International Journal of Environment & Agriculture
ISSN 2395 5791
"किसी राष्ट्र की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से मापा जाता है कि वह अपने यहां जानवरों से किस तरह का सलूक करता है"- मोहनदास करमचन्द गाँधी

जर्मनी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार "द बॉब्स" से सम्मानित पत्रिका "दुधवा लाइव"

Mar 5, 2011

एक बच्चे के कुछ अनुत्तरित सवाल अपनी माँ से....

कुछ सवालों के जवाब शायद आप दे सको ...........

माँ मैं कौन हूँ? एक बच्चे ने अपनी माँ से पूछा, माँ ने कहा मेरे बच्चे तुम इस जंगल के राजा हो! बड़े होकर जंगल पर राज करोगे, तो क्या में अभी भी जंगल का राजा हूँ? बच्चे ने पूछा, हाँ बिल्कुल हो माँ ने जवाब दिया! तो फिर जब वो दूसरा जानवर आता है, तो हम उसे देखकर क्यों छुप जाते है? क्या वो हम से ज्यादा ताकतवर जानवर है? नही माँ ने कहा वो इस दुनिया में सबसे शातिर दिमाग का जानवर है..............
वो पूरी दुनिया पर राज करता है, हम इस जंगल के राजा है सिर्फ़ एक दूजे के लिए उसके लिए नही, क्योकि अगर हम राजा है तो वो तभी तक है जब तक वो कहता है और नही तो एक ही पल में हमारी जिन्दगी को ख़त्म कर सकता है, लेकिन माँ प्रकृति ने तो सब को बराबर हक दिया है और सबको अपनी मर्जी से जीने का और इस धरती पर रहने का हक है तो फिर वो कौन होता है? हमारी जिन्दगी का फ़ैसला करने वाला? मेरे बच्चे  तुम अभी बहुत छोटे हो नही समझोगे! माँ ने कहा। फिर मुझे पता कैसे चलेगा माँ? जब तुम बड़े हो जाओगे तो खुद सब कुछ जान जाओगे कि ये दुनिया क्या है, और तुम क्या हो! माँ ने कहा जब कुदरत ने सबको बनाया था, तो सब का पूरा ख्याल रखा था, एस धरती पर कुदरत की बनाई कोई चीज बेकार नही है, हर किसी की जरुरत है इस धरती पर उसने पेड़-पौधे,जानवर,पानी,पहाड़,किट-पतंगे बनाये!
फिर वो कौन है माँ? मेरे बच्चे उसे इन्सान कहते है! वो कहा रहता है माँ? कहने के लिए तो वो इस जंगल से बाहर रहता है, उसे दो पैरो वाला जानवर कहते है, वो बड़ा ही खतरनाक है! 
क्या वही राजा है इस धरती का? माँ ने कहा नही वो कुछ नही है इस धरती पर बिना हमारे, पर वो खुद को इस धरती का मालिक समझ बैठा है, उसे ये पता है के वो हमारे बिना कुछ नही है, पर वो इस बात को कभी नही मानेगा, उसने कुदरत का नियम तोडा है,  उसने सब कुछ ख़त्म कर दिया ताकि वो इस धरती पर राज कर सके, बिना ये सोचे के दुसरो को भी जीने का उतना ही हक है जितना कि उसे है! लेकिन माँ हमने तो कुदरत का कोई नियम नही तोडा फिर हमे क्यों सजा मिलती है? क्योकि कुदरत ने सबको एक दूसरे के लिए बनाया था।

धरती पर हर कोई एक दूसरे के बिना अधुरा है, हम सब एक है, नियम चाहे  कोई भी तोड़े सजा तो सभी को मिलेगी! क्या मुझे भी?? मैने क्या किया? क्योकि अब ये दुनिया इंसानों के हाथ में है वही धरती का हमारा विधाता बन बैठा है, वो चाहे जो करे सजा सिर्फ़ हमें ही मिलेगी! मुझे तो ये भी नही पता कि मैं अगले ही पल तुम्हारे लिए खाना  लेने गई तो वापस तुम्हरे पास लौटूगी कि नही! क्यों माँ वो तुम्हे क्यों मरेगे? और तुम्हे कुछ हो गया तो मैं ..................माँ ने कहा बच्चे वो ये समझता है कि धरती पर हमारा कोई कम नही, हम सिर्फ़ उनके इस्तेमाल  के लिए ही इस धरती पर है! ये इस्तेमाल क्या है ?
ये क्या है माँ? वो हमे मरकर हमारे जैसा बनना चाहता है वो ये सोचता है के कुदरत ने हमे उनके इस्तेमाल के लिए बनाया है, हमारी खाल को अपने ऊपर सजाना चाहता है! लेकिन माँ हम भी तो दूसरे जानवरों को मारकर खाते है क्या तब कुदरत का नियम नही टूटता?  नही बच्चे हमने कभी कुदरत का नियम नही तोडा हम सिर्फ़ उतना लेते है, जितनी हमें जरुरत है, हम जानते है, अगर हमने सब कुछ आज ही ख़त्म कर दिया, तो कल किसी के लिए कुछ नही बचेगा! माँ क्या ये बात इन्सान नही सोच सकता ? अपने तो कहा के उसका दिमाग बहुत तेज है, तो क्या वो इतनी सी बात नही समझ सकता? 
तो फिर हम क्यों इंसानों के बनाये नियमो का पालन क्यों  करे? जो सिर्फ़ उनके लिए सही है, उनका गलत काम भी और जो हमारी जरुरत है वो उनके लिए गलत है? अगर वो हमे अपने घर में बर्दाश्त नही कर सकता तो फिर हम क्यों करे? जब वो हमे पकड़कर ले जाते है, अपने घर तब भी हमे ही सजा मिलती है? और जब वो मेरे घर में आते है तो भी हमें ही क्यों सजा मिलती है? क्यों? माँ मुझे राजा नही बनना है। 

मैं सिर्फ़ आपके साथ रहना चाहता हूं, आजादी से रहना चाहता हूँ, और कुछ नही, क्या मैने इस दुनिया में आकार कोई गलती की है? क्या मुझे जीने का कोई हक नही? 

क्या मेरी यही गलती है, कि मैं इन्सान नही? क्या इसी लिए हमे सजा मिलती है? हमारी यही गलती है, कि हम इन्सान की तरह मतलबी नही? क्या हमेशा वही हमारी जिन्दगी का फ़ैसला करता रहेगा? क्या मैं भी एक दिन आपका इंतजार करता रहूंगा? .........

....या आप मुझे खोजती रहेगी और मैं आपको कही नही मिलूंगा?  शायद मैं जब कुछ टाइम के बाद उनके घर जाऊंगा तो आपको उनकी दिवार से टंगा पांऊगा और उसकी दूसरी दिवार पर मैं.....!? 

क्यों माँ?  माँ बस यही मेरी दुनिया है? मुझे तो कुछ नही चाहिये दुनिया में आपके सिवा?? माँ-माँ-माँ-माँ??.............
उसे कोई जवाब नही मिला!

...कहाँ गई उसकी माँ उसे छोड़कर? मासूम बच्चे के मासूम सवालो के जवाब कोई दे सकता है? उस मासूम की आँखों में देखो, 
क्या वो हमारा गुनहगार था? वो अपनी माँ के बोलने का इंतजार कर रहा है!  
क्या कोई जायेगा उसे प्यार करने के लिए? 
उसकी माँ की जगह लेने के लिया? उसके सवालो का जवाब देने के लिए? कोई दे सकता है मेरे सवालो का जवाब???

सुरेश बरार (लेखिका गुड़गांव में रहती हैं, ताईकांडों सीखना व सिखाना इनका मनपंसद कार्य है, वन्य जीवों से प्रेम, अभी तक ताईकांड़ों जैसी विशेष कला में तमाम एवार्ड अर्जित कर चुकी हैं, वन्य जीवन के सरंक्षण में कार्य करने वाली कई राष्ट्रीय एंव अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं, इनसे  brar.suresh@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।)

2 comments:

  1. The article show the reality of this world. Whoever is staying in the forest is not an animal. Now, Animals are staying in the sky heigh buildings.

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  2. answer nature hi khud de degi ek din insaan ko...
    jab arayans ne hindustaan ki dharti par mool niwasiyo k sath jabardasti unka hakk chhena, to wese hi mughlo unka shoshan kiya, or just usi tarah angrejo ne...
    yaha sabko pata hai ki jese ko taisa wali parampara nature ne bana rakhi hai lekin maanta koi nahi....
    aaj poori maanav jaati jis tarah nature k hi khilaaf khadi ho gai hai... to ye jhagda ab aryans ya british ka nhi seedhe-2 nature se hai...
    saaf si baat paani me rahke magar macch se bair...
    dekhte hai baat na sambhaali to lutiya doobne me wakt nahi lagega...

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