log milte hi gaye aur kaarvan banta gaya."

    I m sure that ur initiative ll awake others n ur efforts ll bring the gr8 success.
    Famous poet Dushyant Kumar has said it as follows-
    " Kaun kahta hai aasman nahi tuta karta;
    Ek patthar to tabiyat se uchhalo yaron !"

    At last my best wishes 4 ur efforts with these lines-
    "Koi b koshish kabhi naakam ho sakti nahi;
    Manzilen na b mili to faasle ghat jayenge."

    --SUBODH PANDEY
    Correspondent
    Hindustan Daily
    Nighasan-Kheri Email- pandey_subodhlmp@yahoo.com

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  3. mayank ki lekhni ka to wese bhi koi jawab nahi hai...kam umar me itna samjhna...itni gambherta dikhana...sabke bas ki baat nahi hoti...lage raho mere dost...bahut aage jana hai....tunhara vivek

    ReplyDelete
  4. vivek bhai aur subodh dada ne meri rachna pe jo likha hai uske jawab me mai bas itna hi kahuga ki
    IS NADI KI DHAR SE THANDI HAWA AATI TO HAI
    NAV JARJAR HI SAHI LAHRON SE TAKRATI TO HAI
    EK CHINGARI KAHI SE DHOOD LAO DOSTON
    IS DIYE ME TEL SE BHIGI HUI BATI TO HAI

    ReplyDelete
  5. mayank bhai ,,
    hum logon ko dudhwa.com se ek sath ane ka jo mauka mila hai ,to shayad ek achchhi shuruwat ki nishani hai, mudde bahut se hai ,age uthte hi rahenge hai,.mai chahunga,
    abdul salim khan
    Correspondent
    Hindustan Daily
    bijua-Kheri Email- salimreporter.lmp@gmail.com

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  6. I Know This name "Mayank Bajpayee " from my
    childhood days..from the beginning he is poet type of guy..i am so much proud that my friend having great thinking towards this kind of issues..

    Awesome Lines Bro...
    Keep it up..
    Atul Yadav

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  7. bhut achaa likha hai .

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