International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

May 14, 2015

हथिनी मोहनकली ने दिया मादा बच्चे को जन्म




इस मादा बच्चे का नाम रखा गया पूर्णिमा
पन्ना टाइगर रिजर्व में अब हाथियों की संख्या हुई चौदह 

पन्ना, 12 मई - 

बाघों से आबाद हो चुके म.प्र. के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्य प्रांणियों के साथ - साथ वनराज और गजरात के कुनबे में भी वृद्धि हो रही है. पन्ना टाइगर रिजर्व की 16 वर्षीय युवा हथिनी मोहनकली ने एक स्वस्थ और खूबसूरत मादा बच्चे को जन्म दिया है. पार्क प्रबंधन ने इस नवजात मादा बच्चे का नाम पूर्णिमा रखा है. क्यों कि इसका जन्म बुद्ध पूर्णिमा के दिन हुआ है. इस नन्हें मेहमान के आगमन से अब पन्ना टाइगर रिजर्व में हाथियों की संख्या बढक़र चौदह हो गई है.

क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व आर.श्रीनिवास मूर्ति ने आज बताया कि हथिनी मोहनकली ने विगत 4 मई को सुबह 4.10 बजे हांथी कैम्प हिनौता में मादा बच्चे को जन्म दिया था. जन्म के समय हांथी के इस बच्चे का वजन 95 किग्रा. था, वर्तमान में मां व बच्चा दोनों ही पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं. हथिनी मोहनकली की यह दूसरी संतान है, इसके पूर्व इस हथिनी ने पन्ना टाइगर रिजर्व में ही मादा शिशु वन्या को जन्म दिया था, जो अब साढ़े चार वर्ष की हो चुकी है. वन्य प्रांणी चिकित्सक डा. संजीव गुप्ता ने बताया कि नये मेहमान पूर्णिमा के आगमन से यहां हाथियों के कुनबे में आठ वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या 6 हो गई है. इस कुनबे में सबसे बड़ी चैन कली 8 वर्ष, वन्या साढ़े चार वर्ष, अनन्ती 4 वर्ष, कृष्णकली ढाई वर्ष, प्रहलाद 2 वर्ष तथा पूर्णिमा 9 दिन की शामिल है. पूर्णिमा के जन्म से हांथी कैम्प हिनौता का आकर्षण बढ़ गया है. पन्ना टाइगर रिजर्व के भ्रमण में आने वाले सैलानी हथिनी मोहनकली के इस नन्हें शिशु को देखने बड़ी संख्या में प्रतिदिन हांथी कैम्प पहुंच रहे हैं.

अरुण सिंह 
पन्ना- मध्य प्रदेश 
aruninfo.singh08@gmail.com

0 comments:

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था