International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Feb 4, 2015

एक तेंदुए का क़त्ल- जहां इंसानियत और दरिन्दगी में फ़र्क को ही मिटा दिया गया

हापुड़ में हथियार बिना ही मार गिराया तेंदुआ

-शुक्रवार की रात को पहुंचा था जंगल में
-शनिवार की सुबह दो कुत्तों को बनाया निवाला
-आठ घंटे के आप्रेशन में ग्रामीणों ने बिना हथियार के मार दिया तेंदुआ
-पुलिस-प्रशासन और वन विभाग की टीम पड़ी रही जंगल में
हापुड़। मुलित त्यागी
थाना हापुड़ देहात अन्तर्गत गांव वझीलपुर के जंगल में शुक्रवार की रात को पहुंचे तेंदुए ने शनिवार की सुबह दो कुत्तों को अपना निवाला बना डाला। जिसके बाद ग्रामीणों ने जंगल में तेंदुए की तलाश शुरू करते हुए अधिकारियों को सूचना दी। वन विभाग और ग्रामीण आठ घंटे तक तेंदुए को घेरने में लगे रहे जिसके बाद दोपहर तीन बजाकर दस मिनट पर छ ग्रामीणों ने सरसो के खेत में घुसकर तेंदुए को दबोच लिया। आधा घंटे तक ग्रामीणों और तेंदुए के बीच चली मुठभेड़ के बाद तेंदुआ मारा गया जबकि ग्रामीण बुरी तरह जख्मी हो गए। पुलिस ने घायलों को नर्सिंग होम में भर्ती कराया जबकि तेंदुए के  शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
जिले की तीनों तहसीलों में दहशत का पर्याय बन रहे तेंदुए को शनिवार की दोपहर थाना हापुड़ देहात के गांव वझीलपुर-धनौरा के जंगल में उस समय मार डाला जब वह सरसो के खेत में घुस गया। शुक्रवार की रात को सूदने गांव की पुलिया पर परितोष त्यागी निवासी असौड़ा ने तेंदुआ देखा। जिसके बाद सूदना निवासी हरेन्द्र को दिखाई दिया। जिसके चलते रात में ही गांव में लाउडस्पीकर से एनोउंस करा दिया। शनिवार की सुबह होने पर तेंदुए वझीलपुर के जंगल में पहुंचा और दो कुत्तों पर हमला बोल दिया। सूचना मिलते ही धनौरा और वझीलपुर के ग्रामीणों जंगल में पहुंच गए और प्रशासनिक व वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। जिसके बाद वन विभाग, प्रशासन औप पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। डीएम के आदेश पर तेंदुए की पुष्टि होने पर मेरठ, गाजियाबाद से जाल मंगवाकर टीम को बुलाने के लिए कॉल कर दी गई। 


इस दौरान ग्रामीण जंगल में अडे रहे। तेंदुए ने राजकुमार त्यागी की सरसो के खेत में घुसकर दो बार खेत में खड़े यूकेलिप्टिस और नीम के पेड़ पर छलांग लगाते हुए दहाड़ लगाई। जिसके चलते वन विभाग और पुलिस टीम के साथ ग्रामीण भी पीछे हट गए। अपराहन करीब ढाई बजे वझीलपुर निवासी संदीप त्यागी, संजीव त्यागी, छोटू, भूरे, रिंकू, यूनूस आदि दिलेरी दिखाते हुए खेत में घुस गए। जहां पर बैठे तेंदुए से उनकी भिड़ंत हो गई। करीब तीस मिनट तक ग्रामीण युवाओं की टीम और तेंदुए के बीच कुश्ती चलती रही जबकि वहां पर खड़ी फोर्स और वन विभाग की टीम पीछे हट गई। करीब तीन बजकर दस मिनट पर ग्रामीणों की टीम ने तेंदुए को मार गिराया। जिसके बाद ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। परंतु तीस मिनट तक चले संघर्ष में संदीप के सिर और चेहरे पर तेंदुए ने अपने पंजे से गंभीर घाव कर दिए जबकि अन्य युवक भी घायल हो गए। घायलों को एम्बुलेंस में तुरंत हापुड़ के नर्सिंग होम भेज दिया गया। जबकि पुलिस ने ग्रामीणों के विरोध के बीच तेंदुए के शव को वज्र वाहन में रखकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ग्रामीणों ने घायलों के इलाज व खेत में फसल क्षति होने पर पीड़ित किसान को मुआवजा दिलाए जाने की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किया।



आधा घंटे तक चली कुश्ती
तेंदुआ चित्त
लाइव---

सरसो के खेत से आ रही दहाड़ और पेड़ पर हो रही उछल कूद ने सैकड़ों ग्रामीणों समेत पुलिस-प्रशासन और वन विभाग की टीम के होश उड़ा दिए। आठ घंटे तक चल रहे आप्रेशन तेंदुआ में शनिवार की दोपहर एक लाइव कहानी ने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए। सरसो के खेत में घुसे 6 युवाओं की करीब तीस मिनट तक तेंदुए से कुश्ती चली। जिसमें फिल्म हिम्मतवाला और सिलसिले की तरह संदीप ने तेंदुए के गले में हाथ डालकर कोली भर ली। आधा किलोमीटर के दायरे में फैली जनता की सांसें रुक गई।

राजकुमार त्यागी के सरसो के खेत में तेंदुआ घुस गया। किसान अपने खेत में घुसने से सभी को रोक रहा था तो लोगों की भी खेत में घुसने की हिम्मत नहीं थी। वन विभाग की टीम और पुलिस बाहर से खेत को घेर रही थी। सुबह सात बजे शुरू हुआ आप्रेशन तेंदुआ दो बजे तक यूं ही चलता रहा। जिसमें एसडीएम, डीएसपी समेत वन विभाग के अधिकारी और एसओ देहात नरेन्द्र शर्मा मय पुलिस बल के मौके पर पहुंचे। परंतु इस दौरान खेत से आ रही तेंदुए की दहाड़ से सबके दिल कांप रहे थे। तेंदुए ने दो बार नीम के पेड़ और यूकेलिप्टिस के पेड़ पर चढ़ाई की। किसी ग्रामीण ने तमंचे से गोली भी चलाने की कोशिश की। लेकिन इस बीच तेंदुआ नीचे आ गया। दो बजे वझीलपुर निवासी संदीप त्यागी उर्फ मोटा अपने दोस्तों के साथ बैठा। और करीब 2.30 बजे अपने साथियों के साथ खेत में जा घुसा। सरसो के बीच में बैठा तेंदुआ अपने पास ग्रामीणों को देख भड़क उठा और उनपर हमला बोल दिया। परंतु संदीप ने पीछे हटने के स्थान पर तेंदुए की गर्दन में हाथ फंसा दिए। जिसके बाद दूसरे साथियों ने उसपर बलकटी से प्रहार किया। परंतु खाल में बलकटी ने कोई काम नहीं किया। अन्य साथी लाठी और डंडे के साथ लात घुसे से उसपर वार करते रहे। तेंदुआ भी पंजे से उनपर बार बार हमला करता रहा। लोगों की सांसे थम गई और किसी ने अंदर घुसने की कोशिश नहीं की। सिर और हाथ पैरों पर हुए हमले से युवा टीम के खून निकल कर नीचे गिरने लगा। परंतु किसी भी युवक ने साहस नहीं छोड़ा और बिना किसी हथियार के ही तेंदुए को चित्त कर दिया। तीन बजकर दस मिनट पर तेंदुआ नीचे गिर गया। जिसके बाद साहसी युवओं की टीम खेत से बाहर निकल आई। वन विभाग और पुलिस टीम ने तेंदुए को कब्जे में ले लिया। जिसके बाद उसको वन विभाग ने मृत घोषित कर दिया।


-फिल्मी शूटिंग की तरह था नजारा---

वझीलपुर और धनौरा गांव के बीच जंगल में आज एक फिल्मी शूटिंग की तरह नजारा देखने को मिल रहा था। हाथों में लाइसैंसी हाथियार लिए ग्रामीण घूम रहे थे तो सिपाहियों के हाथ में भी राइफल्स थी। लाठी-डंडे भी खूब थे। खेतों में आवाज आ रही थी , भगदड़ मच रही थी। आठ घंटे तक ग्रामीण और तंत्र के गण वहीं लगे हुए थे। बीच बीच में तेंदुए की दहाड़ सुनाई पड़ रही थी। एक दहशत सबके चेहरे पर थी। लेकिन जब गांव के बहादुरों ने तेंदुए से कुश्ती लड़ी तो पूरे जंगल में लोग एसे खड़े हो गए जैसे फिल्मी शूटिंग देख रहे हो।

-मेरठ से भी पहुंच गई फ्लायंग स्कवायड--

रात से सूदना, धनौरा और वझीलपुर के जंगल में तेंदुआ की आवक को लेकर शनिवार की सुबह डीएम के आदेश पर जहां हापुड़ वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। वहीं मेरठ से भी फ्लाइंग स्कवायड़ की टीम पहुंच गई थी।

-वझीलपुर के बहादुरों की हुई जय-जयकार---

तेुंदआ के मरने के बाद ग्रामीण एकत्र हो गए। जिन्होंने संदीप समेत सभी युवकों के नाम से जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। काफी देर तक जंगल में नारेबाजी होती रही। हर युवा और ग्रामीण खुश था। वी व्हाटसऐप पर वीडियो और इमेज लिए जा रहे थे।

-फसलों के नुकसान का मुआवजा मांगा---

राजकुमार त्यागी की सरसो और जेई की फसल पूरी तरह चौपट हो गई। जिसको लेकर ग्रामीणों में भारी रोष भी व्याप्त है। ग्रामीणों ने मांग की तेंदुआ आप्रेशन में जिस फसल का नुकसान हुआ है उसका शासन से मुआवजा दिलाया जाए।


-नहीं उठने दिया तेंदुए का शव---

तेंदुए के शव को लेकर वन विभाग की टीम ने कार स्टार्ट की तो ग्रामीणों का पारा ऊपर चढ़ गया। जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए कार को रोक लिया। इस दौरान कार से तेंदुए का शव बाहर निकाल लिया गया। जिसके बाद पुलिस ने शव को वज्र वाहन में रखा।


--बहादुरों की जुबानी तेंदुआ आप्रेशन की कहानी---
किसान और टाटा चलाने वाले संदीप का कहना था कि जब खेत में घुस गए तो तेंदुए ने झपट्टा मार दिया। हमे लगा कि भागे तो भी तेंदुआ मार डालेगा। इससे क्यों न इससे मुकाबला किया जाए। जिसके बाद मैने तेंदुए की गर्दन में हाथ डाल दिए। उसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता चला और उससे लड़ाई होती रही।
-संजीव त्यागी हापुड़ पैथोलॉजी पर काम करता है। जिसका कहना था कि जब संदीप और अन्य साथी उससे भिड़ गए तो हमने भी पीछे नहीं मुडकर देखा। और उनके साथ ही तेंदुए पर भिड़ गए।
-यूनूस भी मजदूरी करता है। जिसने बताया कि तेंदुए की दहशत से हर आदमी परेशान था। जब वह सामने आ गया तो फिर पीछे हटने को दिल नहीं करा और भिड़ गए।
-सैनी का कहना था कि तेंदुए से भिड़ने से पहले दहशत थी परंतु जब तेंदुए ने हमला किया तो अपने बचाव के साथ उससे लड़ना पड़ा।
वही राष्ट्रीय सैनिक दल के कार्यकर्ता ज्ञानेन्द्र त्यागी ने बताया कि तेंदुए ने इन युवकों पर झपट्टा मारा। उसके बाद ये भिड़ गए तो फिर पूरे गांव ने ही तेंदुए पर हमला बोल दिया और लात घुसे व लाठी डंडों से प्रहार किया। बाकि पल पल की सूचना ज्ञानेन्द्र पुलिस प्रशासन औप वन विभाग को देते रहे।


-हापुड़ जिले में दूसरी बार मारा गया तेंदुआ---

करीब दस साल से हापुड़ की गढ़ और धौलाना तहसील में तेंदुए का आतंक था। करीब पांच साल पहलरे जनपद गाजियाबाद के समय थाना बहादुरगढ़ के गांव सेहल के जंगल में भी ग्रामीणों और तेंदुए के बीच भिड़ंत हुई थी। जिसमें सिपाही समेत 21 किसान घायल हो गए थे। इस भिड़ंत में भी तेंदुए को मार गिराया गया था।

-अभी एक तेंदुआ और है जंगल में---

ग्रामीणों की माने तो एक तेंदुआ अभी भी जंगल में है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सरसो में घुसा था जबकि दूसरा गन्ने के खेत में घुसा हुआ था। ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक दूसरे तेंदुए को न पकड़ा जाए तब तक वन विभाग की टीम जंगल में ही डेरा डाले।

-लगातार काम्बिंग होगी--

वन विभाग के उप प्रभागीय निदेशकर केसी वाजपेयी का कहना है कि मृतक तेंदुए की उम्र करीब तीन या चार साल है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद तेंदुए का हाफिजपुर में अंतिम संस्कार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण एक और तेंदुआ बता रहे है जिसके लिए वन विभाग जंगल में लगातार काम्बिंग करेगा।

-घटते जंगल बन रहे तेंदुआ प्रजाति के लिए काल--

हापुड़ जिले में अब तक दो तेंदुए को मार दिया गया है। जबकि इसके अलावा मेरठ और हस्तिनापुर में भी तेंदुआ मारा जा चुका है। वहीं लखीमपुर और बिजनौर में भी तेंदुओं की मौत हुई है। जिसमें विशेषज्ञों का कहना है कि घटते जंगल के चलते तेंदुए आबादी की तरफ भाग रहे है। जहां पर इनकी भिड़ंत इंसानों से हो रही है। तेंदुआ आबादी की तरफ आकर गन्ने के खेत को अपने लिए सुरक्षित मानता है परंतु इन दिनों गन्ने की कटाई के चलते तेंदुआ किसानों के सामने आ जाता है। डीएफओ केसी वाजपेयी का कहना है कि गन्ने के खेत में तेंदुआ इस लिए घुसता है क्योंकि जंगल से भाग कर आने के बाद वह ईख को ही जंगल मानता है।


न जाल और न गन, खाली हाथ कैसे पकड़ती वन विभाग की टीम तेंदुआ

-चार साल में दो तेंदुआ बने काल के ग्रास
-अपनी जान पर खेल कर ग्रामीणों ने दिया साहस का परिचय
-न मारते तो आदमखोर बन जाता तेंदुआ
हापुड़। वरिष्ठ संवाददाता


तेंदुए का शोर मचने और जिले में दर्जनों कुत्तों व नील गाय का शिकार करने वाले तेंदुए को भले ही ग्रामीणों ने अदम साहस का परिचय देकर मार डाला परंतु इस आप्रेशन ने वन विभाग की पोल खोल कर रख दी है। बिना जाल और बिना बंदूक के पहुंची टीम बस खेत के बाहर खड़ी होकर औपचौरिकता निभाती रही। अगर आज तेंदुआ बच जाता तो वह आदमखोर होकर ग्रामीणों के लिए खतरा बन सकता था।
पिछले सात साल से तेंदुआ गढ़ और हापुड़ के लिए दहशत बना हुआ है क्योंकि जहां गढ़ क्षेत्र में तेंदुआ अब तक कई लोगों को घायल कर चुका है वहीं दर्जनों कुत्ते व नील गायों का भक्षण भी कर चुका है। इसके अलावा शनिवार की सुबह भी वझीलपुर के जंगल में तेंदुए ने दो कुत्तों पर हमला बोल दिया। खेतों में काम कर रहे किसानों के सामने जान बचाने का संकट उत्पन्न हो गया। रात को ही वन विभाग को तेंदुआ आने की सूचना दे दी गई जबकि सुबह को मीडिया ने भी खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। परंतु उसके बाद भी वन विभाग की टीम की पोल उस समय खुल गई जब तेंदुआ होने के वझीलपुर के जंगल में पुष्टि हो गई और पूरी टीम खाली हाथ खड़ी रही। टीम के पास न जाल था और न ही बेहोश करने वाली बंदूक थी। सुबह सात बजे से हजारों ग्रामीण खेतों पर थे। लेकिन वन विभाग कीीटम आराम से खेतों के बाहर घूमकर कर ही औपचारिकता निभा रही थी। तेंदुए की दहाड़ औक पेड़ पर चढ़ने से गांव दहशत में आ गए थे।


-साहस न दिखाते तो दर्जनों ग्रामीणों को मार देता तेंदुआ---
खेत में घुसे युवकों पर तेंदुए ने हमला बोल दिया। हमला बोलते ही संदीप और संजीव व यूनूस घायल हो गए और खून से लथपथ हो गए। साहस का परिचय देते हुए युवकों ने तेंदुए को खेत में ही रोक लिया और बिना हथियार के उससे भिड़ गए। ग्रामीणों ने लात घूसों से ही उसको इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। परंतु चर्चा है कि अगर 6 लोग साहस न दिखाते तो आदमखोर बनकर उन लोगों पर हमला करने वाला तेंदुआ दर्जनों ग्रामीणों को मार देता। क्योंकि वहां पर खड़े वन विभाग की टीम खाली हाथ खड़ी हुई थी।
-डीएफओ का कहना है कि जिले में बेहोश करने वाली बंदूक व जाल नहीं है। जिसको मंगाया गया था। उन्होंने दावा किया मेरठ से फ्लाइंग स्कावयड की टीम पहुंच गई थी।



500 अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी

हापुड़। वन विभाग ने तेंदुआ की मौत के बाद हापुड़ देहात थाना में पांच सौ लोगों के खिलाफ तहरीर दी है। डीएफओ केसी वाजपेयी ने जानकारी देते हुए बताया कि वाइल्ड़ लाइफ प्रोटेक्शन के अन्तर्गत पांच सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ तहरीर दी गई है।





मुलित त्यागी (वरिष्ठ पत्रकार)
हापुड़ 




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