International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Feb 2, 2010

खीरी में हुआ बाघ का शिकार शव बरामद

IMGA0788

* देवेन्द्र प्रकाश मिश्र, पलियाकलां-खीरी। नार्थ-खीरी फारेस्ट डिवीजन की पलिया रेंज के परसपुर के जंगल में 05 जनवरी, 2010 को एक और बाघ (टाइगर) अकाल मौत के आगोश में चला गया। मालूम हो कि विगत साल 2008 में भी पलिया रेंज के ग्राम परसपुर के पास प्रवाहित सुतिया नाला में एक किशोर बाघ का सड़ागला शव पाया गया था। बाघों को हो रही असयम मौतो ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्हृ लगा दिया है।

नार्थ खीरी फारेस्ट डिवीजन की पलिया रेंज के परसपुर फारेस्ट कम्पार्टमेन्ट स0 02 में लगभग 08-09 साल के युवा बाघ का शव मिला है। करीब 70-80 कि0ग्रा0 वजनी बाघ की लम्बाई लगभग 09 फुट बताई गई है। बाघ के शव पर कोई जख्म नही मिले है। इससे वन विभाग द्वारा अन्दाजा लगाया जा रहा है कि शिकारियों ने निःस्वार्थ बाघ को बिजली के तारो में फांसकर या फिर जहर देकर मारा होगा। वन विभाग ने संदेह के आधार पर उत्तम कुमार को गिरफ्तार करके पूंछताछ शुरू कर दी है। बाघ के शव को आनन-फानन में 05/06 की मध्य रात्रि के बाद वन विभाग ने पोस्टमार्टम के लिये क्यों आई0वी0आर0आई0, बरेली भेज दिया है, इस कार्यवाही से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्हृ लग गया है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि नार्थ-खीरी की पलिया एवं सम्पूर्णानगर रेंज के मध्य का परसपुर-नहरोसा का वन क्षेत्र शारदा नदी की कछार एवं किशनपुर वन्यजीव बिहार के जंगल से सटा है और अतिसंवेदनशील इसलिये भी माना जाता है क्योंकि पिछले साल इसी क्षेत्र में बाघ शावक का शव सुतिया नाला में मिला था एवं बाघों की गतिविधियों इस इलाके में लगातार बनी रहती है।
लगभग 03 साल पहले सम्पूर्णानगर रेंज के तहत जिला पीलीभीत के ग्राम नहरोसा से अन्र्तप्रांतीय शिकारी एवं वन्यजीवों के अंगो का कोराबार करने वाले गैंग की सरगना दलीपों नाम की महिला गिरफ्तार की गयी थी। सन् 2009 के माह दिसम्बर में बाघ शिकार में प्रयोग होने वाला खुड़का आदि सामग्री भी वन विभाग ने बरामद की थी। इसके अतिरिक्त बाघांे की मौजूदगी भी इस वन क्षेत्र में बनी रहने के कारण इसे अतिसंवेदनशील माना जाता है। इसके बाद भी बाघों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नार्थ खीरी फारेस्ट डिवीजन द्वारा क्यों नही किये गये उधर दुधवा नेशनल पार्क की सठियाना रेंज के जंगल से सटे ग्रामीण क्षेत्र में पिछले तीन माह से दो शावको के साथ घूम रही बाघिन विगत माह दिसम्बर में एक किशोर को मार चुकी है एवं एक अन्य बाघ ने दो दिन पहले सुमेरनगर की एक किशोरी को तब घायल कर दिया था जब वह खेत में गन्ना छिलने जा रही थी। इसका उपचार अभी भी चल रहा है। जंगल के बाहर खेतो में घूम रहे बाघों की सुरक्षा के प्रति वन विभाग द्वारा बरती जा उदासीनता एवं लापरवाही उनके जीवन को खतरे में डाल रही है। यहां यह भी गौरतलब है कि राजस्थान के विख्यात सारिस्का राष्ट्रीय उद्यान एवं पन्ना नेशनल पार्क से वन विभाग की लापरवाही से ही बाघ विलुप्त हो चुके है और अब वहां पुनः बाघो के पुनर्स्थापन पर जहां केन्द्र सरकार करोड़ो रुपयों खर्च कर रही है वही दुधवा नेशनल पार्क समेत नार्थ-साउथ खीरी फारेस्ट डिवीजन के जंगलात में बाघों की एक सौ से ऊपर की संख्या मौजूद है फिर भी उनकी सुरक्षा में वन विभाग द्वारा क्यो उदासीनता एवं लापरवाही बरती जा रही है? यह अपने आप में भी प्रश्न विचारणीय है।
जानकारो का कहना है कि बाघ की होने वाली मौतों को लेकर गम्भीर हुई केन्द्र सरकार द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये गये है, इसमें बाघ की मौत स्वाभाविक हो अथवा दुर्घटना या फिर शिकारियों द्वारा हत्या की गयी हो इसकी सुचना वन विभाग के उच्चाधिकारियों सहित राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एन0टी0सी0ए0) को देनी होगी। एन0टी0सी0ए0 का प्रतिनिधि एवं कन्जर्वेटर घटना स्थल का निरीक्षण करेगें तत्पश्चात डीप फ्रिजर वाक्स में बाघ का शव रखकर पोस्टमार्टम के लिये भेजा जायेगा। इसके बाद भी नार्थ खीरी फारेस्ट डिवीजन के अफसरों ने उक्त दिशा-निर्देशों की अनदेखी क्यों की और बाघ शव को रातोरात बरेली क्यों भेज दिया? अपने गुडवर्क की सूचना देकर वाहवाही लूटने वाले वनाधिकारियों ने बाघ की मौत को मीडिया से छुपाकर रखा इसकी भनक तक नही लगने दी। और आज जब तक मीडिया सक्रिय होता तबतक घटना स्थल पर कुछ भी बाकी नही बचा था। इससे लगता है कि वनाधिकारी बाघ की मौत के साक्ष्य मिटाकर मनमर्जी की कहानी गढ़कर अपनी नाकामी पर पर्दा डालने में जुट गये है। हालांकि जानकारों का कहना है कि क्षेत्र में सक्रिय हुये शिकारियों द्वारा ही इस बाघ को बिजली के तारों मे फांसकर मौत के घाट उतारा गया है। फिलहाल इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच सक्षम एंजेसी द्वारा कराई जाय तो बाघ की मौत का रहस्य उजागर हो सकता है।   
image.php -देवेन्द्र प्रकाश मिश्र
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है, अमर उजाला से काफ़ी समय तक जुड़े रहे है, वन्य-जीव संरक्षण के लिए प्रयासरत, दुधवा टाइगर रिजर्व के निकट पलिया में रहते हैं। आप इनसे dpmishra7@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।)

1 comment:

  1. Thanks Mishra ji,
    For highlighting this case of tiger death. It is strange how forest deptt. clearly violated guidline of NTCA (National Tiger Conservation Authority) regarding inspection of site by NTCA representative & postmartem of tiger body.
    I doubt there will be more such cases of poaching & tiger death as its biggest protector Mr. Billy Arjan Singh is no more.
    Every time some bad news comes from Dudhwa Tiger Reserve I remember this great man. Good bye Sir. We will remember you...

    RAVINDRA YADAV

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