International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Jun 28, 2016

दुधवा लाइव अंतर्राष्ट्रीय जर्नल का जल-विशेषांक "आज भी खरे हैं तालाब"


जल-विशेषांक 

दुधवा लाइव पत्रिका का मई-जून २०१६ का प्रकाशित अंक पीडीएफ के रूप में यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं.

Dear Friends,
I am pleased to share Dudhwa Live International Magazine Vol.6 Issue 5-6, May-June 2016, please check the link below to download the 44 pages Print edition (PDF)

http://issuu.com/dudhwalive/docs/dudhwa_live_issue_may-june_best_201

Dudhwa Live Magazine has been assigned ISSN number as a continuing resource (ISSN Number - 2395 - 5791) from Jan 2010. This will help in electronic archiving and act as a bibliographical tool so that students, researchers, librarians can use it to give the precise references of a serial publication.
To contribute articles to Dudhwa Live Magazine, mail to editor.dudhwalive@gmail.com
I look forward to your inputs and support in preserving our natural treasure. For other interesting articles and images check –






Please feel free to email, circulate in your network to raise awareness.
Regards,

Krishna Kumar Mishra


1 comment:

  1. That's great!! Nice feeling for you that you launched a PDF format of your e-magazine...

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आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था