International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Jan 1, 2014

पद्मभूषण बिली अर्जन सिंह की स्मृति में....

पद्मभूषण बिली अर्जन सिंह की मनाई गयी तीसरी पुण्य तिथि:

(पलिया-खीरी: दुधवालाइव डेस्क)  दुधवा लाइव डाट काम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पलिया के विकास खंड सभागार में कुंवर अर्जन सिंह की स्मृति में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमे जनपद मुख्यालय एवं पलिया विकास क्षेत्र से कई गणमान्य व्यक्तियों ने भागीदारी दी. सभागार में सर्व प्रथम बिली की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया तथा उनके द्वारा किए गए कार्यों पर चर्चा हुई. 


दुधवा नेशनल पार्क के प्रणेता एवं बाघों पर दुनिया में सर्वाधिक शोध कार्य करने वाले बिली अर्जन सिंह के कार्यों अतिरिक्त जो जंगल व् बाघ सरंक्षण में उनके कार्य अधूरे रह गए उन्हें पूरा करने का सकल्प भी लिया गया. सभागार में विमर्श के बाद ब्लाक के प्रांगण में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमे बिली के टाइगर हैवन के निकट के कृषि फ़ार्म के मालिक हरदीप सिंह ज्ञानी ने बिली के वन्य जीव सरंक्षण के कार्यों की सराहना करते हुए उनके अधूरे कार्यों में पूर्ण सहयोग देने की बात कही साथ ही बिली से अपनी मित्रता का जिक्र करते हुए बाघ सरंक्षण में अपनी पूरी निष्ठा जताई, श्री ज्ञानी कभी दुधवा के प्रथम डाइरेक्टर डा. राम लखन सिंह के कार्यकाल के समय टाइगर गार्जियन भी बनाए गए थे.

पलिया के वरिष्ठ पत्रकार व् वाइल्ड्लाइफ़र डी. पी. मिश्रा ने अफ़सोस जताते हुए कहा की बिली को पूरी दुनिया जानती है और सम्मान करती है उनके बाघों के सरंक्षण में किए गए कार्यों के लिए किन्तु स्थानीय स्तर पर उन्हें अपने पूरे जीवन में ख़ास सहयोग नहीं मिला, श्री मिश्रा ने टाइगर हैवन के मौजूदा हालातों पर अफ़सोस जाहिर किया, की बिली के न रहने से वन्य जीवों का यह घर अब सूना हो गया है.

विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यू डब्ल्यू ऍफ़) के आफीसर दबीर हसन ने बिली की प्रतिमा का माल्यार्पण किया, साथ ही उन्होंने बिली अर्जन सिंह की स्मृति में पलिया-दुधवा चौराहे पर बिली की प्रतिमा स्थापित करवाने के लिए कहा, ताकि वन्य जीव सरंक्षण के पितामह की स्मृतियाँ व् उनके कार्य हमारी नई पीढी को बिली की याद दिलाते रहे.
सेंक्रोसेंट संस्था के प्रमुख नीरज बरतरिया ने बिली अर्जन सिंह की लखीमपुर महोत्सव में मौजूदगी का स्मरण करते हुए, उनके बाघ व् जंगल के बचाव के मुद्दों को ज़िंदा रखने की बात कही. 

पलिया ब्लाक के ब्लाक डेवलेपमेंट अधिकारी ने भी पद्मभूषण अर्जन सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए व् खेद प्रगट किया की इतने महान व्यक्ति  की पुण्य तिथि बहुत ही बड़े पैमाने पर मनानी होगी, और उनके कार्यों का प्रसार होना चाहिए.

प्रशांत पाण्डेय वरिष्ठ पत्रकार व् मोहम्मद सकील (वन्य जीव प्रेमी) सुनील जयसवाल (दुधवा फाउंडेशन ) ने बिली को श्रद्धांजलि दी व् अपने विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम में तमाम क्षेत्रवासी लोगों ने शिरकत की जिन्होंने बिली की बाघिन, तेंदुओं को उनके साथ रहते देखा.



वन्य जीवन के शोधार्थी  के. के. मिश्र ने कहा की बिली की प्रतिमा स्थापित करवाने के लिए वो प्रधानमंत्री व् प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे व् एक मुहीम भी चलायेगे प्रतिमा की स्थापना के सन्दर्भ में, साथ ही श्री मिश्र ने बिली अर्जन सिंह के वन्य जीवन के कार्यों व् अनुभवों को प्रदेश व् देश की शिक्षा प्रणाली में पाठ्यक्रम के तौर पर शामिल करने की मांग की.


टाइगर हैवन पहुंचकर बिली अर्जन सिंह के सभी प्रशंसकों ने बिली की समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजली दी. 




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