डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Feb 21, 2010

प्रकृति के सौन्दर्य से उपजी मानव मस्तिष्क में कविता

Photo by: ©Krishna Kumar Mishra*
गौरव गिरि* प्रकृति के सौन्दर्य ने मानव मस्तिष्क में शब्दों का निर्माण करने के लिए प्रेरित किया।
जंगल में:-
इन खामोश जंगलों की
बेइंतहा खूबसूरती को
अक्सर महसूस किया है मैने,
उन राहों से गुजरते हुए
जो बनायी हैं, प्रकृति ने
अपने हसीन सहचरों के लिए
घने पेड़ों से झांकती हुई

नाजुक सुनहरी किरणों को
जीवन में देखा है मैने
उमंगो की तरह
उसकी गहनता ने प्रेरित किया है
मुझे विचारों की महानता से
और खामोशी से सीखा है
जीवन में आत्म-विवेचन

गौरव गिरि (लेखक बज़रखा शिव-मन्दिर ट्रस्ट के महन्त हैं, जिला खीरी में रहते हैं, इनसे 09005200709 पर संपर्क कर सकते हैं)
*तस्वीर बजरखा शिव-मन्दिर की है जो तकरीबन चार वर्ष पूर्व ©कृष्ण कुमार मिश्र द्वारा खींची गयी थी।

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