डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 06, June 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Nov 19, 2010

दुधवा लाइव पत्रिका के एडिटोरियल बोर्ड का गठन

दुधवा लाइव के संपादकीय मंडल का गठन:

१८ नवम्बर २०१० को दुधवा लाइव ई-पत्रिका एडिटोरियल बोर्ड के गठन का कार्य संपन्न हुआ। दुधवा लाइव को एक वर्ष पूरे होने वाले है, इस यात्रा में हमें तमाम महत्वपूर्ण व्यक्तियों का अभूतपूर्व सहयोग प्राप्त हुआ। जिनका जिक्र हम बार-बार करते आयें हैं। 

पत्रिका के संवर्धन में हमारे विशेष सहयोगी रहे व्यक्तियों को एडिटोरियल बोर्ड के तहत उनकी महत्वपूर्ण भूमिकाओं के अनुरूप कार्यभार दिए गये। जिसमें सोमेश रत्न अग्निहोत्री लीगल एडवाइज़र, देवेन्द्र प्रकाश मिश्र एसोशिएट एडिटर, अरूणेश सी दवे एसोशिएट एडिटर एंव सुशान्त झा एडिटोरियल एडवाइजर, सर्व सम्मति से नियुक्त किए गये।

एसोशिएट एडिटर दुधवा लाइव देवेन्द्र प्रकाश मिश्र  वाइल्डलाइफ़ पत्रकार, पलिया, खीरी द्वारा दुधवा नेशनल पार्क के जीवन्त व ताजा घटनाओं से यह पत्रिका सदैव समृद्ध होती रही है।

एसोशिएट एडिटर दुधवा लाइव अरूणेश सी दवे, लेखक व समाजसेवी रायपुर छत्तीसगढ़ द्वारा वन्य-जीवन की उत्कृष्ट लेखन विधा एंव भारत के ब्रिटिश राज व वर्तमान वन-संपदा प्रबन्धन पर एक नया नज़रिया पत्रिका को लेखों के रूप में प्राप्त हुआ। 

एडिटोरियल एडवाइजर दुधवा लाइव सुशान्त झा नई दिल्ली, पत्रकार एंव लेखक, इन्हे  महत्वपूर्ण अखबारों, और टीवी चैनल्स में कार्यानुभव प्राप्त हैं, मौजूदा समय में एक  महत्वपूर्ण लेखन कार्य में व्यस्त हैं। इनका प्रोत्साहन व दुधवा लाइव के संपादन में सहयोग मिलता रहा हैं।

लीगल एडवाइज़र दुधवा लाइव सोमेश रत्न अग्निहोत्री एडवोकेट सुप्रिम कोर्ट ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली, (मैगसेसे पुरस्कार विजेता संदीप पाण्डेय तथा भारत के विशिष्ठ कानूनविद प्रशान्त भूषण जी के साथ कार्यानुभव)  द्वारा समय समय पर दुधवा लाइव पत्रिका को कानूनी सहयोग मिलता रहा हैं।

इस नये संपादकीय मंडल के गठन के उपरान्त दुधवा लाइव के विकास व प्रचार-प्रसार में आशातीत सफ़लता एंव प्राकृतिक विज्ञान व प्राकृतिक इतिहास का प्रसार करने में मदद मिलेगी।

अन्तर्जाल पर आप सभी से ज्ञान के उन्मुक्त प्रचार व प्रसार के लिए विनम्र अनुरोध के साथ पूर्ण सहयोग की आशा की जाती है।

धन्यवाद
संपादक
दुधवा लाइव

http://www.dudhwalive.com

8 comments:

Alok Kumar Mishra said...

अति सुंदर। आशा है कि इससे अब दुधवा लाइव की समृद्धता और सज्जा में अभूतपूर्व निखार आएगा।

Anonymous said...

congratulation from heart....all the best for many more years....

ira said...

congrats....wish u all the progress..

शरद कोकास said...

इस गठन पर बधाई व शुभकामनायें ।

sanu shukla said...

बहुत सराहनीय प्रयास है भाईसाहब ..सभी को बहुत बहुत शुभकामनाये..!!

grassrout Indian said...

Congratulation..... and Warm wishes for the rise as Sun of wild conservation portals

marie muller said...

good work you are doing!!!!!
wondeful e-magazine!

Anonymous said...

congrats

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आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

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क्षमा करो गौरैया...

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वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!