डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Nov 10, 2010

दुधवा में पर्यटन हुआ महंगा !

देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए मंहगा हुआ दुधवा नेशनल पार्क 
 दुधवा नेशनल पार्क से देवेन्द्र प्रकाश मिश्र की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के एकमात्र विश्व विख्यात दुधवा नेशनल पार्क का भ्रमण करना अब देशी- विदेशी पर्यटकों के लिए खासा मंहगा हो गया है। दो से तीन गुना तक हुई बढ़ोत्तरी की दरें इस साल 15 नवम्बर से शुरू हो रहे नवीन पर्यटन सत्र से लागू होगी। सन् 2003 के बाद यह वृद्धि की गई है। जिससे दुधवा नेशनल पार्क के पर्यटन व्यवसाय पर बिपरीत प्रभाव पड़ सकता है इस संभावना से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है। 

उल्लेखनीय है कि यूपी का इकलौता विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित दुधवा नेशनल पार्क प्रकृति की अनमोल धरोहर के साथ विलुप्तप्राय वन्यजीवों की विभिन्न प्रजातियों को अपने आगोश में समेटे है। इसमें शेड्यूल वन की श्रेणी में चिन्हित बाघ एवं तेंदुआ के साथ ही हाथियों के झुण्ड को स्वच्छंद रूप से विचरण करता हुआ देखा जा सकता है। जबकि देश में आसाम के बाद दुधवा ही ऐसा नेशनल पार्क है जिसमें तीस सदस्यीय गैण्डा परिवार रहता है। इनके संरक्षण और संवर्द्धन के लिए दुधवा पार्क में जहां ’गैण्डा पुनर्वास परियोजना’ चल रही है। वहीं बाघों की सुरक्षा एवं संरक्षण का दायित्व ’प्रोजेक्ट टाइगर’ संभाले है।  
दुधवा नेशनल पार्क के वन क्षेत्र में वृक्षों की 75 प्रजातियां 21 प्रकार की झाड़ियां, 17 तरह की बेल व लताएं तथा 77 प्रकार की घासों समेत 179 प्रकार की पानी में उगने वाले पौधे चिन्हित किए जा चुके हैं। इनमें से 24 प्रजातियां संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा चिड़ियों की 411, टेपटाइल की 25, एम्फीबियन की 15 तथा स्तनपाई जीवों की 51 प्रजातियां पाई जाती हैं। जबकि यूरोप, साइबेरिया आदि बर्फीले क्षेत्रों के विदेशी प्रवासी पक्षी भी शीतकाल के दौरान दुधवा पार्क के तालाबों एवं झीलों में देखे जा सकते हैं। इसमें यहां पाए जाने वाले बंगाल śलोरिकन एवं लेसर śलोरिकन नाम के दुर्लभ पक्षी भी दुधवा पार्क की पहचान बन चुके हैं। प्राकृतिक वैराव से परिपूर्ण दुधवा नेशनल पार्क के मनोहरी दृश्य देखने के साथ ही पशु-पक्षियों को कलरव को सुनकर पर्यटकों के लिए रोमांचकारी होता है। लेकिन अब प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण नयना भिराम नजारों सहित दुर्लभ प्रजाति के वयंजीवों को स्वच्छंद विचरण करता हुआ देखने के लिए भ्रमण हेतु आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को दुधवा दर्शन काफी महंगा साबित होगा। वह भी इसीलिए क्योंकि 15 नवम्बर से शुरू हो रहे पर्यटन सत्र से शासन द्वारा की गई मूल्य वृद्धि के अनुसार ही रेस्ट हाउस, थारूहट आदि का आरक्षण किया जाएगा। सन् 2003 से चल रही दरों में सात साल बाद दो से तीन गुना की वृद्धि की गई है।

उल्लेखनीय है कि प्रवेश शुल्क में हुई वृद्धि के अनुसार प्रति व्यक्ति तीन दिन के लिए पहले पचास रूपया था अब एक सौ रूपए हो गया है। पूर्व में बच्चों का प्रवेश निःशुल्क था अब देशी पर्यटक बच्चे का शुल्क 60 रूपए और विदेशी को सात सौ रूपए देने होगें। इसी प्रकार गाड़ियों के प्रवेश शुल्क में भी वृद्धि की गई है। जबकि हाथी सवारी के लिए चार व्यक्ति दो घंटा हेतु 300 रूपए देते थे अब प्रति व्यक्ति को 150 रूपए देने होंगे। दुधवा नेशनल पार्क में ठहरना भी महंगा हो गया है। इसमें वन विश्राम भवन दुधवा का कक्ष चार सौ रूपए में आरक्षित होता था अब हुई वृद्धि में भवन की श्रेणी निर्धारित की गई है। उसके अनुसार पर्यटक को भुगतान करना होगा। थारूहट 150 रूपए के बजाय अब चार सौ से पांच सौ रूपए में आरक्षित किए जायेंगे। इसी प्रकार डारमेटŞी में भी पचास रूपए से बढ़ाकर 75 रूपए प्रति व्यक्ति किया गया है। जबकि पूर्व में बनकटी वन विश्राम भवन आदि एक सौ रूपए में बुक होते थे अब तीन सौ रूपए प्रतिदिन का लिया जाएगा। किशनपुर वन विश्राम भवन अब 150 रूपए के बजाय 500 रूपए में आरक्षित होगा। दुधवा में फीचर फिल्म तथा डाक्युमेंट्री बनाने के शुल्क में भी भारी वृद्धि की गई है। पूर्व की नागिनल दर यानी फीचर फिल्म 2500 रूपए एवं डाक्युमेंट्री फिल्म 1500 था तब दुधवा में कोई निर्माता दिलचस्पी नहीं लेता था अब चार गुना वृद्धि के साथ फीचर फिल्म का एक लाख रूपए एवं डाक्युमेंट्री फिल्म का 6 हजार रूपए लिया जाएगा। इस पर भी निर्माता को सुरक्षा शुल्क अलग से देना होगा। दुधवा में भ्रमण महंगा होने से अब आम पर्यटक इससे और दूर हो जाएगा जिससे पर्यटन व्यवसाय से होने वाली आय पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है।


दुधवा नेशनल पार्क में 15 नवम्बर से आवास सुविधा
पर लागू होने वाली नई दरें-
 
विवरण                                                  देशी                        विदेशी
दुधवा वन विश्राम भवन-
   वातानुकूलित कक्ष संख्या एक          1000 रुपए     3000 रुपए
   विश्राम भवन कक्ष संख्या दो            750 रुपए     2250 रुपए
   विश्राम भवन कक्ष संख्या 3,4,5          400 रुपए     1200 रुपए
थारूहट एक व दो                       500 रुपए     1500 रुपए
थारूहट तीन से चौदह                    400 रुपए     1000 रुपए
डारमेट्री प्रति व्यक्ति                       75 रुपए      225 रुपए 

सोठियाना वन विश्राम भवन                400 रुपए     1200 रुपए
         लाग हट                      200 रुपए      600 रुपए
सोनारीपुर वन विश्राम भवन प्रथम तल       400 रुपए     1200 रुपए
                     द्वितीय तल        300 रुपए      900 रुपए
वनकटी वन विश्राम भवन                  300 रुपए      900 रुपए
किशनपुर वन विश्राम भवन                 500 रुपए     1500 रुपए
सलूकापुर, मसानखंभ, वेलरायां,
किला, बेलापरसुआ, वन विश्राम भवन        300 रुपए      900 रुपए


दुधवा नेशनल पार्क में फीस एवं किराया
15 नवम्बर से लागू नई दरें-
दुधवा नेशनल पार्क में-
प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति तीन दिन          100 रुपए
                      विदेशी          800 रुपए
                      वच्चा            60 रुपए
                      विदेशी          700 रुपए
                     अतिरिक्त दिन      40 रुपए
                      विदशी          350 रुपए

किशनपुर वन्यजीव विहार में-                       
प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति तीन दिन            50 रुपए 
                      विदेशी           600 रुपए
                      वच्चा             30 रुपए
                      विदेशी           350 रुपए
                     अतिरिक्त दिन       40 रुपए
                       विदशी          350 रुपए
दुपहिया वाहन                            20 रुपए
कार, जीप                              100 रुपए
पर्यटक बस                             200 रुपए
रोड फीस हल्की गाड़ी                    300 रुपए
         मिनी बस                      800 रुपए
         भारी गाड़ी                    1600 रुपए
कैमरा फीस पर्यटकों के लिए               निःशुल्क
कैमरा फीस मूवी एवं वीडीयो               5000 रुपए
                  विदेशी              10000 रुपए
फीचर फिल्म प्रतिदिन                   100000 रुपए
                  विदेशी             150000 रुपए
डाक्युमेंट्री फिल्म प्रतिदिन                  6000 रुपए
                  विदेशी              12000 रुपए
उपरोक्त के लिए सुरक्षा फीस-
फीचर फिल्म                           100000 रुपए
                  विदेशी              150000 रुपए
डाक्युमेंट्री फिल्म                         25000 रुपए
                  विदेशी               25000 रुपए
हाथी सवारी दो घंटा प्रति व्यक्ति              150 रुपए
                  विदेशी                 300 रुपए
मिनी बस 10 सीटर प्रति किमी                 45 रुपए
                  विदेशी                  90 रुपए
जीप 6 सीटर प्रति किमी                      40 रुपए
                  विदेशी                  80 रुपए 

गैंडा क्षेत्र में पर्यटक
दुधवा नेशनल पार्क का विश्राम गृह
 -----------------------------------------------------X------------------------------------X-------------------------------------

 देवेन्द्र प्रकाश मिश्र (लेखक वाइल्डलाईफर एवं पत्रकार हैं। दुधवा नेशनल पार्क के निकट पलिया में रहते है, इनसे dpmishra7@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।)

3 comments:

गजेन्द्र सिंह said...

बहुत सुन्दर और ज्ञानवर्धक जानकारी दी है आपने ........ आभार


थोडा समय यहाँ भी दे :-
कोई गिफ्ट क्यों नहीं देते ?....

बी एस पाबला said...

विस्तृत जानकारी हेतु आभार

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत अधिक वृद्धि है. विशेषत: जीपों/बसों के किराये में. फिर यह भी महसूस किया गया है कि कई बार खाली होने पर भी अन्दर विश्राम गृह नहीं दिये जाते. यही समस्या वाहनों के साथ आती है. कार्बेट में तो अन्दर हट बुक करा पाना तारे तोड़ने जैसा है... मेरी बहुत बड़ी इच्छा है दुधवा घूमने की. यदि भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था हो तथा अन्दर हट इत्यादि सुविधापूर्वक बुक हो जाती हों तो कृपया मुझे पूरी जानकारी मेल करने की कृपा करें.

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Featured Post

क्षमा करो गौरैया...

Image Courtesy: Sue Van Coppenhagen  संस्मरण गौरैया और मैं -- (3) ....डा0 शशि प्रभा बाजपेयी बात उस समय की है जब घर के नाम पर ...

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!