डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Mar 21, 2011

जानवरों के लिए डगर...


विश्व-प्रकति निधि ने नेपाल के गाँव धनबेलियां में की बैठक
बसंता वनक्षेत्र सामुदायिक वन समन्वय समिति हसुलिया कैलाली द्वारा ग्राम धन बेलिया वन्य जीव सरंक्षण पर एक गोष्ठी का आयोजन-

धनबेलिया (नेपाल) से देवेंद्र प्रकाश मिश्र की रिपोर्ट- 
नेपाल (धनबेलिया, 17 मार्च 2011) वन और वन्यजीवों की सुरक्षा व संरक्षण को लेकर विश्व प्रकृति निधि के तत्वाधान में नेपाल-भारत सीमा पार बैठक हुई। इसका आयोजन सीमावर्ती नेपाल की ग्रामीण संस्था बसंता वनक्षेत्र सामुदायिक वन समन्वय समिति हसुलिया कैलाली द्वारा ग्राम धन बेलिया में किया गया था। जिसमें भारत के दुधवा नेशनल पार्क से नेपाल के जंगल को जोड़ने वाले वसंता जैविक मार्ग को समृद्धशाली बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई ताकि दोनों देशों के वन्यजीव निर्वाध रूप से आवागमन कर सकें।

दुधवा नेशनल पार्क के जंगल से सटे नेपाल के जिला कैलाली के ग्राम धनवेलिया में आयोजित नेपाल सीमापार बैठक को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि हसुलिया इलाकाई वन क्षेत्राधिकारी विजय चंद्र ने नेपाल में चल रहे वन प्रबंधन के कार्यो को बताते हुए कहा लालबोझी क्षेत्र में जगल की जमीन को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया गया है। उन्होंने वनों की उपयोगिता को बताकर कहा कि अगर लोग उन्नतिशील पशुपालन करें तो मवेशियों का जंगल पर दबाव कम होगा साथ ही दूध के उत्पादन में भी वृद्धि होगी। श्री चंद्र ने कहा कि वन संरक्षण नहीं होगा तो वन्यजीव कहां रहेंगे। इसके लिए जैव विविधता को बचाए रखना जरूरी है। मोहाना नदी में डालफिन मछली पर शोध करने वाले प्रमुख जीव जंतु संरक्षक विजयराज श्रेष्ठ ने कहा कि नेपाल-भारत के बीच रोटी और बेटी का संबंध है वन्यजीव भी अनादिकाल से दोनों देशों के बीच आते जाते रहते हैं अब समय आ गया है कि वन्यजीवों का संरक्षण पार्को तक ही सीमित न रहे आज हम इस मुद्दे को घर आंगन तक ले आए हैं आगे हमरे बच्चे संरक्षण की बात सीखकर बड़े होंगे यही सफलता होगी। आशा है भविष्य में परिवर्तन जरूर आएगा। 

डब्लूडब्जूएफ नेपाल के परियोजना अधिकारी तिलक ढकाले, भलमंसा महासंघ के अध्यक्ष दीपक चौधरी, बसंता ग्राम के मणि प्रसाद चौधरी, राजेश चौधरी, कमल चौधरी, कलेशू चौधरी, कैलाश चौधरी, कर्ण बहादुर वन्य एवं वन्यजीव प्रेमियों ने कहा कि इस क्षेत्र में सामुदायिक वनों का विकास हो रहा है इससे ग्रामीणों की जंगल पर निर्भरता पर कमी आ रही है। भारत के दुधवा नेशनल पार्क के जंगल के समीप वर्दिया राष्ट्रीय निकुंज का जंगल है और दोनों को जोड़ने में वसंता जैविक मार्ग का महत्वपूर्ण स्थान है इसका संरक्षण किया जाना जरूरी है ताकि दोनों देशों के वयंजीवों का निर्वाध आवागमन बना रहे। इस जैविक मार्ग को समृद्धिशाली बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं बावजूद इसके बसंता जैविक मार्ग की सुरक्षा एवं संरक्षण की बात नेपाल और भारत की संसद में भी उठनी चाहिए। नेपाली वक्ताओं ने इस बात पर भी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि बसंता कारीडोर समाप्त होने के बाद अब नेपाल में हाथी, बाघ, गैंडा आदि वनपशु दिखाई देना बंद हो गए हैं। इससे पूर्व बैठक में पहुंचे भारत के प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों का माल्यार्पण करके स्वागत किया गया। बैठक का संचालन करते हुए वन समिति के सचिव रामू चौधरी ने सामुदायिक वन प्रबंधन एवं समिति के उद्देश्यों एवं कार्यो को बताते हुए कहा कि मोहाना नदी द्वारा किए गए कटान के बाद खाली भूमि पर समिति द्वारा वृक्षारोपण करके सामुदायिक वन तैयार किया जा रहा है। श्री चौधरी ने नेपाल में चल रहे जैव विविधता संरक्षण के कार्यो को भी बताया। बैठक में शामिल डब्ल्यूडब्ल्यूएफ भारत के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी डा. मुदित गुप्ता ने वन एवं वयंजीव संरक्षण के लिए गांवों में गठित ईको विकास समितियों के कार्यो को बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से जीविका के साधन एवं रोजगार आदि ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं जिससे जंगल पर आबादी का बढ़ रहा दबाव कम हुआ है। डा. गुप्ता ने वन उत्पाद तस्करी, अवैध शिकार आदि रोकने के लिए दोनों देशों के बीच शीघ्र ही प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की घोषणा की तथा बसंता जैविक मार्ग को पूर्व की स्थिति में लाने के लिए दोनों देशों के बीच संयुक्त कार्य योजना की जरूरत बताई। 


 सृष्टि कनजरवेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के सेक्रेटरी डीपी मिश्रा ने कहा कि वनों के संरक्षण के लिए जरूरी हो गया है कि प्रत्येक नागरिक इसकी उपयोगिता को समझे और घासफूस जलौनी लकड़ी आदि की व्यवस्था स्वयं करे तभी वनों पर निर्भरता कम होगी। ईको विकास समिति के मोटीवेटर छविनाथ चौहान, बरातीलाल आदि ने उपस्थितजनों से घर या खेत में एक पेड़ लगाने की अपील की और कहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण होगा और सभी को शुद्ध आक्सीजन भी मिलेगी। बैठक में भारत की ओर से राधेश्याम भार्गव, बिट्टू राना, अवधेश तिवारी, प्रेमलाल राना, फूल सिंह राना, रामप्रसाद राना, परमानंद आदि के साथ ही भारी संख्या में नेपाली नागरिक एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।

सीमापर नेपाल के जिला कैलाली के ग्राम धनवेलिया में हुई नेपाल-भारत सीमापार बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल मेहमानों का नेपालियों ने भव्य स्वागत किया। इसके अतिरिक्त होली के पावन अवसर पर रेखा चौधरी ने जहां स्वागत गीत प्रस्तुत किया वहीं पारम्परिक वेशभूषा में नेपाली वाद्य पर बालिकाओं ने झुमारा लोक नृत्य पेश करके उपस्थित जन समुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया। नेपाली संस्कृति को देखकर भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों ने उसकी भरपूर प्रशंसा की।

 देवेन्द्र प्रकाश मिश्र (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, वन्य-जीव सरंक्षण पर लेखन, अमर उजाला में कई वर्षों तक पत्रकारिता, मौजूदा वक्त में एक प्रतिष्ठित अखबार में पत्रकारिता, आप पलिया से ब्लैक टाइगर नाम का अखबार भी निकाल रहे हैं, इनसे dpmishra7@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं। )

1 comments:

RAVINDRA said...

The close & effective collaboration between India & Nepal is the need of hour that includes wildlife crime control, habitate management etc. Our Dudhwa, valmik tiger reserve & other sanctuaries are continuous with Nepal side & having open border with them makes cooperation necessary.
This also applies with Bhutan, Bangladesh & Myanmar.

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