डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 06, June 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Feb 3, 2010

शहर के नज़दीक पहुँचा जंगल का राजा

दुधवा लाइव डेस्क: 02/02/2010 लखीमपुर-खीरी,  जिला मुख्यालय से तकरीबन १० कि०मी० उत्तर में उल्ल नदी और कण्डवा नदी के मध्य स्थित रुद्रपुर गाँव में बाघ देखे जानें से ग्रामीणों में दहशत का महौल है। यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक ग्रामीण गन्ने के खेत में शौच के लिए गया था अचानक उसने पीछे मुड़ कर देखा तो एक विशाल धारीदार जानवर दिखाई पड़ा। उस व्यक्ति के मुताबिक, बड़े सिर वाला जानवर उसकी किसी हरकत से पहले  एक ही छलांग में गन्ने के खेतों में गायब हो गया।
वन-विभाग के कर्मचारी सूचना प्राप्त होते ही मौके पर पहुँचे, पर उन्होंने बाघ की मौजूदगी की संभावना को पूरी तरह नकार दिया है। जबकि ग्रामीणों के दहशतजदा चेहरे और  उस जानवर को देखने का दावा करने वाले व्यक्ति  के शब्द, कही न कही कुछ तो होने की गवाही दे रहे थे।
वन्य जीव विशेषज्ञ और मीडियाकर्मियों ने गाँव वालों के साथ गन्ने के खेत का जायजा लिया जहाँ बाघ देखे जाने की बात कही गयी थी, किन्तु जमीन सख्त होने व  गन्ने की सूखी पत्तियों की मौजूदगी की वजह से जानवर के पद-चिन्हों को नही बनने दिया, जिससे उसके होने की पुष्टि की जा सके।
चूँकि ये इलाका शारदा जैसी विशाल नदी के दक्षिणी भाग में है जहां कई छोटी नदियाँ और उनके किनारों पर श्रंखलाबद्ध वृक्ष व झाड़िया है, साथ ही इस इलाके में गन्ने की बहुतायात में खेती भी इस जानवर के लिये बेहतर हविटेट है जो उसे जंगल के ग्रासलैंण्ड का एहसास कराते होंगे। अतीत में इस ट्रैक से कई जंगली जानवरों के गुजरने की घटनायें हो चुकी है, जिनमें बाघ, तेन्दुआ व गैन्डा ये तीनों जानवरों ने समीप के जनपद सीतापुर व लखनऊ तक पहुंचने की घटनायें हुई हैं।
खीरी जनपद के दक्षिण खीरी वन प्रभाग के अन्तर्गत आने वाला यह क्षेत्र  कभी जंगलों का हिस्सा था किन्तु बहुत जल्द ही मानव आबादी ने जंगलों का सफ़ाया कर कृषि-भूमि तैयार की गांव के गांव बसते चले गये।
वन-विभाग को लगातार इस इलाके पर नज़र रखनी चाहिए और लोगों को भी शान्ति बनाये रखनी चाहिए ताकि यह जानवर जंगल में दोबारा वापस जा सके।

9 comments:

shama said...

Swagat hai..lakhinpur khiri gayi hun..kuchh yaaden taza kara deen!

kshama said...

Dudhwa National park dekh hai..chitran aankhon ke saamne se ghoom gaya!

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें

शशांक शुक्ला said...

बहुत अच्छी जानकारी दी है अगर आप वही के निवासी है तो कोशिश करियेगा कि वहां के लोग डर की वजह उस टाइगर को जो हमारा राष्ट्रीय पशु भी है उसको कोई नुकसान न पहुचे। क्योंकि आपको पता होगा कि पूरे देश में सिर्फ1411 बाघ ही बचे है। जिसके पीछे हमे यानी मनुष्य है

sushant jha said...

वधाई...इस साईट को शुरु करने के लिए। हमें उम्मीद है कि हिंदी में पढ़नेवाले लोगों के बीच ये साईट नई जानकारियों और जागरुकताओं का स्रोत बनेगी। लोग इससे जुड़ेगें और एक नई क्रान्ति की शुरुआत करेंगे। ये साईट नई बुलंदियों को छुए, हमारी यहीं कामना है।

D.P.Mishra said...

Very nice site for latest information about on Dudhwa.

जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } said...

कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
कलम के पुजारी अगर सो गये तो
ये धन के पुजारी
वतन बेंच देगें।



हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में प्रोफेशन से मिशन की ओर बढ़ता "जनोक्ति परिवार "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ ,

शरद कोकास said...

यह बहुत अच्छी शुरुआत है । इसमें अन्य लोगों के विचार और अन्य क्षेत्रों के समाचार भी सम्मिलित करें । पर्यावरन विदों और सामाजिक चेतना से जुड़े लोगों को भी आमंत्रित करें । एक ऐसा नेटवर्क तैयार करें कि लगातार सामग्री मिलती रहे । शुभकामनायें - शरद कोकास , दुर्ग छत्तीसगढ़

संगीता पुरी said...

अच्‍छी लगी आपकी रचना .. इस नए चिट्ठे के साथ हिन्‍दी चिट्ठा जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

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