डायचे वेले जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

International Journal of Environment & Agriculture, Vol.7, no 05, May 2017, ISSN 2395-5791

"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

Dec 16, 2011

पर्यावरण और प्राकृतिक संपदा के विनाश में लगा सरकारी धन

फ़ोटो साभार: विकिपीडिया
बुन्देलखण्ड पैकेज के ट्रैक्टरों पर सवार मंत्री का कुनबा-

बांदा- बुन्देलखण्ड के जरूरत मन्द किसानों के लिए आये ट्रैक्टर दबंग मंत्री के परिजन मार ले गये। बुन्देलखण्ड के लिए केन्द्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट बुन्देलखण्ड पैकेज जिसके लिए 7266 करोड़ रूपये का हवाला देकर हासिये पर खड़े किसानो को राहत के लिए रूपया दिया गया। बुन्देलखण्ड पैकेज का किस तरह बन्दर बाट किया गया यह छोटी सी बानगी है कि बुन्देलखण्ड पैकेज के ट्रैक्टरों पर सवार है मंत्री का कुनबा।

    बुन्देलखण्ड पैकेज योजना से वर्ष 2010-11 में 33 यू0पी0 स्टेट एग्रो इण्डस्ट्रियल कार्पोरेशन लिमिटेड सेवा केन्द्र बांदा द्वारा मंत्री परिवार को खुश रखने के लिए उनके चहेते और परिजनों को बुन्देलखण्ड पैकेज के ट्रैक्टर थमा दिये गये। जिले का जरूरत मन्द आम किसान मुह ताकता रह गया। बुन्देलखण्ड पैकेज की इस विशेष योजना का लाभ भुखमरी से मर रहे किसानों को नहीं मिल पाया। अब यह ट्रैक्टर जनपद बांदा में अवैध खनन, बालू ढुलाई के लिए नरैनी क्षेत्र के कोलावल रायपुर, नरसिंहपुर, पैगम्बरपुर, भुरेड़ी और तिन्दवारा में चल रहे क्रेशर के पत्थरों को ढोने का काम कर रहे हैं। सीमित किसानों को कृषि कार्य हेतु ट्रैक्टर उपलब्ध कराने हेतु 45000 रूपये अनुदान प्रति ट्रैक्टर दिया गया था। जैसे ही यह योजना जनपद बांदा मंे आयी मंत्री की रिश्तेदारी ट्रैक्टर पर सवार हो गयी। सारे नियम कायदे ताक पर रखकर यू0पी0 स्टेट एग्रो संस्था ने इन ट्रैक्टरों को वितरित किया। जरा गौर करें बुन्देलखण्ड पैकेज के मालिक बने ट्रैक्टरों के नुमाइंदों पर यह कौन हैं जिनके निशाने पर है गरीब मजलूम किसान ?


1.    जुबैरूद्दीन सिद्दीकी, वजाहुद्दीन सिद्दीकी पुत्र जमीरूद्दीन सिद्दीकी के नाम एक-एक सोनालिका ट्रैक्टर।
2.    खालिद खान पुत्र शफी खान निवासी पुंगरी के नाम महिन्द्रा-27 ट्रैक्टर।
3.    सरदार अली पुत्र मुबारक अली निवासी करबई ( प्रधान) के नाम महिन्द्रा-26 ट्रैक्टर।
4.    नोमान अहमद सिद्दीकी, फैजान अहमद सिद्दीकी पुत्र इफ्तेखार अहमद सिद्दीकी निवासी खाईंपार बांदा (मूल निवास जनपद फतेहपुर) के नाम एक-एक महिन्द्रा-26 ट्रैक्टर। जिसमें फैजान अहमद सिद्दीकी नरैनी क्षेत्र में खनन माफिया भी हैं।
5.    नफीस अहमद पुत्र अब्दुल रशीद निवासी जमवारा को महिन्द्रा-26 ट्रैक्टर।
6.    अमानउल्ला खां पुत्र फरहत उल्ला खां निवासी डिंगवाही बांदा को महिन्द्रा-26 ट्रैक्टर।
7.    शबनम बेगम निवासी लड़ाकापुरवा के नाम आयशर-380 ट्रैक्टर।
8.    छोटा खां पुत्र छैला खां निवासी कोर्रही को आयशर-380 ट्रैक्टर।
9.    अब्दुल शफीक पुत्र अब्दुल वहीद निवासी लहुरेटा को आयशर-380 ट्रैक्टर।
10.    मोहम्मद अयूब पुत्र हाजी अब्दुल खालिक निवासी चिल्ला के नाम आयशर-333 ट्रैक्टर।
11.    करीबी लोगों में पिपरहरी निवासी अमर सिंह को महिन्द्रा-26 और बेटे शिव सिंह को महिन्द्रा-26 ट्रैक्टर दिया गया जो बांदा में स्वराज कालोनी निवासी हैं।
12.    ग्राम भुरेड़ी के सियाराम, बाघा के प्रदीप कुमार, मटौंध के वंशगोपाल, धौंसड़ के रामराज, बाकरगंज बांदा निवासी नोखेलाल, महोखर के राहुल, सिंहपुर के रमेश सिंह, जसईपुर के जगमोहन सिंह, जौहरपुर के छत्रसाल, परमपुरवा के बालेन्द्र, मूंगुस के लल्लू, तिन्दवारी के रामचन्द्र, लड़ाकापुरवा के शिवबरन ऐसे नाम हैं जिनके हिस्से में आये गरीब किसानों के बुन्देलखण्ड पैकेज में मिलने वाले खेतिहर ट्रैक्टर।

गौरतलब है कि बुन्देलखण्ड पैकेज से मिले उपरोक्त ट्रैक्टरों को ज्यादातर बालू खनन, पत्थर खनन की ढुलाई के लिए ही लगाया गया है। तिन्दवारा के ग्राम प्रधान अनिल द्विवेदी बताते हैं कि किसानों के हिस्से आये ट्रैक्टर मंत्री परिवार के चहेतां को दे दिये गये। गरीब किसानों को जब यह बात पता चली तो उन्होंने अपने पैर खामोशी से पीछे खींच लिये।

आशीष सागर दीक्षित
सामाजिक कार्यकर्ता

 ashishdixit01@gmail.com

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