डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 06, June 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Feb 28, 2015

भाषागिरी ने ईज़ाद किया शुद्ध हिन्दी लिखने का आसान तरीका


www.bhashagiri.com






हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा और भारत की मातृभाषा होते हुए भी कंप्यूटर तकनीकी Computer Technology) में अपना स्थान बनाने के लिये संघर्षरत है, बड़ी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां भी अब हिन्दी के लिये सुविधाएं प्रदान कर रही है । जिससे सामान्य जन के लिये कंप्यूटर पर हिन्दी में काम करना आसान हुआ है । मगर हिन्दी लिखते समय होने वाली वर्तनी (स्पेलिंग) अशुद्धियां अभी भी एक बड़ी समस्या है । इसका आसान और सुलभ तकनीकी समाधान ना होने के कारण अशुद्ध हिन्दी काफी प्रचलन में आ गयी हैं । कई गलत शब्द इतने प्रयोग में आ गये हैं कि युवा पीढ़ी उन्हें ही सही समझने लगी हैं ।

पूरा लेख मेन्युअली पढ़कर वर्तनी अशुद्धियां सुधारने में काफी समय बर्बाद होता है। इन्हीं सब समस्याओं का सामना करना पड़ा बेंगलोर में रहने वाले अर्पित और श्वेता पालीवाल को जब वो एक आध्यात्मिक हिन्दी मासिक पत्रिका के डिजिटिलाइजेशन प्रोजेक्ट में अपना समयदान कर रहे थे । यहीं से शुरूआत हुई भाषागिरी की । हिन्दी भाषा पर काफी शोध करने के बाद एक विशेष तकनीक ईजाद की और Spell Guru सॉफ्टवेयर बनाया । इस नयी तकनीक के लिये उन्होंने पेटेंट भी फाइल किया है । इस सॉफ्टवेयर में आप आसानी से हिन्दी लिख सकते है । गलत शब्द लिखते ही यह आपको सूचित कर देगा और शब्द की वर्तनी सुधारने के लिए सुझाव भी देगा । यह भारत सरकार द्वारा निर्धारित हिन्दी मानकीकरण पर आधारित है । Spell Guru इस प्रकार का पहला सॉफ्टवेयर है जो मंगल, कृतिदेव और चाणक्य फाॅण्ट में काम करता है । भाषागिरी शीघ्र ही नया सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध कराने वाली है जो कि सीधे MS Word में काम करेगा ।

श्वेता 
भाषागिरी 
support@bhashagiri.com

अन्य जानकारी के लिये देखे www.bhashagiri.com

वन्य जीवन व् पर्यावरण  पर आधारित दुनिया की पहली दुधवा लाइव  डिजिटल मैगज़ीन  की ज़ानिब से  हिन्दी  लिखने के लिए किये गए इस  सुन्दर कार्य  के लिए भाषागिरी  के आविष्कारकों  को शुभकामनाएं। . 

दुधवा लाइव डेस्क 

0 comments:

Post a Comment

आप के विचार!

विविधा

आओ प्यारे कम्प्युटर पर बाघ बचायें!
अरूणेश सी दवे, जहाँ तक रही बात प्रबुद्ध बाघ प्रेमियों की जो नचनियों की तरह सज-धज कर जंगल कम इन्टरनेट पर ज्यादा अवतरित होते हैं, तो उनके लिये मै इंटरनेट मे वर्चुअल अबुझमाड़ बनाने का प्रयास कर रहा हूं । ताकि वो अपनी कोरी कल्पनाओं और वर्चुअल प्रयासों को इस आभासी दुनिया में जाहिर कर अपनी ई-कीर्ति बढ़ा सकें।

सामुदायिक पक्षी सरंक्षण
पक्षियों के संरक्षण का जीवन्त उदाहरण: ग्राम सरेली कृष्ण कुमार मिश्र, लखीमपुर खीरी* उन्नीसवी सदी की शुरूवात में ब्रिटिश हुकूमत के एक अफ़सर को लहूलुहान कर देने से यह गाँव चर्चा में आया मसला था।
तो फ़िर उनसे सीखा हमने योग!
धीरज वशिष्ठ* 84 लाख प्रजातियां और 84 लाख योगासन: पक्षियों-जानवरों से सीखा हमने आसन: धार्मिक चैनलों और बाबा रामदेव के कार्यक्रमों ने आज योग को घर-घर तक पहुंचा दिया है।
नही रहा सुमित!
दुधवा लाइव डेस्क* हाँ हम बात कर रहे है उस हाथी कि जो दो मई २०१० को लखनऊ चिड़ियाघर से दुधवा नेशनल पार्क भेजा गया था! वजह साफ़ थी, कि अब वह बूढ़ा हो गया था

पर्यावरण

क्या वे राज धर्म से वाकिफ़ हैं!
कृष्ण कुमार मिश्र* भारत के कुछ पूर्व नेताओं ने मिसाले कायम की पर्यावरण व वन्य-जीव संरक्षण में

अबूझमाड़ के जंगल- जहाँ बाघ नही नक्सल राज करते हैं!
अरूणेश सी दवे* अबूझमाड़- एक प्राकृतिक स्वर्ग:

मुद्दा

क्या खत्म हो जायेगा भारतीय बाघ
कृष्ण कुमार मिश्र* धरती पर बाघों के उत्थान व पतन की करूण कथा:

दुधवा में गैडों का जीवन नहीं रहा सुरक्षित
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* पूर्वजों की धरती पर से एक सदी पूर्व विलुप्त हो चुके एक सींग वाले भारतीय गैंडा

हस्तियां

पदम भूषण बिली अर्जन सिंह
दुधवा लाइव डेस्क* नव-वर्ष के पहले दिन बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महा-पुरूष पदमभूषण बिली अर्जन सिंह

एक ब्राजीलियन महिला की यादों में टाइगरमैन बिली अर्जन सिंह
टाइगरमैन पदमभूषण स्व० बिली अर्जन सिंह और मैरी मुलर की बातचीत पर आधारित इंटरव्यू:

Featured Post

क्षमा करो गौरैया...

Image Courtesy: Sue Van Coppenhagen  संस्मरण गौरैया और मैं -- (3) ....डा0 शशि प्रभा बाजपेयी बात उस समय की है जब घर के नाम पर ...

वन्य-जीव

भारत की वन-नीति में बदलाव आवश्यक
देवेन्द्र प्रकाश मिश्र* आजादी के बाद बनी भारतीय वन-नीति की समीक्षा वर्ष 1988 में की गई थी।

घायल तेन्दुए को जंगल में छोड़ा गया
दुधवा लाइव डेस्क* अधूरे इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया घायल तेन्दुआ!