International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Aug 22, 2010

दुधवा नेशनल पार्क में शिकारियों से मुठभेड़!

दुधवा लाइव डेस्क:  
शिकारियों से मुठभेड़ में फ़ारेस्टर को लगी गोली

लखीमपुर/पलिया। दुधवा नेशनल पार्क शिकारियों का गढ़ बनता जा रहा है। बीती रात गश्त पर निकली पार्क की टीम पर शिकारियों ने फ़ायरिंग शुरू कर दी। शिकारियों की गोली से एक फ़ारेस्टर बुरी तरह जख्मी हो गया। पार्क टीम की जवाबी फ़ायरिंग में एक शिकारी भी लहूलुहान हो गया। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पार्क कर्मियों ने मौके से दो बन्दूकें और एक झोले में रखा बारूद बरामद किया है।

रात करीब बारह बजे दुधवा रेंज के फ़ारेस्टर सत्यप्रकाश तिवारी, दो फ़ारेस्ट गार्ड और तीन वाचर चांदपारा इलाके में गश्त कर रहे थे। गश्त टीम जैसे ही सड़क पर पहुंची, पन्द्रह शिकारी उन्हें संदिग्ध अवस्था में घूमते दिखाई पड़े। फ़ारेस्टर ने शिकारियों को ललकारा तो उन्होंने गोली चला दी। पार्क कर्मियों ने भी जवाबी फ़ायरिंग की। सूत्र बताते हैं कि दोनों ओर से करीब एक घंटे तक तनातनी रही। इसी बीच गोलीबारी में फ़ारेस्टर सत्यप्रकाश को गोली लग गयी। पार्क कर्मियों की गोली से शिकारी रामसिंह निवासी गांव छेदिया पश्चिम भी बुरी तरह जख्मी हो गया। दोनों गम्भीर हालत में रात ढाई बजे पलिया स्थिति सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया। इधर रात में मुठभेड़ की सूचना पर पहुंचे पार्क अधिकारियों ने मौके से एक देशी बन्दूक बरामद की और एक झोले में रखा बारूद मिला।
दुधवा में उड़ाई दावत:
मुठभेड़ स्थल से पार्क कर्मियों ने पानी की बोतलें और खाने पीने का सामान भी बरामद किया है। एक जींस की पैंट भी मिली है। एक अफ़सर की मानें तो मुठभेड़ से पहले शिकारियों ने दावत खाई है।

"पार्क प्रशासन ने पूरे दुधवा में अभियान चलाया है। वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले पकड़े जा रहे हैं, दुधवा में यह अभियान अभी जारी रहेगा।- संजय पाठक, उपनिदेशक, दुधवा 


स्रोत: हिन्दुस्तान लखीमपुर खीरी

0 comments:

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था