डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 06, June 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Feb 28, 2010

इस्लाम में वृक्षों तथा जीवों का महत्व

 मशहूद हुसैन सिद्दीकी*  हज़रत अनस रज़ी अल्लाह अनूह से रवायत। मोहम्मद साहब से सुनी बातें जो कही
गयी हैं, कि अल्लाह के रसूल मोहम्मद ने फ़रमाया, कि जो कोई मुस्लिम बन्दा किसी दरख्त का पौधा लगाये या खेती करे, फ़िर कोई इंसान या परिन्दा या चौपाया इस दरख्त या खेती में से खाये, तो ये उस बन्दे की तरफ़ से सदका़ और कारे सवाब होगा (सही बुखा़री/ सही मुस्लिम)

उपरोक्त हदीस (मोहम्मद साहब ने जो अपनी मुबारक जुबान से फ़रमाया) का सन्देश एंव शिक्षा यही है, कि इंसानों के अलावा अल्लाह के पैदा किये हुए सभी जानवरों, परिन्दों को खिलाना भी सदका (दान) और का़रे सवाब (पुण्य) है। इस्लामी धर्म-ग्रन्थों में स्पष्ट रूप से उपदेश विद्यमान हैं, जिनमें वृक्षारोपण तथा वृक्षों की सुरक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया गया है। जहाँ फ़लदार वृक्ष की एक टहनी को दातून के लिए तोड़ना भी पाप है, वहीं इस बात के लिए भी मानव जाति को मना किया गया है, कि वृक्षों के नीचे किसी प्रकार की गन्दगी करना अनुचित एंव अव्यवहारिक कृत्य है। क्योंकि इन्ही वृक्षों के नीचे बैठकर राहगीर अपने सफ़र की थकान को दूर करता है।

एक अन्य हदीस के अनुसार रवायत है, कि मोहम्मद (सल्लाहो अलैह वसल्लम) एक ऊँट के पास से गुजरे जिसका पेट (भूख की वजह से) उसकी कमर से लग गया था, तो आपने फ़रमाया कि "लोगों !" इन बेजुवान जानवरों के संबन्ध में ईश्वर से डरो (इनकों इस तरह भूखा न मारो) इन पर सवार हो तो ऐसी हालत में जब ये ठीक से हों ( यानी स्वस्थ हो और भूखे न हों)

यदि बेजुबान जनवरों के साथ दया और स्नेह का भाव रखा जाय तो ईश्वर बुरे कृत्यों के बावजूद भी उन्हे माफ़ कर देता है। ऐसा ही एक उदाहरण इस हदीस में मौजूद है।

"अबू हुरैरा रज़ी अनहू से रवायत है, कि अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया कि एक बदचलन औरत को इस नेक कार्य करने पर पापों से क्षमा मिल गयी, वह एक ऐसे कुत्ते के पास से गुजरी, जो कुएं के चारों तरफ़ चक्कर काट रहा था, उसकी जबान बाहर लटक रही थी, प्यास के कारण उसकी दशा दयनीय हो गयी थी। इस औरत ने वहाँ रस्सी और बाल्टी आदि न मौजूद देखकर अपने वस्त्रों की रस्सी बनाकर कुएं से जल बाहर निकालकर कुत्ते को पिलाया और उस प्यासे कुत्ते की जान बचाई। इस महिला के  इस बेहतरीन कृत्य के कारण उसे अल्लाह ने उसके गुनाहों के लिए माफ़ करने का फ़ैसला दिया। रसूल अल्लाह से मालूम किया गया कि "क्या जानवरों को खिलाने-पिलाने से भी सवाब है, आपने फ़रमाया कि बेशक! हर जिन्दा जानवर के खिलाने पिलाने से सवाब है।

किसी जीव के साथ दुर्व्यहार करने की सज़ा भी तय की गयी है,
 हजरत अब्दुल्ला बिन उमर से रवायत है, कि रसूल अल्लाह(सल्लाहो अलैह वसल्लम) ने फ़रमाया कि एक जालिम औरत द्वारा बिल्ली को बड़ी निर्ममता से मारने के कारण अजा़ब (ईश्वर की ओर से कठोर दण्ड) दिया गया, चूंकि उस औरत ने उस बिल्ली को बन्द कर दिया और कुछ खाने को भी नही दिया, नतीजतन वह तड़प-तड़प कर मर गयी!  इसी लिए इस औरत की क्रूरता के कारण उसे कठोर सज़ा मिली।
पशुओं के साथ क्रूरता और निर्दयता का व्यवहार करने वाले मनुष्य का ह्रदय कठोर बन जाता है, और उसकी कोमल प्रवृत्तियां नष्ट हो जाती हैं, जो व्यक्ति जानवरों के प्रति दयाभाव रखता है, तो उसकी प्रवृत्ति सभी जीवों के लिए वैसी हो जाती है, फ़िर चाहे वह इन्सान हो या जानवर।
इस सन्दर्भ में एक एतिहासिक किस्सा है-

शहर गज़नी में एक व्यक्ति जिसका नाम सुवुक्तगीन था, एक दिन शिकार को जा रहा था, तभी राह में उसे एक हिरनी और उसका बच्चा चरते हुए मिले, सुवुक्तगीन ने घोड़े को उसके पीछे दौड़ाया, हिरनी तो भाग गयी किन्तु उसका बच्चा पिछड़ गया, सुवुक्तगीन उसे पकड़कर अपने घर की ओर चल दिया। पर उस हिरनी माँ ने अपने बच्चे को ले जाने वाले का पीछा किया, प्रेम और बच्चे के बिछुड़ने के शोक में वह माँ भाव-विहवल होकर दौड़ती जा रही थी घोड़े के पीछे......तभी अचानक सुवुक्तगीन ने पीचे मुड़कर देखा!, उस हिरनी माँ की आंखों में बच्चे के विछोह का दर्द वह भाँप गया, और उसने बच्चे को उसकी माँ के पास छोड़ देने का निर्णय लिया। बच्चा छूटते ही कुलंचे भरता हुआ माँ के पास आ गया, दोनों खुशी से जंगल की ओर चल दिये।
रात में सुवुक्तगीन ने मोहम्मद (सल्लाहो अलैह वसल्लम) को ख्वाब में देखा, कि आप ने फ़रमाया, सुवुक्तगीन! तुमने बेजुबान मासूम हिरनी और उसके बच्चे पर रहम किया, तुम्हारा यह कार्य अल्लाह को बहुत पसन्द आया। अल्लाह ने तुम्हारा नाम बादशाहों की फ़ेहरिस्त में लिख दिया है, अब तुम जल्द ही बादशाह बनोगे। लेकिन बादशाहत मिलने पर अहंकार मत करना। सुवुक्तगीन ने बादशाह बनने के उपरान्त जीवन भर उस बात को अपनाया।

पर्यावरण, वन्य-जीवन के सरंक्षण की शिक्षा इस्लाम के ग्रन्थों में जगह-जगह उद्दत की गयी है, इस्लाम के प्रमुख कर्म वाक्य (कलमा) में एंव प्रत्येक अध्याय के आरम्भ में  "अर्रहमान" - "अर्रहीम" शब्द लिखे गये हैं, जिनका अर्थ है, कि परमात्मा सृष्टि की रचना के समय भी दयालू थे और सदैव ही दयालू रहेंगे। इस्लाम के सहाबा अकराम में एक हज़रत अली का उपदेश है, कि "तू पेट को पशु-पक्षियों की कब्र मत बना"। सम्राट अकबर का भी यही कथन था कि "मैं अपने पेट को दूसरे जीवों का कब्रिस्तान नही बनाना चाहता"। अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया है, कि कुरान का फ़रमान है, कि "तुम जमीन वालों पर रहम करों, मैं तुम पर रहम करूँगा"।
करो मेहरबानी तुम अहलेजमीं पर। खुदा मेहरबाँ होगा अरशेबरीं पर॥

इसलिए हमारा कर्तव्य है, कि हम पशु-पक्षियों से प्रिय व मीठे शब्दों से ही कुछ कहें। वृक्षों के सरंक्षण के लिए समाज में चेतना जागृत करे, हर व्यक्ति वृक्षों की सुरक्षा एंव सरंक्षण को अपना नैतिक दायित्व समझें। धरती पर ईश्वर का चमन तभी बन सकेगा, जब सर्वत्र फ़ल-फ़ूल, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी तथा जल, एंव स्वस्थ जलवायु उपलब्ध होगी, हम सब ये संकल्प ले, कि मानव जाति कि सोच को परिवर्तित करने का सार्थक प्रयास करेंगे, जिससे उनमें जीवों के प्रति प्रेम, दया और करूणा का भाव उत्पन्न हो, ताकि यह वसुन्धरा सभी प्राणियों का सुन्दर चमन बनी रहे।

 मशहूद हुसैन सिद्दीकी (लेखक दुधवा टाइगर रिजर्व, व खीरी जनपद के वन-विभाग में कार्यरत रहे, वर्षों तक  फ़ारेस्ट मिनिस्टीरियल एसोसिएशन के पदाधिकारी रहे, आजकल सेवा निवृत्त होने बाद से लेखन में अभिरूचि के कारण लेखन कार्य में सक्रिय हैं, इनसे फ़ोन द्वारा 09415181789 पर संपर्क कर सकते हैं।)

7 comments:

Suman said...

होली की शुभकामनाए.nice

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सुंदर आलेख, बहुत नई जानकारियाँ मिलीं। इन सब के बावजूद नरीह जानवरों का वध कुर्बानी के नाम पर क्या उचित है?

bhAratiyA nAgarik said...

itna sab kuchh hone ke baad bhi ek vishesh din karodon jaanvar tyohar ke naam par kaat diye jaate hain.

D.P.Mishra said...

बहुत नई जानकारियाँ मिलीं। इन सब के बावजूद नरीह जानवरों का वध कुर्बानी के नाम पर क्या उचित है?

MOHD.TANZEEM KHAN said...

Respected Sir,

I am Mohd.Tanzeem Khan.maine Dudhwa live.com open kar aapki Submit ki huee Jankari Dekhi Mujhe Bahut Achcha laga ki aap ek achche & Mahan wildlifer hain.Main BNHS/IBCN Ka Pichle 5Years se Regd.Member Hun & katrniyaghaat ki 8 November 2009 ki Tiger Conservation Seminar main Bhaag le chuka hun .kya Dudhwa Main Tiger Surashit Bach Payega?

Mohd.Tanzeem Khan
wildlife.lmp@gmail.com
Contact-09889067786

कृष्ण मिश्र said...

यकीनन बचेंगे, अगर आप बचाना चाहोगे, लोग सिर्फ़ बात करते है, वृक्ष होगे चिड़िया, और जंगल होगें तो बाघ जैसे जीव बचेंगे बशर्ते प्रत्येक नागरिक इनकी रक्षा की जिम्मेदारी ले,और हाँ महान मैं नही हूं!

Anonymous said...

वैज्ञानिक/धार्मिक, ज्योतिषीय इत्यादि से सम्बन्धित विषय-आधारित (थीम-बेस्ड) वन/उद्यान विकसित करके भूमि को एक प्रेरणास्रोत बनाने अथवा विशेषीकृत (कस्ट्माइज़्ड) वृक्षारोपण करने के इच्छुक गम्भीरों! सम्पर्क करें- 09425605432 सुमित, हरित नवाचारी

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