International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Feb 9, 2016

पन्ना के धरमसागर तालाब का 80 फीसदी हिस्सा मैदान में तब्दील


  ढाई सौ वर्ष से भी अधिक प्राचीन जलाशय के सूखने से नगरवासी चिंतित
 पन्ना शहर के जीवन का आधार है 75 एकड़ का यह विशाल तालाब

पन्ना। रत्नगर्भा धरती पन्ना के जीवन का आधार रहा ढाई सौ वर्ष से भी अधिक प्राचीन धरमसागर तालाब तेजी के साथ सूख रहा है। हमेशा कंचन जल से लवरेज रहने वाले 75 एकड़ में फैले इस तालाब का 80 फीसदी से भी अधिक हिस्सा सूखकर मैदान में तब्दील हो गया है। तालाब के भराव क्षेत्र का उपायोग आस-पास के लोग नित्य-क्रिया से निवृत्त होने के लिए कर रहे हैं, फलस्वरूप धरमसागर तालाब अब नरक सागर में तब्दील होता जा रहा है। तालाब के घाटों मं हर तरफ गंदगी का अम्बार लगा है, जलाशय की दुर्दशा का यह नजारा पन्ना शहर के हर जिम्मेदार नागरिक को विचलित और चिंतित कर रहा है। 

उल्लेखनीय है कि हरी-भरी पहाड़ियों के बीच तत्कालीन बुन्देला राजाओं द्वारा जब पन्ना शहर को बसाया गया था, उसी समय इस खूबसूरत झीलनुमा जलाशय का निर्माण कराया गया था। बारिश के पानी का संचय कर उसके वितरण की जो व्यवस्था पन्ना रियासत के राजाओं ने ढाई सौ वर्ष पूर्व की थी वह आज भी एक मिशाल है। ऊँची-ऊँची पहाड़ियों से घिरा यह छोटा सा शहर पानी के मामले में सदियों से आत्मनिर्भर रहा है। बुन्देला राजाओं ने पन्ना शहर के आस-पास तालाबों की पूरी श्रृंखला का निर्माण कराया था। शहर के आस-पास मौजूद इन डेढ़ दर्जन से भी अधिक तालाबों में धरमसागर तालाब सभी का सिरमौर है, यह तालाब पन्ना शहर के लोगों की धड़कन है। यह इन्हीं तालाबों का ही करिश्मा है कि पर्वतों की गोद में बसे इस शहर के अधिकांश कुयें गर्मी के मौसम में भी पानी से लबालव भरे रहते हैं। लेकिन अपने निर्माण के बाद बीते लगभग 270 सालों में धरमसागर तालाब पहली बार सूखा है। सूख चुके तालाब के घाट सूने पड़े हैं और गंदगी से पट रहे हैं। इस जीवनदायी तालाब का पूरी तरह से सूखना, पन्ना शहर में भीषण जल संकट आने का संकेत है। 

पन्ना शहर की पहचान बन चुके धरमसागर तालाब के निर्माण की भी बड़ी रोचक दास्तान है। महाराजा छत्रसाल के पुत्र हृदयशाह के शासनकाल तक पन्ना में पेयजल संकट बरकरार रहा। लेकिन हृदयशाह के बड़े पुत्र महाराजा सभा सिंह ने जब सन 1739 में पन्ना रियासत की बागडोर संभाली, तब उन्होंने रियासत की जनता को जल संकट से निजात दिलाने के लिए सोच-विचार करन शुरु किया। महाराजा सभा सिंह के पन्ना नरेश बनने के 5 साल बाद ही रियासत में भीषण अकाल पड़ गया। इन हालातों में अकाल के प्रभाव से रियासत की जनता को उबारने के लिए महाराजा सभा सिंह ने राहत कार्य शुरु कराया। अकाल के समय शुरु कराये गये इस राहत कार्य से ही पन्ना शहर के निकट मदार टुंगा पहाड़ी की तलहटी में विशाल धरमसागर तालाब का निर्माण हुआ। 


तालाब के मध्य बना है शिव मन्दिर
धरमसागर तालाब का निर्माण महाराजा सभा सिंह द्वारा सन् 1745 से 1752 के बीच कराया गया था। बताया जाता है कि धरमसागर तालाब का निर्माण जिस स्थान पर कराया गया, वहां पर पहले से ही एक प्राकृतिक जल स्त्रोत था। जिसे धरमकुण्ड के नाम से जाना जाता था। इस कुछ के प्रति प्रगाढ़ धार्मिक आस्थाओं के चलते महाराजा सभा सिंह ने कुण्ड के ऊपर भव्य शिव मंदिर का निर्माण कराया। तदुपरांत मन्दिर के चारों तरफ तालाब की खुदाइई का कार्य शुरु हुआ। धरमसागर तालाब का जबसे निर्माण हुआ है तब से यह कभी जलविहीन नहीं हुआ। पहली बार ऐंसा हो रहा है कि जब यह प्राचीन जलाशय जलविहीन होहने की कगार पर आ पहुँचा है।  
अवसर का किया जाय सदुपयोग
प्राचीन जलाशय का सूखना पन्ना शहर के लिए चिन्ता की बात है लेकिन इस अवसर का सदुपयोग कर भविष्य की चिन्ता व जल संकट से निपटने की माकूल व्यवस्था के लिए किया जाना चाहिए। 75 एकड़ रकवा वाले धरमसागर तालाब के गहरीकरण का कार्य यथाशीघ्र प्रारंभ हो, इस दिशा में जनप्रतिनिधियों व प्रशासन को प्रभावी पहल करनी चाहिए। तालाब का गहरीकरण होने से इसकी जलधारण क्षमता में वृद्घि होगी जिसका उपयोग भविष्य में पन्ना शहर के लिए पेयजल की आपूर्ति में किया जा सकेगा। चूंकि तालाब का 80 फीसदी हिस्सा सूख चुका है इसलिए गहरीकरण का कार्य हर हाल में इसी माह प्रारंभ हो जाना चाहिए। ताकि जून माह के पूर्व ही तालाब का गहरीकरण हो सके। 

टूटे घाटों व मन्दिर का हो जीर्णोंद्धार 
तालाब के घाटों से पानी कई फिट दूर तक सूख चुका है। जिसके कारण घाट गंदगी से पट चुके हैं। इन घाटों की साफ-सफाई  व जीर्णोद्घार का कार्य भी गरीकरण के साथ प्रारंभ कराया जाना चाहिए। विशालकाय तालाब के मध्य में स्थित शिव मन्दिर की भी मरम्मत व जीर्णोद्घार का कार्य कराया जाना जरूरी है। यह प्राचीन मन्दिर धरमसागर तालाब की शोभ है तथा जन आस्था का केन्द्र भी है। जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुँच चुके शिव मन्दिर का जीर्णोद्घार हो जाने से प्राचीन मन्दिर का जहां संरक्षण होगा वहीं धरमसागर तालाब की सुन्दरता और बढ़ जाएगी। 
दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हों प्रयासः बुन्देला
पन्ना शहर की प्राचीन धरोहर जीवनदायिनी धरमसागर तालाब के संरक्षण, गहरीकरण व जीर्णोद्घार के कार्य हेतु दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास होना चाहिए। यह बात नगर पालिका परिषद पन्ना के पूर्व अध्यक्ष बृजेन्द्र सिंह बुन्देला ने धरमसागर तालाब की दुर्दशा पर चिन्ता जाहिर करते हुए कही। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यजनक बात है कि तालाब जलविहीन होने की कगार पर है लेकिन इस दुर्भाग्य को सौभाग्य में भी बदला जा सकता है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों व प्रशासन को दृढ़ इच्छा शक्ति दिखानी होगी। श्री बुन्देला ने कहा कि यदि शीघ्र कार्य प्रारंभ नहीं कराया गया तो हम जनसहयोग से घाटों की सफाई व जीर्णोद्घार का कार्य प्रारंभ करेंगे। 

अरुण सिंह 
पन्ना-मध्य प्रदेश 
भारत 
aruninfo.singh08@gmail.com

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