International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Feb 5, 2017

पीहर वृक्ष दान परम्परा की खीरी जनपद से हो रही है शुरुआत

पर्यावरण को संवर्धित करने की एक नई मुहिम- पीहर वृक्ष दान परम्परा।

दिनांक 6 फरवरी सायं गोला के गौरी बैंक्विट हाल में दुधवा लाइव अंतराष्ट्रीय जर्नल द्वारा श्री गोकरन सेवा समिति के सहयोग से पीहर वृक्ष दान परम्परा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कन्या को 7 पौधे जनपद के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सौंपे जायेंगे, और इस आशा के साथ की वह सही जगह रोपित हो, पल्लवित हो और फिर एक दिन विशाल वृक्ष बने जिस पर सैकड़ों पक्षी अपना बसेरा बना सकें।
दुधवा लाइव के संस्थापक, वन्य जीव विशेषज्ञ कृष्ण कुमार मिश्र ने बताया कि, वह 6 वर्ष पहले शुरू की गई अपनी मुहिम गौरैया बचाओ जन-अभियान की तरह पीहर वृक्ष दान परम्परा की मुहिम को भी जन अभियान बनाने के प्रयास में हैं, ताकि मानव सभ्यता में पर्यावरण संतुलन बना रहे और पारिस्थिकी तंत्र के सभी फैक्टर्स में समन्वय स्थापित हो, उन्होंने कहा कि वृक्ष, जंगल और पशु पक्षी सुरक्षित होंगे तो मानव सभ्यता भी सुरक्षित रहेगी, वन और वन्य प्राणियों के सरंक्षण में ही मानव कल्याण का रहस्य छुपा है।

कार्यक्रम के आयोजक पर्यावरण प्रेमी  मदन चंद मिश्र की देख रेख में गोला स्थित कार्यक्रम स्थल में एक मंच जो पुष्प वाटिका से सुसज्जित होगी पर जनपद के महत्वपूर्ण व्यक्तियों व् कन्या के घर वालों द्वारा वृक्ष दान के कार्यक्रम का आयोजन होगा, उसके पश्चात शास्त्रीय संगीत व् लोक संगीत के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमे जल जंगल जमीन की महत्ता को गीतों के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा।
जनपद में यह अपनी तरह की अनूठी परम्परा की शुरुवात होगी, जिसमें वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ वी पी सिंह, हिंदी प्रवक्ता डॉ सत्येंद्र दुबे, सौजन्या संस्था की संस्थापिका डॉ उमा कटियार, शिव कुमार गौड़, एवं वन विभाग के लोग तथा नगर के पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहेंगे।
दुधवा लाइव डेस्क 

0 comments:

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था