International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Jul 24, 2014

आओ विगन बने....

 शाकाहार ही मानवता का चरम बिंदु है 

आओ हम सब विगन बने ताकि वसुंधरा हरी भरी बनी रह सके. पशुओं का मांस और उससे बने उत्पादों का बहिष्कार करे, क्योंकि जिस क्रूरता से छोटे छोटे दबड़ों में इन पशुओं को पाला जाता है वह सब देखकर परतंत्रता की पराकाष्ठा का अनुमान लगाया जा सकता, प्रकृति में उत्पन्न ये जीव जो खुले आसमान में उड़ते है, हरी भरी धरती में कुलांचें भरते है, सरोवरों में तैरते है अपने अपने कुटुंब के साथ, उनकी खरीद फरोक्त कर एक छोटी व् गंदी जगह पर रखना और दवाओं के साथ उन्हें भोजन देना जिससे उनमे मांस में बढ़ोत्तरी हो सके, कितना नैतिक है, इसे जरूर महसूस करिएगा, जीव ह्त्या न करे इस बात के लिए हम संवेदनशील है किन्तु मांस खाने के लिए जो जीव क़त्ल किए जा रहे है उनके लिए नहीं..आखिर ऐसा क्यों?

धरती सबकी है सबका इस पर बराबर का अख्तियार है, और प्रकृति में संतुलन भी तभी बरकरार रहेगा जब प्रकृति में मौजूद हर जीव को उसकी प्राकृतिक जगह पर प्राकृतिक तौर पर रहने दिया जाएगा, हर जीव की पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी अपनी सह्भाकिता है जो संतुलन के लिए आवश्यक है.

ह्रदय के भावों को स्वछंद छोड़ दे ताकि वे सवेद्नाओं को आपके भीतर आने दे और स्थिर रहने में मदद करे, यकीन मानिए इन लाखों करोड़ों जीवों को बंधक बनाकर जो क़त्ल किया जा रहा है उनकी चीत्कार आप को झकझोर देगी और आप फिर कभी इन बेजुबान जानवरों की लाशों की कब्रगाह अपने पेट में नहीं बनायेंगे...

सिर्फ अनुरोध है की शाकाहार ही मानवता का चरम बिंदु है आइये चले उस और कुछ कदम राह खूबसूरत लगेगी....

कृष्ण कुमार मिश्र
`
इस वीडियो को अवश्य देखिये थोड़ा वक्त निकाल कर....
वीडियो साभार: मीटफ्रीइंडिया.काम 




0 comments:

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था