डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 06, June 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Aug 17, 2016

गोमती किनारे लगाए गए फलदार प्रजातियों के पौधे पवित्र भोज का किया गया आयोजन


वन्य जीवन के कल्याण के लिए पशुपतिनाथ का किया रुद्राभिषेक 
वन्य जीव सरंक्षण व् प्रकृति के सभी जीव जंतु व् वनस्पतियों के कल्याण के लिए की गयी पशुपतिनाथ की आराधना 


श्रावण मास के अंतिम पखवाड़े में आदिगंगा गोमती के किनारे स्थित जंगली नाथ स्थल में प्राचीन महाभारत कालीन शिवलिंग का रुद्राभिषेक हुआ, साथ ही संतों व दर्शनार्थियों को पवित्र भोज भी कराया गया, कार्यक्रम का आयोजन वन्यजीव विशेषग्य एवं दुधवा लाइव जर्नल के संस्थापक कृष्ण कुमार मिश्र ने किया, जिसमें जनपद के तमाम शिक्षक, पर्यावरण प्रेमियों ने हिस्सेदारी की. 

शिव अर्थात पशुपतिनाथ की पूजा का आशय यह रहा की जीवों का कल्याण हो, प्रकृति में मनुष्य ही नहीं बल्कि जंतु और वनस्पतियाँ सुरक्षित व् सरंक्षित हों, आदिदेव शिव पशुओं के देवता के रूप में सिंधुघाटी सभ्यता में पूजे जाते रहे है, इस आयोजन में पृथ्वी तत्व, जल, वायु, अग्नि एवं आकाश इन पंचतत्वों से निर्मित सभी जीवात्माओं की शान्ति व् सरंक्षण की भावना से रूद्र भगवान् का रुद्राभिषेक किया गया, इसके उपरान्त दाता जी के गोमती किनारे स्थित साईं आश्रम में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपें गए, जिनमें महुआ, अशोक, बेलपत्र, गोल्डमोहर व् अलमांडा जैसी पुष्पों वाले पौधे लगाए गए.




"कृष्ण कुमार मिश्र ने बताया की खीरी जनपद में गोमती के किनारे नष्ट हो चुकी भव्य नदी घाटी सभ्यता रही हैं, जिसके अन्वेषण की आवश्यकता है, इसके प्रमाण यहाँ अभी भी मौजूद है, साथ ही नदी के किनारे के जंगलों में शैव सम्प्रदाय का महान अस्तित्व रहा है और यही कारण है की सदानीरा गोमती तट पर शिवलिंग जगह जगह स्थापित हैं आदिकाल से, जंगल नष्ट होने से नदी के अस्तित्व पर भी संकट आया है, और लोग बाग़ नदी के मुहानों को कृषि भूमि में तब्दील कर चुके हैं, फिर भी यह नदी के किनारों पर मौजूद कुछ जंगली क्षेत्रों के बचे रहने से यहाँ पक्षी और अन्य वन्य जीवों की अच्छी तादाद है, तथा कभी कभी बाघ व् तेंदुएं भी गोमती के तटों से गुजरते हुए अपने वनक्षेत्र बदलते रहते हैं, ईश्वर से यही कामना है की पशुपति नाथ धरती के सभी जीवों का कल्याण करें, और प्रकृति में वे  सदा रचते बसते रहें".

वन्य-जीव और पर्यावरण के सरंक्षण व् संवर्धन के लिए किए गए इस पवित्र आयोजन में, बिजुआ ब्लाक के शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रभाकर शर्मा, राममिलन मिश्रा, प्राथमिक शिक्षक संघ पसगवा के अध्यक्ष पवन मिश्र, हरेराम, संजय शुक्ला, व्यवसाई राकेश गिरी, राजेश गिरी, संजय गिरी, उदय प्रताप सिंह, विमल यादव, मदन मिश्रा गोला  "गौरैया सरंक्षक", एडवोकेट रहीस अहमद मोहम्मदी, युवा कांग्रेस विधानसभा कस्ता अध्यक्ष राजीव मिश्रा  तथा तमाम संतों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की.

डेस्क- दुधवा लाइव डॉट कॉम 

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