डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 02, February 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Oct 14, 2012

तो फिर उसने पेड़ पर ही दम तोड़ दिया ?

टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एक तेंदुए को मिली मौत
भारत-नेपाल सीमा पर कतरनिया घाट  वाइल्ड लाइफ  सेंक्चुरी  का मामला 
"अब्दुल सलीम खान  की  रिपोर्ट "

लखीमपुर। दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कतरनिया घाट वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में एक तेंदुआ का शव पेंड़ पर लटका हुआ मिला है। मूर्तिहा वन रेंज में तेंदुआ का शव रोहिनी के पेंड़ में लटका हुआ था, शव की हालत देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि इसकी मौत  कई दिन पहले हुई होगी।

मूर्तिहा वन रेंज में शनिवार को फॉरेस्ट गार्ड बब्बन मिश्रा वाचरों के साथ गश्त पर थे, तभी टीम को जंगल में तेज बदबू आई, उन्होंने देखा कि एक रोहिनी के पेंड़ पर पांच फिट की ऊंचाई पर तेंदुए का शव लटका हुआ है, फॉरेस्ट गार्ड ने तत्काल वन अफसरों को सूचना दी। जिस पर डीएफओ कतर्निया वन्य जीव प्रभाग आरके सिंह व रेंज आफीसर पीएन राय ने मौके पर पहुंच कर शव का जायजा लिया। भारत-नेपाल सीमा पर बहराइच जिले में पडऩे वाले इस स्थान से पास का गांव सलारपुर व एसएसबी की चेक पोस्ट की दूरी एक से डेढ़ किमी है। 

दूसरा पहलू........
.....कितनी तडफ़ से आई होगी जंगल के राजा को मौत


फोटो- पेंड़ पर लटके शव के सामने खड़े वन-अधिकारी व्  कर्मचारी।


लखीमपुर। यूं तो वह जंगल का राजा कहलाता है, लेकिन उसकी आखिरत देखकर इंसानों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि अपने आखिरी समय पर पेंड़ पर फंसकर यह तेंदुआ मदद के लिए कितना तडफ़ा होगा। काश यह गश्ती दल उस रोज भी इधर से गुजर जाता जब अपनी जिंदगी बचाने के लिए इसको किसी की जरूरत थी।

वन महकमे के अफसरों की माने तो दुधवा रिजर्व एरिया के मूर्तिहा वन रेंज में रोहिनी के लगभग १२ फिट ऊंचे पेंड़ पर तेंदुआ चढ़ा होगा, लेकिन उतरते समय वह फंस गया। मौत की असली वजह तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगी, लेकिन अगर वजह पेंड़ में फंस कर मौत हो जाने की रही होगी तो वह मौत से पहले काफी दहाड़ा होगा, तब क्यों नही इस गश्ती टीम को वह आवाजें सुनाई दीं। कई दिनों तक तेंदुए ने जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ी होगी, और उम्मीद की होगी कि शायद कोई रहनुमा इधर से गुजर जाए और उसे जिंदगी बख्श दे। वन अफसर दावा कर रहे हैं कि इसकी मौत तीन से चार दिन पहले हुई है, जब कि शव की हालत बता रही है कि यह कितना पुराना हो चुका है। तेंदुआ का जहां शव मिला है वहां से नेपाल की सीमा महज दो किमी के करीब है, ऐसे में तेंदुए के साथ किसी अनहोनी से भी इनकार नही किया जा सकता।

क्या कहते हैं जिम्मेदार.......मूर्तिहा वन रेंज में मिले तेंदुआ का शव के मामले में प्रथम दृष्टया देखकर लगता है कि यह तेंदुआ पेंड़ पर चढ़ गया होगा, लेकिन उतरते समय पेंड़ की शाखाओं में फंस गया, वजन ज्यादा होने से यह निकल नही सका, जिससे इसकी मौत तीन से चार दिन पहले हुई होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह और इसके नर या मादा होने की पुष्टि हो जाएगी।

"आरके सिंह, डीएफओ कतर्निया वन्य जीव प्रभाग"

अब्दुल सलीम खान 
salimreporter.lmp@gmail.com


4 comments:

Anonymous said...

It is very sad news for wildlife lovers like us. We're regret about it but also suspect full about the working way of forest gaurds and rangers , how the last time screm of that leopord not reach to the ears of forest gaurds or who is on duty. Where they are ? Are they busy in doing safety duty where the tree loggers cutting the forest trees or drunk and sleaping or they ignore it the last sacrificing call of the leopard ? Very shamefull moment for the forest depot. If the shame has left within him... Hope next time it would not rehappen. (URUJ SHAHID)

Anonymous said...

It is very sad news for wildlife lovers like us. We're regret about it but also suspect full about the working way of forest gaurds and rangers , how the last time screm of that leopord not reach to the ears of forest gaurds or who is on duty. Where they are ? Are they busy in doing safety duty where the tree loggers cutting the forest trees or drunk and sleaping or they ignore it the last sacrificing call of the leopard ? Very shamefull moment for the forest depot. If the shame has left within him... Hope next time it would not rehappen. (URUJ SHAHID)

Archana said...

ओह! दुखद!...दहाडा न हो ये तो नहीं लगता...बचना तो हर कोई चाहता है ...

Dehaatkibaat said...

lekin hamare jimmedaar ese nahi maante

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