International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Sep 17, 2010

भारत में वाइल्ड लाइफ़ क्राइम के तहत अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना?

photo source: wikipedia
 भारत में वाइल्ड लाइफ़ क्राइम के क्षेत्र में सबसे बड़ा जुर्माना 

दुधवा नेशनल पार्क में एक व्यक्ति ने तेज रफ़्तार में कार चलाई, हार्न बजाया।
एक नील गाय भी टकराई उस कार से!
 वाइल्ड लाइफ़ एक्ट के तहत पाँच लाख दस हजार का जुर्माना

किसी भी निषिद्ध वन क्षेत्र में तेज रफ़्तार में गाड़ी चलाना, हार्न बजाना, किसी भी तरह का प्रदूषण करना वाइल्ड लाइफ़ एक्ट के तहत अपराध माना जाता है, पर अमूनन इस कानून को हर जगह तोड़ा जाता रहा है, किन्तु दुधवा नेशनल पार्क में एक ऐसी ही घटना पर वहाँ के अफ़सरों ने कानून तोड़ने वाले व्यक्ति से एक बड़ी रकम वसूल की है, शायद इस घटना के बाद धड़ल्ले से वन कानून तोड़ने वाले तमाम लोग चौकन्ने हो जाये और शायद सुधर भी जाए!और यह जुर्माना मिशाल बन जाए!

भारत मे किसी को तेज रफ्तार से गाडी चलने और हार्न बजाने पर क्या लाखो का जुर्माना हो सकता है...शायद आप अचंभित हो! ..लेकिन ये सच में हुआ है...उत्तर प्रदेश के दुधवा पार्क मे.जी हां..यहाँ..एक व्यक्ति से पार्क के अफसरो ने ५ लाख रुपये वसूल किए है...वो भी वाइल्ड लाइफ़ क्राइम में......बस इस आदमी की गलती इतनी थी. की उसने जंगल में तेज रफ्तार से अपनी मारुती वैन चलाई.....निषिद्ध क्षेत्र मे गाडी का हार्न भी बजाया....और स्पीड मे ही एक नीलगाय को जबर्दस्त टक्कर मार दी...मामला बीती ३१ जुलाई का है...जब  चन्दन चौकी  से होकर अनिल आर्य नाम का एक पूर्व प्रधान..अपनी मारुती से पलिया आ रहा था....तेज रफ्तार मे उसकी गाडी से एक नीलगाय टकरा गई...इस पर पार्क प्रशासन ने उस पे  मुकदमा..लिखा..और जुर्माना देने को कहा? अनिल ने अपना जुर्म कबूल किया और..5 लाख 10 हजार का जुर्माना पार्क प्रशासन को देना कबूला.....माना जा रहा है..कि दुधवा के साथ पूरे उत्तर प्रदेश  के  वन्य जीवन अपराध  के मामले में. यह सबसे बडा जुर्माना है..पार्क के अफसरों का भी कहना है.. कि एक व्यक्ति पर इतना जुर्माना शायद पहली बार हुआ..है.. इससे पहले भी ७ लाख २० हजार का जुर्माना वन अपराध के तहत है, पर उसमें तमाम लोगों सम्मलित थे। सूत्रों के मुताबिक १४ सितम्बर को अनिल आर्य ने इस जुर्माना की धनराशि अदा की है।



प्रशान्त"पीयूष" ( लेखक पेशे से मीडिया जर्नालिस्ट है,  पूरे एक दशक में कई अखबारों में पत्रकारिता का अनुभव, वन्य जीवन के क्षेत्र में विशेष अभिरूचि। लखीमपुर खीरी में रहते है, इनसे prashantyankee.lmp@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते हैं)

1 comment:

  1. bhut achchhi khaber hai, van vibhag ne kuchh to kiya.bahut achchha van vibhag ne yeh to vakai kamal kar diya. yadi yeh log kuchh es tarah kee sakhti dikhaye to shayad logo ko kuchh akla aaye.

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