International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Mar 18, 2011

घर के इस परिन्दे को बचाने की एक मुहिम- गौरैया दिवस- 20 मार्च

अन्तर्राष्ट्रीय गौरैया दिवस- 20 मार्च 
दुधवा लाइव ई-पत्रिका ने  पूरे वर्ष गौरैया सरंक्षण  का जन-अभियान चलाकर मनाया गौरैया वर्ष- 2010

दुधवा लाइव की एक मुहिम जो उत्तर भारत के तराई क्षेत्र के जनपदों में एक जन-अभियान के रूप में अपना व्यापक प्रभाव छोड़ा, दुधवा लाइव के सहयोग से इस बार खीरी जनपद में मितौली, मोहम्मदी, पलिया, धौरहरा, कस्ता, बेहजम आदि स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रम वन्य-जीव प्रेमियों व आम-जनमानस द्वारा संपन्न कराये जायेंगे। इसके अलावा, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर, फ़ैजाबाद आदि जनपदों में जागरूकता अभियान चलाकर पक्षी प्रेमी, जन-समुदाय को जागरूक करेंगे, ताकि वह अपने इस घर-आंगन के पक्षी को सरंक्षित कर सके जो अनियोजित  विकास की भेट चढ़ रहा है, गौरैया की तादाद पिछले एक दशक में तीव्रता से घटी, नतीजतन पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों, पक्षी विशेषज्ञों का ध्यान नष्ट होती इस प्रजाति की ओर गया, खासतौर से इंग्लैंड के जन-मानस व पक्षी प्रेमियों ने इसकी संख्या का आंकलन करने की शुरूवात की और उन कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जो इस चिड़िया की प्रजाति के लिए हानिकारक थे।

गौरैया को वापस लाने में ये बाते हो  सकती हैं, मददगार है-

१-घर व आस-पास की जगहों पर विदेशी झाड़-झंखाड़ लगाने के बजाए स्वदेशी पुष्प व फ़लदार पौधे लगायें, क्योंकि खूबसूरती के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पौधे व वृक्ष अमूनन पक्षियों को भोजन उपलब्ध नही कराते। क्योंकि उनमें न तो फ़ल आते है और न ही उनके पुष्पों में पर्याप्त मकरंद व रस होता है। साथ ही अन्य कीट भी जो गौरैया का भोजन है, इन पौधों पर अपना जीवन यापन नही कर सकते।
 
२-कुकरबिटेशी प्रजाति का रोपड़ अत्यधिक किया जाए जिसमें लौकी कद्दू आदि।
३- घरों में ऐसा स्थान अवश्य छोड़े जहां गौरैया अपना घोसला बना सके, यदि ये स्थान पक्के व नव-निर्मित घरों में मौजूद नही है तो वहां लकड़ी आदि से निर्मित बाक्स बनवा कर लागाये जा सकते है, जो गौरैया को घोसला बनाने के लिए आकर्षित कर सकते हैं
५- पेस्टीसाइड का इस्तेमाल घरों व लॉन आदि में न करे, प्राकृतिक पेस्टीसाइड जैसे नीम का तेल आदि का इस्तेमाल करें।

 ६- याद रहे गौरैया के चूजे तभी जीवित रह सकते है, जब उन्हे मुलायम कीड़े खाने को मिल सके और यह तभी संभव है जब आप के घर देशी पौधे और बेलें हो जहां कीट अपना भोजन पा सके, और उन पौधों पर कीटनाशक का प्रयोग न किया जाए।

७- घरों की छतों पर, आंगन व दरवाजे पर पानी-दाना रखें ताकि पटते तालाबों और जमीन पर बिछते पत्थरों पर जहां बरसात का एक बूँद पानी भी नही ठहर सकता वहां ये आप के द्वारा रखी हुई पानी की बूंदें गौरैया ही नही वरन तमाम तरह के परिन्दों की प्यास बुझाएंगी---आप को लगता है कि इससे भी बड़ा कोई पुण्य होगा...कोई पूजा...कोई हवन......।

दुधवा लाइव डेस्क

1 comment:

  1. yea
    good people taking care all days of the year
    not only today
    congrats!!
    you are doing a wonderful work!!!

    ReplyDelete

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था